डॉ जनार्दन प्रसाद सिंह(जानो दा)!

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jpडॉ जनार्दन प्रसाद सिंह(जानो दा):- २० अगस्त १९३५  की रात बिहार के पटना जिले की मोकामा सकरवार टोला  की पावन भूमि पर   श्री महावीर सिंह के घर में इनका जन्म हुआ था. आपका  उन्नत ललाट ,चेहरे का  तेज बचपन से ही आपको भीड़ से अलग दिखाता था . माता बनारसी देवी और पिता महावीर सिंह ने आपको बचपन से ही पढ़ने के लिए प्रेरित किया और आपने भी सन १९५३ की मेट्रिक परीक्षा में पुरे बिहार में ३ स्थान प्राप्त किया.सन १९५५ में साइंस कौलेज पटना में १ स्थान लाकर आपने अपने कुल का नाम रौशन लिया .१९६० में M.B.B.S की परीक्षा में पटना मेडिकल कौलेज में आप दूसरे स्थान पर रहे.१९७६ से १९७८ तक उच्च शिक्षा हेतु इंग्लॅण्ड गए . सन १९६१ से १९६५ तक आपने P.M.C.H के एनाटोमी विभाग में अध्यापक का प्रभार संभाला . आप बिहार के विभिन्न मेडिकल कौलेज में योगदान देते रहे ,आपने  सन १९९५ में पटना मेडिकल कौलेज के मेडिसिन विभाग से प्राध्यापक पद से आवकाश प्राप्त किया .आपकी सामजिक कार्यों में रूचि ही आपको उन सब डॉक्टर से अलग करती है .आपने डोक्टोरी भी सीधे समाजसेवा से जोड़ दिया . आप बहुत बड़े डॉक्टर थे दूर दूर से लोग आपसे दिखाने के लिए आते थे.मगर ये आप पर अगाध विश्वास था या कोई चमत्कार लोग आपके क्लिनिक में आते ही अपने को स्वास्थ महसूस करने लगते थे. जिनकी नब्ज आपने छू दी वो क्लिनिक से निकलते ही अपने आप को चंगा मान बैठता था. आप डॉक्टर से पहले  एक  सच्चे इंसान थे तभी तो आप जब दिल करे गली के किसी बच्चे से घंटों बाते करते थे.विद्यार्थी हिंदी पुस्तकालय के नव निर्माण में आपके सहयोग को समाज कभी भुला न पायेगा.हर पर्व त्यौहार को आप जिस अंदाज में मनाते  थे उसका कोई जोड़ नहीं .जीवन के अंतिम दिनों तक भी आपने मानव धर्म निभाया.लोगों के हर सुख दुःख में शामिल  होते थे आप.यही कारन था की आज भी लोग आपको जानो दा के नाम से ही जानते है .आप हमेशा कहा करते थे डॉ जे पी सिंह पटना के लिए मोकामा के लिए जानो.जब तक रहे गरीब और असहाय का निशुल्क इलाज करते रहे.प्रकृति प्रेम आपका जग जाहिर था,आप लोगों को हमेशा पेड़ पौधे बांटा करते थे.अपनी बागवानी आप खुद सँभालते थे.खेती में भी आपने तरह तरह के प्रयोग किये. लोगों को जब आप खेती के बारे में बताते थे तो लगता ही नहीं था की आप एक डॉक्टर थे येसा लगता था मानो  कोई बहुत बड़ा कृषि वेज्ञानिक अपना लेक्चर दे रहा हो.बेटी-बहु की शादी और विदाई में आपका सहयोग कईयों के घर में खुशियां भर गया .आप सचमुच में एक महामानव थे.मोकामा ऑनलाइन की तरफ से आपको भाव भीनी क्षर्धांजलि …

(सौजन्य ४ घर  सकरवार टोला  मोकामा )

 

3 टिप्पणियाँ
  1. Priyadarshan Sharma कहते हैं

    डॉ जनार्दन प्रसाद जी को नमन.. आप मोकामा के लिए सदा प्रेरणाशाली रहेंगे..

  2. Ram Achal Prasad Singh कहते हैं

    स्वर्गीय डॉ. जनार्दन प्रसाद सिंह जी को मैं बचपन से ही जानता हूँ , लेकिन उनसे मिलने का सौभाग्य मुझे अपनी शादी में मिला / उसके बाद तीन चार मुलाकातें और उनसे हुई , एक बार मैं उनसे मिलने पटना स्थित उनके निवास पर भी गया था , उन दिनों काफी बीमार चल रहे थे / ईश्वर उनकी पबित्र आत्मा को शांति प्रदान करें , यही कामना करता हूँ /

  3. Raunak Sankrityayan कहते हैं

    apne dadu ke bare mein iss site par jankar mujhe aur mere jaise dusre chatro ke liye prerna dayi hain.thank u for publishig this.

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