National Sports Day अभाव में प्रभाव छोड़ रही मोकामा की बेटियां।

अभाव में प्रभाव छोड़ रही मोकामा की बेटियां

बिहार।पटना।मोकामा।शिक्षा ,नौकरी,खेल हर क्षेत्र में मोकामा की बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही है। हर क्षेत्र में देश विदेश में अपना परचम फहरा रही है मोकामा की बेटियां। कबड्डी में कई बेटियों ने विदेशों में जाकर मोकामा का नाम रौशन किया है। Gold silver or bronze medal का अंबार लगाया बेटियों ने मगर आज तक इनके लिए एक अलग से खेल का कोई मैदान नहीं है। (National Sports Day   )चाइना, ईरान सहित देश के कई बड़े बड़े शहरों में मोकामा की बेटियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से कई इनाम जीते हैं। चीन के 2010 में हुए एशियाड खेलों में मोकामा की स्मिता कुमारी उस कबड्डी टीम में शामिल थी जिसने देश के लिए गोल्ड जीता था।  2017 में हुए ईरान के एशियन चैंपियनशिप में शमा परवीन ने देश का झंडा बुलंद किया था और भारत की झोली में स्वर्ण पदक आया था।

फरवरी 2019 कोलकाता  में हुए ऑल इंडिया कबड्डी के आयोजन में कोमल कुमारी ने जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित किया था कि अगर हमें उचित संसाधन मिले तो हम बहुत आगे बढ़ सकते हैं। कोमल कुमारी ने जुलाई 2019 में पटना में आयोजित ऑल इंडिया कबड्डी के सीनियर आयोजन में कांस्य पदक जीतकर मोकामा की अन्य बेटियों को रास्ता दिखाया।(National Sports Day   )

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Mokama ,मोकामा

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खेलो इंडिया 2020 में मोकामा की कई बेटियों ने हिस्सा लिया और कई पदक जीते

2019 खेलों के सीनियर वर्ग में वर्षा कुमारी ने कांस्य पदक जीतकर इस सिलसिले को और आगे बढ़ाया।
खेलो इंडिया 2020 में मोकामा की कई बेटियों ने हिस्सा लिया,जूनियर  वर्ग में नैंसी ,प्रिया,लक्ष्मी,सुरुचि रीता,रूपम कांस्य पदक जीतने वालों में थीं।
यहां से आधा दर्जन से ज्यादा लड़कियां नेशनल गेम्स खेल चुकी है।(National Sports Day   )

ज्ञात हो कि इस खेल के वजह से ही आज स्मिता कुमारी और शमा परवीन जैसी मोकामा की बेटियां बड़े सरकारी पदों पर नौकरी भी कर रही है। स्मिता कुमारी पहले रेलवे और उसके बाद सचिवालय में नौकरी कर रही हैं जबकि शमा परवीन रेलवे में टीटीई के पद पर कार्यरत हैं।(National Sports Day   )

कोच मो. इलियास बताते हैं की अभाव में प्रभाव छोड़ रही इन बेटियों की राह बड़ी मुश्किल रही है।

मोहम्मद इलियास बताते हैं की अभाव में प्रभाव छोड़ रही इन बेटियों की राह बड़ी मुश्किल रही है। 2008 के आरंभ से ये बच्चियां दरियापुर के गंगा घाट के पास प्रैक्टिस करती थी। उसके बाद बांटा के मैदान में ये प्रैक्टिस करने लगी और अभी 2016 से औटा के शीला उच्च विद्यालय के मैदान में अभ्यास कर रही है। पुरुषवादी सोच ने कई बार इन बेटियों के हौसले तोड़ने की कोशिश की पर हर बार इन बेटियों ने पुरुषवादी सोच को ही तोड़ दिया। यहां बहुत सारी प्रतिभा आज भी घरों में है जो अच्छा खेल सकती थी । यहां लड़कियों के खेलने के लिए कोई सेपरेट ग्राउंड नहीं होने की वजह से कई लड़कियां शामिल नहीं होना चाहती।(National Sports Day   )


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(National Sports Day   )चाइना, ईरान सहित देश के कई बड़े बड़े शहरों में मोकामा की बेटियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से कई इनाम जीते हैं।

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