बिछने लगा पाइप, विरोध के बाद भी मोकामा से राजगीर और गया जाएगा गंगाजल

बिछने लगा पाइप, विरोध के बाद भी मोकामा से राजगीर और गया जाएगा गंगाजल
मोकामा। गंगा के पानी को मोकामा से गया जिले तक ले जाने की बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम तेजी से शुरू हो गया है। बिहारशरीफ और बरबीघा जिले के कई इलाकों में सड़क किनारे बड़े बड़े पाइप देखे जा सकते हैं। कुछ दिन पहले ही सरमेरा के पास पाइप लाकर रखा गया है जिसे जल्द ही बिछाने का काम शुरू किया जाएगा।

जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट मानते हैं। इस परियोजना का मकसद राज्य के उन जिलों तक पानी पहुंचाना है जहां पानी का घोर संकट है। राज्य सरकार जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत गंगा नदी के पानी को शुद्ध कर मोकामा से गया तक ले जाएगी। इससे गया, बोधगया, राजगीर और नवादा शहर को सालोंभर गंगा जल मिलेगा। इन शहरों के घर-घर में पहुंचाया जाएगा। मोकामा के पास से गंगा जल को राजगीर होते हुए गया लाया जाएगा।

योजना के तहत पटना जिले के मोकामा के पास मराची के निकट से गंगा नदी का पानी सरमेरा, बरबीघा होते हुए गिरियक ले जाया जाएगा और वहां से राजगीर के घोड़ाकटोरा झील में पानी को गिराया जाएगा। फिर वहां से पानी को गया जिले के फल्गू नदी तक ले जाया जायेगा। इसके लिए सड़क के किनारे 190 किमी लंबी पाइपलाइन बिछायी जाएगी। परियोजना पर अनुमानित लागत 2800 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

परियोजना का विरोध कर रहे रहे हैं मोकामावासी और पर्यावरणविद
हालांकि राज्य सरकार भले इसे पेयजल सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण परियोजना बताये लेकिन मोकामा के ज्यादातर लोग ऐसा नहीं मानते। मोकामा, औंटा, हाथीदह और मरांची के किसानों ने इस वर्ष के आरंभ में परियोजना के प्रतिकूल प्रभाव पर चर्चा करने के लिए बैठक की थी। स्थानीय किसानों का मानना है कि इससे मोकामा टाल के इलाकों पर असर पड़ेगा और गंगा का नैसर्गिक प्रवाह प्रभावित होगा। वहीं राजगीर पहाड़ी क्षेत्र है जिस कारण पाइप लाइन से पानी ले जाने में मोटर पम्प का सालों भर इस्तेमाल करना होगा जो बेहद खर्चीला है। पर्यावरणविद भी इसका विरोध कर चुके हैं और गंगा के बदले सोन नदी का पानी गया पहुंचाने का सुझाव दिए हैं। उनका मानना है मोकामा टाल में बरसात के समय गया के फल्गू और पुनपुन नदी का पानी हर साल बहकर टाल इलाके में आता है। अगर सरकार चाहे तो उस पानी को चेक डैम बनाकर रोक सकती है। उससे गया और राजगीर दोनों के पानी काम चल सकता है। 

फ़ोटो साभार : अरुण साथी

टिप्पणियाँ बंद हो जाती हैं, लेकिन Trackbacks और Pingbacks खुले हैं।