चुनाव आयोग ने पूछा, बिहार में शराबबंदी है तो इतनी शराब कैसे बरामद हुई

चुनाव आयोग ने पूछा, बिहार में शराबबंदी है तो इतनी शराब कैसे बरामद हुई

पटना। चुनाव आयोग की दो सदस्यीय टीम चुनावी तैयारियों का जायजा लेने बिहार आई थी लेकिन यहां शराबबंदी का हाल देखकर भौचक रह गई। हालात ऐसे बन गए की उप चुनाव आयुक्त सुदीप जैन को पूछना पड़ा बिहार में तो शराबबंदी है फिर इतनी शराब कहां से बरामद हो रही है ? कोरोना काल में चुनाव तैयारियों का जायजा लेकर और आवश्यक निर्देश देकर टीम तो वापस लौट चुकी है लेकिन बिहार में शराबबंदी पर बड़ा सवाल छोड़ गई है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।

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हुआ यूं कि मुजफ्फरपुर में उत्तर बिहार के कई जिले के अधिकारियों के साथ उप मुख्य चुनाव आयुक्त सुदीप जैन और चंद्र भूषण कुमार बैठक कर रहे थे। सभी अधिकारी अपने -अपने विभाग के आंकड़े बता रहे थे। मुजफ्फरपुर के पुलिस कप्तान ने जब शराब बरामदगी के आंकड़े बताये तो श्री जैन चौंक पड़े। उन्हें कुछ अटपटा सा लगा।

वे पूछ बैठे -बिहार में तो शराबबंदी है , फिर इतनी शराब कैसे आ रही है ? आपका जिला किसी देश के बार्डर से भी नहीं जुड़ा है तो फिर इतनी अधिक मात्रा में शराब कहाँ से आ रही है ? पडोस के जिले भी बिहार में ही हैं , फिर शराब कैसे एक जगह से दूसरे जगह तक पहुंच रही है ? उनकी टिप्पणी थी -सिस्टम में लीकेज है। अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। जैन के सवाल पर मीटिंग हॉल में सन्नाटा छा गया। बड़ी मात्रा में शराब की बरामदगी पर अधिकारियों की चुप्पी ने बिहार में शराबबंदी का सच बयां कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं, कहने को जरुर बिहार में शराबबंदी है। अप्रैल 2016 से ही राज्य में शराब पर पूर्ण प्रतिबन्ध है। शराब पीने, बेचने और बनाते हुए पकड़े जाने पर कड़े दंड का प्रावधान है। यह कानून सर्व सम्मति से बना था। लेकिन धीरे -धीरे यह निष्प्रभावी होता जा रहा है।

थाने में शराब के नशे में झूमते अनेक पुलिसकर्मी पकड़े गये हैं। मालखाने में जमा बरामद शराब चूहे चट कर गये- मीडिया में यह खबर सुर्ख़ियों में रही है। आंकड़ों के मुताबिक हर एक मिनट पर तीन लीटर शराब बरामद हो रही है। अबतक करीब दो लाख लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।डेढ़ लाख से अधिक केस विभिन्न कोर्टों में लंबित हैं। पटना हाईकोर्ट केसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जता चुका है।

विपक्ष का आरोप है की दलित और गरीब लोग ही शराबबंदी कानून में पकड़े जा रहे हैं, जो डिलवरी मैन का काम करते हैं। न तो सप्लायर पकड़ा जाता है न पीने वाले। क्योंकि वे रसूखदार लोग होते हैं। धंधेबाजों का मन इतना बढ़ा हुआ है की हाल ही में राजधानी पटना में देशी शराब के अड्डे पर छापा मारने गई पुलिस टीम को जान बचाकर भागना पड़ा। एक एएसआई की वर्दी फाड़ दी गई और उसे बुरी तरह पीटा गया।

यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि बिहार को शराबमुक्त बनाने का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना पुलिस की लापरवाही से पूरा नहीं हो सका। बिहार में शराबबंदी का सच चुनाव आयोग भी जान गया।

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