पुण्यतिथि पर याद किये गए जानो दा

सफलता से कम कुछ भी मंजूर नही की राह पर #मोकामा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने वाले डॉ जनार्दन प्रसाद सिंह जी की आज 16वीं पुण्यतिथि है।आज से ठीक 16 साल पहले 2005 में उन्होंने अपने परिवार के बीच आखिरी सांस ली थी।आज उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पैतृक निवास पर उनकी प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन करने पहुँचे उनके चाहने वाले। उनके क्लीनिक में उनकी प्रतिमा के पास सुंदर कांड का आयोजन किया गया।लोग प्यार से जानो दा, जानो बाबू कहते थे।वर्ग एक से लेकर जीवन की हर परीक्षा में सदा प्रथम आने का उनका एक अलग ही रिकॉर्ड है। उस जमाने में जब पढाई लिखाई को ज्यादा तरजीह नही दी जाती थी जानो दा ने मेट्रिक के इम्तहान पूरे बिहार में तृतीय स्थान प्राप्त कर मोकामा को शिक्षा के सर्वोच्च पर लाकर खड़ा कर दिया।जब इंटर की परीक्षा दी तो पूरे बिहार में अव्वल।पटना के PMCH से जब मेडिकल की पढ़ाई पूरी की तो दूसरे स्थान पर थे जानो दा।इंग्लैंड पढ़ने गए तो वँहा भी टॉपर थे जानो दा।
जब डॉक्टर की प्रैक्टिस शुरू की तो बिहार ही नही देश की पहली पंक्ति के डॉक्टर बने।इनके पढ़ाये हजारों छात्र आज सफल डॉक्टर है जो देश विदेश में अपनी एक नई मुकाम हासिल कर चुके हैं।पटना में इनसे इलाज करवाने के लिए लोग महीनों इंतजार करते थे। विश्वास इतना कि अगर जानो दा ने किसी मरीज की कलाई पकड़ ली तो वो अपने को स्वस्थ मान बैठता था।तमाम व्यस्तताओं के वावजूद अपने जीवन के आखिरी दिनों तक हर रविवार #मोकामा में बैठते थे और ग्रामीणों का इलाज करते थे। यंहा रविवार को भी बिहार भर से लोग दिखाने आते थे। जानो दा के घर के पास के सभी दालानों पर रोगियों का झुंड दिखाई पड़ता था। ग्रीन बाबू, राजो बाबू, कारू बाबू, मांझी बाबू,श्याम बाबू,नरेश बाबू,प्रभु जी के दालानों पर तो तिल भर की जगह नही होती थी रविवार को।
इतने पर भी समाज के हर वर्ग के लोगों के लिए समय निकाल लेते थे। हर समाजिक कार्यक्रम में इनकी सहभगिता सुनिश्चित थी।जब मोकामा का माहौल रक्तरंजित होने लगा इन्होंने एक नई लकीर खिंचने का प्रयास कर दिया। त्रिशूलधारी बाबू,सीताराम बाबू, वेंकटेश बाबू, वैद्यनाथ बाबू,इंजीनियर साहब ,अजय दा, संजय दा,आषुतोष कुमार बौआ दा,विजय दा,बबन दा,डॉ सचिदानंद जी सबने मिलकर विद्यार्थी हिंदी पुस्तकालय को पुनर्जीवित कर दिया। अब युवा वर्ग किताबों में उलझने लगा, समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होने लगा युवाओं ने इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लेना शुरू कर दिया।
जानो दा की होली मोकामा की सबसे बढ़िया होली मानी जाती थी।आज भी होली के दिन जानो दा याद आ जाते हैं।
पुण्यतिथि पर पुण्य स्मरण ।
मोकमा ऑनलाइन मोकामा के सपूत की पुण्यतिथि पर अपनी भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पण करता हैं।

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