मोकामा-बड़हिया टाल का हाल बेहाल, बुआई संकट से जूझते पट्टेदार किसानों ने किया प्रदर्शन

मोकामा-बड़हिया टाल का हाल बेहाल।

मोकामा।(Mokama Online News 53) दाल का कटोरा कहे जाने वाले मोकामा टाल के किसान संकट में हैं। अक्टूबर का महीना अंतिम सप्ताह में पहुँच गया है लेकिन टाल में बुआई कब शुरू होगा कुछ नहीं कहा जा सकता। मोकामा बड़हिया टाल में इस समय 4 से 8 फीट पानी जमा है। जहां मोकामा बड़हिया टाल में 15 अक्टूबर से दलहन बुआई का आदर्श समय शुरू हो जाता है वहां अगर 15 नवंबर तक भी पूरे टाल से पानी निकल जाए तो गनीमत होगी।

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बुआई संकट से जूझते पट्टेदार किसानों ने किया प्रदर्शन।

मोकामा, मोर, पंडारक, कन्हाईपुर, शिवनार, औंटा, हाथीदह, मरांची सहित पूरे बड़हिया टाल क्षेत्र में अथाह जलजमाव है। नजर जहां तक जाती है समुद्र सरीखा रूप है।

टाल के इस जलजमाव ने किसानों का हाल बेहाल कर दिया है।

टाल के इस जलजमाव ने किसानों का हाल बेहाल कर दिया है। खासकर वे किसान जो पट्टा (लीज) पर खेत लेकर खेती करते हैं उनके समक्ष दोहरी परेशानी है। एक ओर खेत मालिक पूरा पट्टा राशि मांग रहे तो दूसरी ओर इसकी कोई गारंटी नहीं है कि टाल में बुआई कब होगी।(Mokama Online News 53)

पट्टेदार किसानों के एक समूह ने इसी विषय पर शुक्रवार को मोकामा में प्रदर्शन किया।

पट्टेदार किसानों के एक समूह ने इसी विषय पर शुक्रवार को मोकामा में प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि खेत मालिक उनकी मजबूरी समझें। जब टाल से पानी ही अब तक नहीं निकला है तो पट्टा पूरा कैसे दिया जाए। खेत मालिक पट्टेदार किसानों की चिंता समझें और कम पट्टा लें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कई किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।(Mokama Online News 53)

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खेत मालिक भी अनिश्चितता में घिरे हैं।

वहीं खेत मालिक भी अनिश्चितता में घिरे हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि वे पट्टा राशि कैसे कम करें? खेतिहरों और भूस्वामियों के बीच के इस अंतर्द्वंद्व में जलमग्न टाल सबकी परीक्षा ले रहा है। जलनिकासी के लिए अब तक न तो कोई राजनीतिक पहल हुई है और ना ही कृषि या जल संसाधन विभाग की ओर से कोई विभागीय पहल। इन सबमे मोकामा बड़हिया टाल के हजारों किसानों का भविष्य जरूर अंधकारमय हो गया है।

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