हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !

जब हम बच्चे थे, बड़े-बुजुर्ग कहते थे कि अपनी हिंदी सुधारने के लिये नियमित रूप से अखबार पढ़ो! मेरे रूसी छात्र पूछते हैं कि हिंदी सीखने के लिये भारत का कौन सा अखबार ऑनलाइन पढ़ना बेहतर होगा। मैं उनसे कहता हूँ कि शुद्ध हिंदी सीखने के लिये भारतीय अखबारों को पढ़ना छोड़ दो। मैं कक्षा में उनसे विदेशी हिंदी मीडिया की विशेष रूप से चयनित समाज, राजनीति और जन सरोकार से जुड़ी खबरें, सामाजिक मुद्दों की समीक्षा आदि साझा करता हूँ।

“>-विज्ञापन-
Mokama ,मोकामा

विज्ञापन के लिए संपर्क करें : 9990436770,9743484858

हिंदी को लेकर दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ होती रहती हैं। विदेशों में हिन्दी फैल रही है, इसका गौरव-ज्ञान गाया जाता है! लेकिन कड़वी सच्चाई पर हिंदी प्रेमी आँखें बंद कर लेते हैं। एक डेटा के अनुसार अमेरिका में हिन्दी प्रवासियों की अच्छी संख्या होने के बावजूद 50% संस्थानों में हिंदी की पढ़ाई बंद हो चुकी है। ऐसा ही हाल यूरोप, ऑस्ट्रेलिया आदि के संस्थानों में भी है। भारतीय प्रवासी भी अब अपने बच्चों को हिन्दी पढ़ाने में रुचि नहीं लेते। हिन्दी की माँग घटने और भारतीयों द्वारा अंग्रेजी के इस्तेमाल के कारण Voice of America, Sputnik News, Radio Rus’ आदि ने अपनी हिन्दी सेवाएं बंद कर दी हैं। बीबीसी हिन्दी सेवा भी बंद हो चुकी है, अब थोड़े बहुत समाचार ऑनलाइन दिखते है।

रूस में भी अब हिन्दी की माँग में कमी आ रही है। कुछ दिन पहले मेरी मुलाकात एक रूसी प्राध्यापक से हुई थी। उन्होंने बताया कि भारत में रूसियों का काम अंग्रेजी के सहारे चल जाता है और भारत से सम्बन्धित सूचनाएं अंग्रेजी में आसानी से उपलब्ध हैं, यह सोच कर अब रूसी सरकार हिन्दी पर खर्च नहीं करती है। रूस के विश्वविद्यालयों के हिन्दी पाठ्यक्रमों में अब बच्चों की संख्या में काफी कमी देखने को मिल रही है। इसके पीछे मुख्य कारण है, विदेशों में हिंदी सीखने वाले बच्चों के पास रोजगार के अवसरों में कमी।

अगर हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय महत्व की भाषा बनाना है तो निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करना चाहिये।

-भारतीय हिंदी मीडिया की गुणवत्ता में सुधार : देखने में आता है कि अधिकांश भारतीय समाचार पत्र या मीडिया संस्थान जो हिंदी में समाचार और सूचनाएं प्रकाशित करने को लेकर अधिकृत और पंजीकृत हैं, हर वाक्य में जम कर अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। इनपर कानूनी कारवाई की जानी चाहिये। यदि वे हिंदी में काम करने को लेकर पंजीकृत हैं तो उन्हें हिंदी में ही काम करना होगा।

  • भारत में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने वाले विदेशी छात्रों के लिये हर वर्ष कम से कम 50,000 छात्रवृत्तियों की व्यवस्था की जानी चाहिये। कम से कम 50 भारतीय विश्वविद्यालयों में उनके लिये अध्ययन और छात्रावास, सुरक्षा आदि की व्यवस्था उपलब्ध करायी जानी चाहिये।
  • भारत में काम करने अथवा छात्रवृत्ति पाने को इच्छुक विदेशी हिन्दी भाषियों के लिये TOEFL और IELTS की तर्ज पर “Test of Hindi as a Foreign Language” की अनिवार्यता होनी चाहिये। अभी तक हिंदी में ऐसी कोई मानक परीक्षा नहीं होती है।
  • संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को लाने की राजनीति करने से पहले भारत को ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) आदि में हिंदी का प्रयोग सुनिश्चित करने पर बल देना चाहिये। इन संगठनों मे भारत अपनी बात आसानी से रख सकता है। इससे चीन, रूस, मध्य एशिया एवं भारत के पड़ोसी देशों में हिन्दी सीखने वालों के सामने करियर के बेहतर विकल्प मौजूद होंगे। इन संगठनों में यदि हिंदी सफल होती है तो उन अनुभवों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र आदि संगठनों में हिंदी को प्रस्तावित करना काफी आसान होगा।
  • बीबीसी, वीओए, स्पूतनिक, रेडियो चाइना, डॉयचे वेले आदि की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय श्रोताओं के लिये प्रमुख विदेशी भाषाओं में भारत का पक्ष रखने वाला मीडिया संस्थान/ऑनलाइन चैनल की स्थापना होनी चाहिये। भारत में इसका कान्सेप्ट पहले से रहा है लेकिन अब इसपर काम बंद हो रहे हैं। ऑल इंडिया रेडियो की विदेशी भाषा सेवा में आजकल जरूरी कंटेन्ट नहीं बनते हैं। वहाँ बस विदेशियों को रोज 2-4 बॉलीवुड के गाने सुनाने का काम होता है। उसके माध्यम से भारतीय भाषाओं को सिखाने के कार्यक्रम भी प्रसारित किये जाने चाहिये।
  • भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के लिये “Hindi as a foreign language” में BA और MA पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिये। हर देश के छात्रोंके सामने हिंदी सीखने में अलग-अलग तरह की मुश्किलें आती हैं। इससे जुड़ी समस्याओं को समझने और निदान के लिये आवश्यक रिसर्च होने चाहिये। “Hindi as a foreign language” पढ़ाने के लिये शिक्षकों की भी आवश्यक ट्रेनिंग होनी चाहिये।
  • हिंदी के अध्ययन-अध्यापन से जुड़े विदेशी छात्र और अध्यापकों के लिये नियमित तौर पर प्रतियोगिताओं और वैज्ञानिक संगोष्ठियों आदि में हिस्सा लेने का अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिये!
  • भारतीय साहित्य को विदेशी भाषाओं में अनूदित और प्रकाशन के लिये अनुदान की व्यवस्था होनी चाहिये।

और इन सबसे पहले भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय भाषाओं को जरूरी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिये। अगर हम ही अपनी भाषा नहीं सीखेंगे त कोय काहे ल हमार भाषा सीखी!?

हिंदी #हिंदी_दिवस

टिप्पणियाँ बंद हो जाती हैं, लेकिन Trackbacks और Pingbacks खुले हैं।