सरकारी बाबू भूले गए जिम्मेदारी , राष्ट्रीय बैंक में नहीं फहराया गया तिरंगा झंडा ।

बिहार।पटना।मोकामा। मुक्ति दिवस, स्वाधीनता दिवस, स्वतंत्रता दिवस ,Independence Day भारत की आजादी के इस पर्व को हम कितने ही नामों से मनाते हैं। लाखों लोगों ने अपनी कुर्बानी दी इस देश की आजादी के लिए । वीर भगत सिंह , राजगुरु, सुखदेव, अशफाक उल्ला ,चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस जैसे हजारों वीर सपूतों ने भारत मां की आजादी के लिए हंसते-हंसते जान निछावर कर दिया।
बिहार का सचिवालय आज भी गवाह है जब तिरंगा झंडा फहराने के लिए 7 युवकों ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी मगर तिरंगे को गिरने नहीं दिया तिरंगा फहरा कर दम तोड़ा। इस तिरंगे को माथे से लगाकर कितने वीर सपूतों ने हंसते-हंसते जान दे दी । भारत पाकिस्तान और भारत चीन कई बार युद्ध हुआ और हर बार भारतीय जवानों ने तिरंगे की शान बरकरार रखने के लिए हँस कर अपनी जान की कुर्बानी दी है।
इन शहीदों की कुर्बानी को लेकर आज के सरकारी बाबू कितने संवेदनशील हैं ।सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय पर्व को लेकर कितना गंभीर है, इसका उदाहरण स्वतंत्रता दिवस पर देखने को मिला। मोकामा के बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यालय में नहीं फहराया गया राष्ट्रीय ध्वज। आजादी का पर्व इतिहास के सुनहरे पन्नों पर अंकित है। 15 अगस्त 1947 को जब देश को आजादी मिली तो पूरा देश आजादी के महानायकों सहित खुद को धन्य महसूस कर रहा था, लेकिन आजादी के सात दशक बाद हम अपने वतन के उस महान दिन को भूलते जा रहे हैं। प्रतिवर्ष आजादी के पर्व पर सभी सरकारी, अ‌र्द्धसरकारी सहित तमाम लोग अपने प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं, लेकिन सरकारी तंत्र की शिथिलता कहीं न कहीं नजर जरूर जा जाती है। पूरे देश में आजादी की वर्षगांठ पर सार्वजनिक अवकाश घोषित रहता है। यह अवकाश इसीलिए होता है कि हम इस पर्व को मिलजुलकर मनाएं, लेकिन सरकारी तंत्र छुट्टी का लाभ उठाकर अपने कर्तव्य को ही भूलता जा रहा है। यह कर्मचारी अपने कार्यालय भवनों तक आना भी अपनी ड्यूटी नहीं समझते। मोकामा में स्थित बैंक ऑफ़ बरोदा के कार्यालय पर ताला लटका रहा। यहां कोई ध्वजारोहण करने नहीं आया। 

टिप्पणियाँ बंद हो जाती हैं, लेकिन Trackbacks और Pingbacks खुले हैं।