अद्भुत अकल्पनीय सैकड़ो साल पुराने पीपल के वृक्ष को दिया नवजीवन

बिहार।पटना।मोकामा। सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर मोकामा घाट के परिसर में पिछले दिनों आये आँधी तूफान के वजह से एक सैकड़ों साल पुराना पीपल का वृक्ष जड़ से उखड़ गया था, जिसे सुनीत कुमार राय, पुलिस उपमहानिरीक्षक के नेतृत्व में पुनः रोपित किया गया।पीपल को पुनः रोपित करने से पहले पेड़ की अच्छी तरह से कटाई छंटाई की गई, कई तरह के रसायनों का लेप उस कटिंग पर लगाया गया। जेसीबी कि सहायता से जड़ को खोदा गया और पेड़ को खड़ा कर रोपा गया।सामान्यतः यह माना जाता है कि जो पेड़ एकबार जड़ से उखड़ गया उसे पुनः लगाया नहीं जा सकता।सीआरपीएफ के अधिकारियों ने इस पीपल के वृक्ष को पुनः लगा कर धरती को हरा भरा रखने में अहम योगदान दिया है। अगर कोई एक पुराना पेड़ गिरता है तो उससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुँचता है। ऑक्सीजन दायनी पुराने पेड़ को सौ नए पेड़ लगा कर भी बराबरी नहीं कि जा सकती।सैकड़ों चिड़ियों और अन्य जीवों का बसेरा था यह वृक्ष।इस वृक्ष की कमी अगले 30-40 सालों तक खलने वाली थी।इसलिये इस पुराने और विशाल पीपल के वृक्ष को बचाने के लिए विशेष पहल की गई।किसी भी पेड़ को जड़ से उखड़ने के वावजूद भी उसमें जीवन बचा रहता है।वैज्ञानिक तरीके से ऐसे पेड़ों को नवजीवन दिया जा सकता है।
इसके लिए सर्वप्रथम जड़ो को खोदा गया उसमें पोषक तत्व, खाद और अन्य जरूरत की सामग्री भी डाली गई।मिट्टी तैयार करने के बाद पेड़की कटाई छटाई के बाद कटिंग के ऊपर विशेष रसायन का लेप लगाया गया ताकि पेड़ न सूखे न सड़े।इन सभी विधियों के अपनाने के बाद पेड़ सूखने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।रसायन लगे पेड़ को गड्ढे में रोप दिया जाता है।
इस नेक कार्य के लिये डीआईजी सुनीत कुमार राय ने Afcons हाथीदह के प्रोजेक्ट मैनेजर यू.एन सिंह से क्रेन का अनुरोध किया जिसे उनके द्वारा मान लिया गया।इस अवसर पर प्रवीण कुमार,कमांडेंट गोपाल सिंह बुनकर,उप कमांडेंट श्री अनुराग,सहायक कमांडेंट श्री भरत कुमार,श्री अजय कुमार सहायक कमांडेंट , निरीक्षक श्री अनिल सिंह एवं ग्रुप केंद के सभी अधीनस्थ अधिकारी व जवान मौजूद रहे।
ज्ञात हो कि सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर मोकामा घाट के अधिकारियों के द्वारा वृक्षारोपण, प्लास्टिक इस्तेमाल नहीं करना,पर्यावरण की सुरक्षा के लिये कई तरह के कार्यक्रम का आयोजन समय समय पर किया जाता है।समय समय पर साइकिल यात्रा निकाल कर लोगों को स्वास्थ्य के लिये भी जागरूक किया जाता है।

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