औंधे मुंह गिरा मोकामा नगर परिषद सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, कृष्ण बल्लभ की बादशाहत बरकरार

मोकामा। नगर परिषद मोकामा के सभापति कृष्ण बल्लभ कुमार के खिलाफ शनिवार को लाया गया अविश्वास प्रस्ताव औंधे मुंह गिर गया। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों को एक बार फिर से मुंह की खानी पड़ी और वर्ष 2017 से सभापति पद पर काबिज कृष्ण बल्लभ कुमार को अपदस्थ करने का मंसूबा अधूरा ही रह गया।

शनिवार को नगर परिषद कार्यालय में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल रहा। वहीं पूरे मोकामा नगर क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर थी कि क्या 2022 में होने वाले पार्षदों के चुनाव के पूर्व कृष्ण बल्लभ कुमार को सभापति पद से हटाने के लिए एकजुट हुए पार्षद वोटिंग के समय तक एकजुट रह पाएंगे।

हालांकि हुआ वही जिसका अंदेशा था। जैसे पिछले कई बार लाये जा चुके अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्षी एकता दरकती रही है। वही इतिहास एक बार फिर से शनिवार को दोहरा गया।

28 वार्डों वाले नगर परिषद में कुछ पार्षदों ने सभापति के खिलाफ कथित रूप से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसी को लेकर सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। सभापति को हटाने के लिए कम से कम 15 पार्षदों का अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में समर्थन करना जरूरी है।

पिछले कई दिनों से 10 अप्रैल को लाया जाने वाला अविश्वास प्रस्ताव सुर्खियों में था ही। शनिवार को जब कोरम पूरा करने की बारी आई तो 16 पार्षद उपस्थित रहे। इनमें वार्ड नं 1 टुन्नी देवी, 2 की सीता देवी, 5 के संजय गुप्ता, 6 की बुलबुल देवी, 10 के नवीन कुमार बिट्टू, 11 की सुकुमारी देवी, 13 के मुरारी कुमार, 15 के भरत ठाकुर, 14 की पूनम देवी, 17 की रंजू देवी, 16 की अंजली देवी, 21 की सिंधु देवी, 19 की बबीता देवी, 20 की पिंकी देवी, 22 के दलजीत सिंह, 23 की उषा देवी शामिल रहे।

अविश्वास प्रस्ताव पर तय मानकों के तहत कुछ समय तक चर्चा हुई। बाद में जब शक्ति परीक्षण के लिए मतदान हुआ तब 14 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। वहीं एक सदस्य का मत अमान्य कर दिया गया जबकि एक सदस्य ने विपक्ष में मतदान किया। इस तरह 15 पार्षदों के बदले सिर्फ 14 का समर्थन ही अविश्वास प्रस्ताव को मिला और यह गिर गया। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार ने अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने की घोषणा की।

कृष्ण बल्लभ कुमार की बादशाहत बरकरार रखने के लिए उनके कई समर्थक नगर परिषद कार्यालय के आसपास कड़ी धूप में जमे रहे। और जब अविश्वास प्रस्ताव गिरने की खबर आई तब समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।उन्होंने अपने हितैषी नेता को फूल मालाओं से लाद दिया और उनके समर्थन में नारेबाजी की।

गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब सभापति कृष्ण बल्लभ कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया हो। इसके पहले भी कई बार ऐसा हुआ है लेकिन कभी भी प्रतिद्वंद्वी अपनी योजनाओं में सफल नहीं हुए हैं। माना जा रहा है कि अब 2022तक सभापति के रूप में कृष्ण बल्लभ कुमार की कुर्सी पर कोई आंच नहीं आएगी।

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