चिताओं की गर्मी से जल उठा शमशान पर साहब नहीं पिघले

बिहार |पटना|मोकामा|महामारी के इस बुरे दौर में मोकामा के हर परिवार ने अपनों को खोया है .हर घर में क्रन्दन की पीड़ा देखी जा सकती है . औंटा जैसे छोटे गावं में दर्जनों लोग काल कवलित हो गये ,रोजाना दर्जनों चिताओं से जल उठा था शमशान . मोकामा के हर खुट गोतिया में कई लोग मर गए .स्वास्थ व्यवस्था तो पहले से ही लचर थी किसी के सुध न लेने की वजह से पूरी तरह चरमरा गई. मोकामा जैसे जगह पर स्वास्थ व्यवस्था इतनी खराब है जन्हा दर्जन भर नेता अपनी अपनी पार्टी में शीर्ष पर नेतागिरी कर रहे हैं,तो सोचिये अन्य जगहों का हाल कितना बुरा होगा. मोकामा की मिटटी ने कई सांसद ,विधायक ,विधान पार्षद यंहा तक की मुख्यमंत्री तक को पाला पोसा मगर सबके सब मोकामा को बूढ़े माँ बाप की तरह उनके बदहाली पर मरने छोड़ दिया.

सोचिये की अगर आपके किसी प्रियजन को रात के 8 बजे के बाद मामूली सी भी छोट आ जाती है तो पटना और बेगुसराय जाने के सिवा कोई रास्ता नहीं है .मोकामा में कंही टांका तक नहीं लगेगा. अब सवाल ये उठा है की इस सड़े हुए स्वास्थ्य व्यवथा के लिए जिम्मेदार कौन है ? जबाब खुद सोचिये और दिल से सोचियेगा. आखिर जनता करे तो क्या करे हर किसी के पास इतना सामर्थ भी नहीं है की पटना दिल्ली दौड़ सके.छोटी मोटी बीमारी में घर खेत सब बिक जाता है.विडियो देखिये ट्रामा का ड्रामा

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