प्लाज्मा डोनेट कर कोरोना योद्धा बना मोकामा का लाल, बीएसएफ का जांबाज

प्लाज्मा डोनेट कर कोरोना योद्धा बना मोकामा का लाल, बीएसएफ का जांबाज

मोकामा। कोरोना को मात देने वाले मोकामा के एक लाल ने अब प्लाज्मा डोनेट कर सेवा भाव और मानवीय संवेदना की मिसाल कायम की है। बीएसएफ में कार्यरत अमित सिंह ने सीमा पर राष्ट्र रक्षा में अपनी जांबाजी दिखाने के साथ ही अब कोरोना योद्धा और रक्षक के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है। अमित सिंह मोकामा के मोलदियार टोला वार्ड नं 10 निवासी हैं और बीएसएफ में सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक कोरोना पीड़ित के लिए प्लाज्मा दान किया। चिकित्सा विज्ञान का मानना है कि कोरोना से ठीक हुए मरीज के प्लाज्मा और आम इंसान के प्लाज्मा में फर्क ये होता है कि जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है तो उसमें एंटीबॉडी बनते हैं। यही एंटीबॉडी दूसरे कोरोना संक्रमित के काम आते हैं, जो वायरस को नष्ट करते हैं। अमित सिंह के प्लाज्मा डोनेट करने से वह व्यक्ति अब पूरी तरह ठीक हो गए हैं।

अमित से प्लाज्मा मिलने के कारण ठीक हुए व्यक्ति ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखा है। वे लिखते हैं….
हमने कभी भगवान को तो नहीं देखा है, लेकिन एक भगवान के दूत को जरूर देखा लिया। इस दुख के घड़ी जो अमित सर ने किया है मेरे परिवार के लिए वो चीज मै अपने ज़िन्दगी में कभी नहीं भुला सकता। एक सैनिक हमारे लिए रियल अभिनेता होते है देश के लिए, लेकिन ये चीज भी साबित हो गया कि वो बिना वर्दी के भी एक हीरो का काम करते है, उनकी जिंदादिली की क्या मिसाल दू। ये मैं अपने जज्बात में लिख के तो आप लोगो से बयान नहीं कर सकता।
वे आगे लिखते हैं…
कोई भी लोग अच्छे लोग तब ही बन पाते है जब उनकी परवरिश एक अच्छे परिवार में हो, और सर का परिवार को देख के है अपलोगो को लग जाएगा कि ऐसा बेटा इसी घर मै पैदा हो सकता है। इन्होंने प्लासमा दान भी किया और फोन कर के पिता जी का हाल भी हमेशा पूछते रहते है, सर आप लोग ही है जिस से हमलोग केह सकते है कि अभी भी इंसानियत दुनिया में बची हुई है। आज अमित सर की पत्नी से बात हुआ था, भाभी ने बोला जैसे हमलोग को पता चला कि ऐसा बात है मैंने उनको तुरंत कहा कि पहले आप ये काम कर के आए तब ही आपको हम खाना बना के खिलाएंगे, ऐसे महान सोच के लोग, जो दूसरे के तकलीफ को अपना समझते है वहीं लोग सच्चे मायने में इंसानियत का मिसाल है। मै, मेरा परिवार और तमाम दादूपुर प्रखंड के सभी लोग आपको धन्यवाद करता हूं, ये कर्ज तो हमेशा के लिए अपने हम लोगो को दे दिया है, जो कभी उतारा नहीं जा सकता, बस ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं कि आपके परिवार पे कभी कोई आंच ना आए, अगर आपको ज़िन्दगी में कभी भी सर एक छोटे भाई की मदद कि जरुरत परे तो जरूर बताइएगा आप, हमे बहुत खुशी होगी सर अगर मै कभी आपके काम आ सकूं।
ईश्वर से यही हमेशा यही कहूंगा कि आप हमेशा ऐसे ही स्वास्थ रहिए और आपके परिवार पे कभी भी कोई कठिनाई ने आए। आपकी बेटी तो सर अभी छोटी है, लेकिन जब वो बड़ी होगी तो बहुत गर्व महसूस होगा उन्हें की वो ऐसे महान दिल वाले सख्स की बेटी है।।
“ज़िन्दगी ज़िंदा-दिली का है नाम
मुर्दा दिल खाक जिया करते है”
ThanQ so much bhaiya for your Nobel help🙏❤🤗
:- Atul

मोकामा ऑनलाइन अमित के जज्बे की सराहना करता है और आपके सुखद, सुदीर्घ और सफलतम जीवन की मंगलकामनायें।

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