बड़ी दुर्गा स्थान मोकामा का ऐतिहासिक निर्णय, गर्भ गृह में विशिष्ट जन पूजा पद्धति को किया समाप्त

गर्भ गृह में विशिष्ट जन पूजा पद्धति को किया समाप्त।

मोकामा।(Mokama Online News 18) बड़ी दुर्गा स्थान मोकामा ने देवी दरबार में सभी भक्तों को समान मानते हुए गर्भ गृह में विशिष्ट जन पूजा पद्धति का प्रावधान समाप्त कर दिया है। मंदिर परिसर में रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया।

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बड़ी दुर्गा स्थान मोकामा का ऐतिहासिक निर्णय।


बड़ी दुर्गा स्थान पूजा समिति के अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि दिनांक 10.10.21 की बैठक मेंं एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत बड़ी दुर्गा माता के दरबार में सभी जन समान हैं और विशिष्ट जन पूजा पद्धति का प्रावधान समाप्त कर दी गयी है। अब तक के प्रावधान के अनुसार 1100/- की रसीद लेकर गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा करने का प्रावधान था जो इस बार से खत्म कर दिया गया है।(Mokama Online News 18)

विशिष्ट जन के नहीं, विशिष्ट जन संस्कृति के घोर विरोधी हैं।

उन्होंने कहा कि हम विशिष्ट जन के नहीं, विशिष्ट जन संस्कृति के घोर विरोधी हैं। माता के दरबार में भरी जेब और खाली जेब के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसी के अनुरूप यह प्रस्ताव पारित किया गया है।

अब से बड़ी दुर्गा स्थान में पूजा के लिए आने वाले सभी महिला पुरूष भक्तों को एक निश्चित दूरी से पूजा करनी होगी।

अब से बड़ी दुर्गा स्थान में पूजा के लिए आने वाले सभी महिला पुरूष भक्तों को एक निश्चित दूरी से पूजा करनी होगी। वे वहीं से प्रसाद, झांप, आरती, खोइछा आदि के पूजन विधान कर सकेंगे। कोई भी व्यक्ति अब 1100 रुपये भुगतान कर गर्भ गृह में प्रवेश और पूजा नहीं कर सकता है।(Mokama Online News 18)

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गर्भ गृह में पूजा विधान सिर्फ वहां के पंडित-पुजारी ही करेंगे।

गर्भ गृह में पूजा विधान सिर्फ वहां के पंडित-पुजारी ही करेंगे। विशेष परिस्थितियों में गणमान्य जनों के लिए दर्शन पूजन की परम्परागत प्रक्रिया बरकरार रहेगी। गौरतलब है कि बड़ी दुर्गा स्थान में मोकामा में सबसे पहले दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई थी। बंगालियों द्वारा शुरू की गई पूजा को बाद में स्थानीय समाज अपने रीति रिवाज के अनुसार बनाए हुए है।(Mokama Online News 18)

15 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन शोभायात्रा जुलूस उपरांत प्रतिमा का विसर्जन होगा।

इस वर्ष मंगलवार को महासप्तमी पूजा, बुधवार को महाष्टमी और गुरुवार को महानवमी पूजन-हवन होना है। 15 अक्टूबर को विजयदशमी के दिन शोभायात्रा जुलूस उपरांत प्रतिमा का विसर्जन होगा।

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