नसबंदी के 1 साल बाद ही गर्भवती हो गई महिला

बंध्याकरण के बाद महिला के गर्भवती होने का मामला मोकामा का है. गर्भवती होने के बाद महिला के पति ने लोक शिकायत निवारण कोषांग का रूख किया है, वहीं पत्नी भी अनचाहे गर्भ से लेकर परेशान है.

बिहार के सरकारी अस्पतालों में होने वाला परिवार नियोजन कार्यक्रम एक बार फिर से सवालों के घेरे में है. मामला पटना से जुड़ा है जहां मोकामा प्रखंड के मोर गांव में अंशु देवी ने बंध्याकरण करवाया उसके बाद भी गर्भवती हो गई. इलाके के मोर गांव निवासी अंशु देवी की मानें तो उसने मोकामा के रेफरल अस्पताल में 2020 में अपना बंध्याकरण करवा था. उसने अपनी गांव की आशा शांति देवी के साथ पांच दिसंबर 2020 को बंध्याकरण का ऑपरेशन करवाया था.

पहले से दो बच्चो की मां अंशु देवी ने बच्चे की चाह छोड़ बंध्याकरण करवाया था लेकिन एक साल बाद फिर वो गर्भवती हुई तो पति पत्नी दोनों परेशान हो गए. अंशु देवी ने बताया कि कई बार आशा शांति देवी को इसकी सूचना दिया की फिर से गर्भवती कैसे हों गई तो टाल मटोल करने लगी. फिर उसी अस्पताल मोकामा रेफरल में जांच करवाया तो गर्भवती होने का पता चला.

अंशु देवी के पति महुली पासवान ने बताया कि जब अस्पताल में पता किया कि ऐसा कैसे हो गया कि बंध्याकरण के बाद उसकी पत्नी गर्भवती हो गई तो सभी ने पल्ला झाड़ना शुरू कर दिया. बताया गया कि जिस डॉक्टर ने ऑपरेट किया था वो अब रेफरल अस्पताल मोकामा में नहीं है.

गर्भवती होने के बाद अब पति-पत्नी दोनों परेशान हैं. उनकी आर्थिक हालात इतने भी अच्छे नहीं है कि तीसरे बच्चे का लालन-पालन कर सकें. पति-पत्नी ने हॉस्पिटल के विरूद्ध लोक शिकायत निवारण विभाग में शिकायत करने का मन बनाया है.

सूबे की सरकार स्वास्थ्य विभाग के कामों की बड़ाई करते नहीं थकती पर पटना जिला के मोकामा में जब ये हाल है तो अन्य जिलों की बात क्या कहना. हाल के दिनों में ये दूसरा मामला है जब बंध्याकरण के बाद भी कोई महिला गर्भवती बनी हो. इससे पहले मुजफ्फरपुर जिला में भी ऐसा ही मामला आया था.

बिहार का मोकामा अस्पताल जहां महिला का बंध्याकरण हुआ था

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