मोकामा के डॉ रामसागर सिंह को भाजपा में मिला बड़ा दायित्व।

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#मोकामा के डॉ रामसागर सिंह ने संगठन से जो जिम्मेदारी मिली उसे जी जान से उसे निभाया है।भाजपा के राषटीय चिकित्सा प्रकोष्ठ में थे तो देश भर के हजारों डॉक्टर और चिकित्सा सेवा से जुड़े प्रोफेशनल को भाजपा की सदस्यता दिलाई।जब बिहार में उन्हें संगठन विस्तार करने के लिए भेजा गया तो बिना किसी संकोच के बिहार पहुच गए और संगठन को नई ऊचाई पर ले जाने के लिए संघर्ष करने लगे। दौर काफी बुरा था क्योंकि नीतीश कुमार भाजपा से अलग होकर लालू यादव के साथ हो गए थे। रामसागर सिंह को मुंगेर सीट पर ध्यान देने को कहा गया। डॉक्टर साहब यंहा भी दिन रात संगठन को मजबूत करने में लग गए। 2014 का निर्णायक चुनाव का वक्त था,भाजपा 10 साल से केंद्रीय राजनीति में सत्ता से दूर था, एक एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने सभी महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में भेज दिया था। नीतीश 10 साल से सत्ता में थे उनसे लड़ाई काफी कठिन थी पर डॉक्टर साहब तो सर्जरी की पूरी तौयारी कर चुके थे।चुनाव का बिगुल बज चुका था, नीतीश कुमार ने ललन सिंह को पुनः लोकसभा में भेजने का निर्णय लिया।सत्ता में होने के कारण ललन सिंह को प्रशासन का भी मौन समर्थन प्राप्त था।अनंत सिंह जैसे बाहुबली विधायक का भी साथ ललन सिंह को था। पर डॉक्टर साहब तो जनता की नब्ज टटोल रहे थे। अपार जन समर्थन की उम्मीद थी उन्हें की भाजपा यंहा से जरूर सीट निकाल लेगी,क्योंकि बच्चे बच्चे की जुबां पर मोदी मोदी का नारा गूंज रहा था।पार्टी नेतृत्व उन्हें उम्मीदवार भी घोसित कर देती पर अंतिम क्षणों में रामविलास पासवान अपने बंगले के साथ भाजपा के राषटीय जनतांत्रिक गठबंधन में आ गए । भाजपा नेता अमित भाई शाह और रामविलास पासवान ने तय किया कि मुंगेर सीट से लोजपा चुनाव लड़ेगी। अमित शाह जी ने डॉ राम सागर जी को सीट निकालने में सूरजभान सिंह को मदद करने कहा । डॉ रामसागर जी ने पार्टी नेतृत्व के बातों को सर आँखों पर रखा। जन जन में पहचान बना चुके डॉ साहेब ने वीना देवी के जीत के लिए दिन रात एक कर दिया।जब नतीजा आया तो वर्तमान सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तमाम ताम झाम के वावजूद चुनाव हार चुके थे। वीना देवी पहली बार लोकसभा पहुची।

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2019 के चुनाव में जब कन्हैया कुमार भारत की राजनीति में छा गए , हर टीवी अखबार उन्हें एक नायक के तौर पर पेश कर रहा था । कन्हैया कुमार बेगुसराय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके थे। उनके समर्थन में देश विदेश से राजनीतिक लोग बेगुसराय आने लगे।क्या नेता क्या अभिनेता सब बेगुसराय पहुचने लगे । भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह ने डॉ रामसागर सिंह को दिल्ली बुलाया और उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। डॉ रामसागर सिंह को बेगुसराय का प्रभारी बनाकर भेजा गया। एक कर्मठ सिपाही की तरह भाजपा को घर घर तक पहुचाने निकल पड़े डॉ साहेब।उसी बीच वर्तमान सांसद डॉ भोला सिंह जी का निधन हो गया। बेगुसराय अनाथ हो गया,पर डॉ साहेब लगे रहे भाजपा को मजबूत करने में।कन्हैया कुमार जंहा टीवी पर दिनों दिन लोकप्रियता के शिखर पर बढ़ते जा रहे थे, भोला बाबू के निधन की शून्यता का लाभ उन्हें लगातार मिल रहा था। रामसागर सिंह घर घर जाकर मोदी के कार्यों को बता रहे थे। बच्चे बूढ़े और जवान हर किसी से one to one मिलकर भाजपा की जड़े मजबूत कर रहे थे।2019 के चुनाव आते आते गिरिराज सिंह को नवादा से बेगुसराय भेजने की चर्चा होने लगी । गिरिराज सिंह नवादा से बेगुसराय जाने को राजी नही थे। उन्होंने प्रेस कॉंफ्रेस कर यंहा तक कह दिया कि वो नवादा से ही चुनाव लड़ेंगे या नही लड़ेंगे बेगुसराय तो कतई नही जाएंगे। उनके इस निर्णय से भाजपा नेतृत्व भी कन्हैया को ताकत समझ गया। अमित शाह ने बेगुसराय प्रभारी डॉ रामसागर सिंह को दिल्ली बुलाया। बन्द कमरे में शीर्ष नेतृत्व ने बेगुसराय सीट पर चर्चा की। डॉ रामसागर सिंह ने बेगुसराय की जमीनी हकीकत नेतृत्व को समझा दिया।अमित शाह , नरेंद्र मोदी सभी डॉ रामसागर सिंह की बातों से सहमत नज़र आये। गिरिराज सिंह को मनाया गया। चुनाव हुआ और भाजपा ने बेगुसराय सीट पर लगभग 7 लाख वोट पाकर सीट जीत ली।

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डॉ रामसागर सिंह के काम करने का जो तरीका था उसका लोहा भाजपा सहित विपक्ष के लोग भी मानने लगे।

अब शिर्ष नेतृत्व उन्हें पुनः भारतीय जनता पार्टी बिहार प्रदेश के प्रवक्ता की कठिन जिमेदारी दी है।

मोकामा ऑनलाइन उनकी इस नई जिम्मेदारी पर शुभकामना देता है। हम उम्मीद करते हैं आप इस पद की शोभा वैसे ही बढ़ाएंगे जैसा जादुई काम आप पहले करते आये हैं।

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