राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त की जयंती पर मोकामा में बही काव्य रसधार

मोकामा। राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त की जयंती मंगलवार को मोकामा में मनाई गई। गुप्त की जयंती को कवि दिवस के रूप पूरे देश में मनाया जाता है। कवि दिवस के तहत मोकामा के ज्ञानप्रभा में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। उदय कुमार ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। मुख्य वक्ता डॉ सुधांशु शेखर ने कहा कि समाहित की बात करना साहित्यकार कहाता है। मैथिली शरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के माध्यम से विविधता पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधा।

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उन्होंने कहा, सन 1857 की क्रांति में जब भारतीय योद्धाओं को अंग्रेजी हुकूमत से सफलता नहीं मिली तो उसके प्रमुख कारणों में एक भाषा अभाव की वजह से संवादहीनता था। इसी कारण भारतेंदु हरिश्चंद्र ने खड़ी बोली के प्रसार पर बल दिया। उसी अनुरूप गुप्त जी बाद में अपनी रचनाएँ कि जो परतंत्र भारत में राष्ट्रीय चेतना जगाने वाला रहा। साथ ही नारी अस्मिता और गरिमा की गौरवमयी भारतीय परंपरा को गुप्त जी अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया।

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शायर आबिद अली, मगही कवि बालेश्वर, राजीव नयन, रिशु, मनीष आदि ने गुप्त को समर्पित रचनाएँ प्रस्तुत की। गोष्ठी संयोजक आनंद शंकर ने गुप्त जी को देश के पहले राष्ट्रकवि का गौरव हासिल होने के कारणों पर प्रकाश डाला। संचालन पारस कुमार ने किया।

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