कोई मरता है तो क्या करें हम नेता हैं

कोरोना महामारी से पूरी दुनिया त्राहिमाम है पर उनके लोग उनकी सरकार उनके साथ इस महामारी से लड़ने में सहयोग कर रही है.पर मोकामा के लोगों को उसके बदहाली पर रोने के लिए छोड़ दिया गया है.येसा नहीं है कि मोकामा के लोगों ने लोकतंत्र में आस्था नहीं दिखाई है . जब भी लोकतंत्र की बात होती है अपने विवेक के आधार में मोकामा के लोगों ने बेहतर जनप्रतिनिधि को चुनकर सदन भेजा है .

आज इस महामारी के वजह से मोकामा के लोगों को 2 वक्त का भोजन जुटाना कठिन हो गया है तो कोई भी जनप्रतिनिधि इनके दर्द पर मलहम नहीं आया.बाज़ार तो यंहा पहले ही लाचार था पर अब तो शून्य जैसे हालात हैं .2 साल पहले का विडिओ आज भी एकदम सत्य प्रतीत होता है .

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