राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त नागेश्वर बाबू की पुण्यतिथि पर हुआ स्मरांणजलि,Nageshwar babu death anniversary

नागेश्वर बाबू की पुण्यतिथि पर हुआ स्मरांणजलि।

मोकामा।(Nageshwar babu death anniversary) शिक्षा प्रकाश पुरूष स्व. नागेश्वर बाबू की 31वीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को मोकामा में स्मरांणजलि का आयोजन हुआ। श्री कृष्ण मारवाड़ी +2 विद्यालय के पूर्व प्रधानाध्यापक स्व. नागेश्वर बाबू की पुण्यतिथि पर विद्यालय परिसर स्थित उनकी प्रतिमा पर मोकामा के नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार सहित शिक्षक समुदाय, प्रबुद्ध नागरिकों एवं विद्यार्थियों द्वारा माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। साथ ही सन 1940 के स्थापना काल दौर से ही विद्यालय के ढांचागत निर्माण के अग्रणी दानदाता शिल्पकार रहे सेठ मालीराम खेतान की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

Nageshwar babu death anniversary

कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में नागेश्वर बाबू का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

विद्यालय सभागार में आयोजित परिचर्चा में कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में नागेश्वर बाबू का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। मोकामा के साथ ही उनकी उपलब्धियों ने राष्ट्रीय स्तर पर बिहार को गौरवांवित किया है। उनकी शैक्षणिक कुशलता का प्रतिफल था कि उन्हें वर्ष 1960 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मौजूदा दौर में मोकामा को उनके सपनों को मूर्त रूप देने के लिए प्रयासरत होने का है। इसके लिए मोकामा के प्रबुद्ध वर्ग के साथ युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों को प्रयासरत होने की जरूरत है।(Nageshwar babu death anniversary)

Nageshwar babu death anniversary

शिक्षक,छात्र और समाजसेवकों ने याद किया नागेश्वर बाबु को ।

श्याम किशोर सिंह, देंवेद्र सिंह, शिवचंद्र प्रसाद सिंह, शिवदत्त शर्मा, उदय कुमार, छितेंद्र सिंह, विजय कुमार सिंह, उमेश सिंह, अर्जुन राम, राजीव रंजन रिशु, मुरारी, रौशन भारद्वाज आदि ने नागेश्वर बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। प्राचार्य मुरलीधर ने विद्यालय की गतिविधियों से अवगत कराया।(Nageshwar babu death anniversary)

गौरतलब है कि नागेश्वर बाबू ने 1 जनवरी 1945 से 11 जून 1971 तक विद्यालय में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की थी। उनका जन्म 12 जून 1906 को हुआ था और 7 सितंबर 1987 को देवलोकगमन हुआ।

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सात साथियों के शहादत के बाद भी रामकृष्ण सिंह ने सचिवालय पर झंडा फहराया था।

स्व.पं. साधू शरण शर्मा ,खूब लड़े अंग्रेजो से।

याद किये गये चाकी।

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