रिसर्च काउंसिल से हुआ पास टाल है खास

बिहार|पटना|मोकामा|पूसा | मोकामा टाल केकिसनो के दिन हैं फिरने वाले हैं .डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि पूसा की 10वीं अनुसंधान परिषद् की बुधवार को संपन्न हुई बैठक में नौ नई परियोजना को स्वीकृति दी गयी,जिसमे मोकामा टाल के लिए भी अलग अलग परियोजनाओं की स्वीकृति मिली है. छह दिनों तक चली पहली वर्चुअल मोड की बैठक दो चरणों में समाप्त हुई .पहली बार हुई इस वर्चुअल मोड की बैठक में विवि वित्त पोषित 25 परियोजनाओं, 18 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की गई जबकि बैठक में पांच वेराईटी को भी अनुशंसित किया गया ।हा. इस बार 10 नये टेक्नोलॉजी पर मुहर लगी है .

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि पूसा के कुलपति डॉ. आरसी श्रीवास्तव की अध्यक्षता व निदेशक अनुसंधान (डीआर) डॉ. मिथलेश कुमार के संचालन में आयोजित बैठक में कई अहम निर्णय लिये गये हैं .डॉ. मिथलेश कुमार ने बताया कि बैठक में मछली के लिए विटामिन और खनिज मिश्रित पोषणयुक्त भोज्य पदार्थ के निर्माण, लीची के बीज व छिलके को फिस फूड बनाने, उत्तर बिहार में अमूर कार्प मछलीपालन एवं ऑरनामेंटल फिस पालन को बढ़ावा देने, मछलियों की बीमारियों के निदान के लिए मंथन कर निर्देश दिये गये हैं. वहीं म्यूटेशन ब्रीडिंग के माध्यम से तिलहन फसल सूर्यमुखी की नई वेराईटी के विकास, फलों व सब्जियों के भंडारण को लेकर लो कॉस्ट स्टोरेज उपलब्ध कराने के लिए चल रहे कार्यो की समीक्षा की गई हैं. इसके अतिरिक्त दो पंक्तियों में सब्जी बुआई (डबल रॉ वेजीटेबल प्लान्टर) के लिए विकसित यंत्र कार्य की समीक्षा की गई है जिससे किसानो की आमदनी कई गुना बढने की सम्भावना है . किसानों की आय व रोजगार बढ़ाने, फसल अवशेषों को उपयोगी बनाने, केला में नई बीमारी का अध्ययन कर उसे जैविक विधि से नियंत्रित करने, इलेक्ट्रॉनिक सेन्सर के विकास, मोकामा के टाल एरिया में प्राकृतिक खेती, सिंचाई व फसल अवशेषों को उपयोगी बनाने आदि को लेकर अलग-अलग परियोजना को स्वीकृत दी गई है.मोकामा टाल में प्राकृतिक खेती से किसानो की आय को बढाने के लिए प्रयास किया जायेगा.  प्राकृतिक खेती में फसल उपजाने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशक का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होता है, इस विधि से की जाने वाली खेती में सिर्फ गाय के गोबर और मूत्र पर आधारित खेत तैयार किए जाते हैं,जिसमें अति गुणवत्‍तापूर्ण उपज प्राप्‍त होती है,इस तरह की फसल बाज़ार में कई गुना महंगी हो जाती है. बहरहाल, प्राकृतिक खेती को इंसानों को जहर मुक्त भोजन उपलब्ध करने का कारगर और स्‍वदेशी तरीका माना जा रहा है. यह खेती की ऐसी खास तकनीक है, जिसमें रासायनिक खाद  और कीटनाशक का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है.प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय की ओर से किसानों को आर्थिक मदद भी दी जाती है.इस मौके पर कुलसचिव डॉ. पीपी श्रीवास्तव, एडीआर डॉ. एनके सिंह, डॉ. एसके सिंह, डीन डॉ. केएम सिंह, डॉ. सोमनाथ राय चौधरी, डॉ. केेके सिंह, निदेशक डॉ. एसके जैन, डॉ. पीपी सिंह समेत अन्य डीन-डायरेक्टर व वैज्ञानिक मौजूद थे.

टिप्पणियाँ बंद हो जाती हैं, लेकिन Trackbacks और Pingbacks खुले हैं।