हेड सर (सीताराम बाबा)..

एक येसा वक्तित्व जिनका अनुशासन का पैमाना इतना शख्त था की  छात्र तो छात्र शिक्षक गन भी उनके सामने कांपते नज़र आते थे.राम कृष्ण रुद्रावती उच्च विद्यालय को अपने हाथों से संवारा.अपने जीवन के अंतिम दिनों तक भी वो स्कूल जाते रहे और अपने ज्ञान का एक एक बूँद अपने समाज को सुनहला बनाने मैं अर्पण कर दिया . पढ़ाने का जूनून कह लें या एक शिक्षक का गुण बाबा रिटायर्ड होने के बाद भी  सप्ताह मैं एक दो दिन स्कूल चले ही जाते और अंग्रेजी की क्लास लेने लगते. छात्र से लेकर शिक्षक तक सबको अनुशासन का पाठ पढ़ाते.

जीवन की आखिरी बेला मैं जब उनका शरीर बिकुल जबाब दे चूका था तब भी वो अपने घर पर अंग्रेजी की मुफ्त ट्यूशन देते थे.बिना किताब पढ़ाने की उनकी क्षमता बच्चों को उनसे जोड़े रखती थी. उनके हाथो की छड़ी जिनका उपयोग वो भली भांति जानते थे.बच्चो को पढ़ाने मैं कोई कोताही नहीं छोड़ते अगर जरुरत होती तो वो पिटते भी थे.अगर कोई बच्चा पढने आने से मना कर देता तो उसे घर से भी बुलवा लेते. हर शाम अपने मोह्हले मैं घूम घूम कर लोगो से सुख दुःख बतियाते रहते .क्या बच्चे क्या बड़े हर किसी को टोक कर उसका हाल चाल  पूछते .शिकायत भी करते मगर सुझाव भी जरुर बताते.हेड सर अपने बच्चो(छात्रों) के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहे जब भी कोई मिलता उसकी पूरी जानकरी लेते  क्या कर रहे हो ,पढाई कैसी है,अगर कोई कमी दिखती तो तुरंत सलाह देते.बाबा ‘गुलमोहर’ नमक किताब से पढ़ते थे. कभी उदास भी रहे  तो हँसते हसाते रहे.दुखी थे बाबा जब उनके घर के आगे का स्कूल खंडहर मैं तब्दील होता जा रहा था.बाबा न सिर्फ एक अच्छे शिक्षक,समाजसेवी थे वरन इन्होने देश की आज़ादी की लड़ाई मैं भी अपना योगदान दिया था.बाबा देश की आजदी की खातिर जेल भी गए. अंग्रेजों की लाठिया भी खाई थी.

पान खाना और रेडियो सुनना बाबा को बहुत पसंद था.बाबा सुबह से ही रेडियो पर समाचार सुन्ने लगते थे .दिन भर में १०-२० पान खा ही लेते थे.हर घंटे का समाचार,हर भासा का समाचार सुनते थे.खेती की भी बहुत जानकारी थी अक्सर लोगो को नए नए तरीके बतलाते.प्रशासन को भी फसलों की लूट और आगजनी आदि मामलो पर ध्यान दिलाते .वैसे तो बाबा में बहुत गुण था मगर अंग्रेजी का ज्ञान उने कूट कूट कर भरा था और वो इसे जीवन पर्यंत बांटते रहे.

हेड सर आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी कही बाते प्रेरणा बनके हम सबका उत्साह बढ़ाते रहेंगे.

2 टिप्पणियाँ
  1. Aparna Devyani कहते हैं

    m proud to be his grand daughter…. we love u baba ji…..

  2. Aparna Devyani कहते हैं

    aur padhai k waqt agar koi chapter me se koi line ya paragraph uddata tha to babaji turant samjhe jate the… fir to usski lag jati thi…. he was genius….

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