मोकामा घाट हाई स्कूल में दिनकर जयंती का हुआ भव्य आयोजन

दिनकर जयंती का हुआ भव्य आयोजन।

मोकामा। (Dinkar Jaynti Mokama)दिनकर जयंती पर गुरुवार को मोकामा में अनोखा साहित्य समागम दिखा। न सिर्फ साहित्यकार और विद्यार्थी बल्कि मोकामा में पदस्थापित सभी वरीय अधिकारियों की साहित्यिक विधा दिखी।

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दिनकर की शैक्षणिक भूमि मोकामा सहित्य की उर्वरा भूमि है।

रामधारी सिंह दिनकर की शैक्षणिक भूमि मोकामा सहित्य की उर्वरा भूमि है। जब कभी भारत के राष्ट्रकवि का नाम लिया जाएगा मोकामा घाट उसमें जरूर शामिल रहेगा। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ग्रुप केंद्र मोकामा घाट के कमांडेंट प्रवीण शर्मा ने दिनकर जयंती पर मोकामा घाट हाई स्कूल में ये विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दिनकर ने साहित्य की जिस परम्परा को मोकामा घाट से शुरू किया उसे प्रेरणा मान नई पीढ़ी को आत्मसात करना चाहिए।(Dinkar Jaynti Mokama)

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दिनकर स्मृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में गुरुवार को पूरे दिन कार्यक्रम चला।

विद्यालय परिवार मोकामा घाट सह दिनकर विचार मंच एवं राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में गुरुवार को पूरे दिन कार्यक्रम चला। सुबह के सत्र में साइकिल रैली निकाली गई।(Dinkar Jaynti Mokama)

Dinkar Jaynti Mokama
Dinkar Jaynti Mokama

विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने काव्य पाठ एवं संदेश लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया।

दूसरे चरण में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। मोकामा और लखीसराय जिले के विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने काव्य पाठ एवं संदेश लेखन प्रतियोगिता में भाग लिया। मोकामा के बीडीओ मनोज कुमार ने दिनकर ने बिना किसी दवाब में आए राष्ट्रहित और राजनीतिक शुचिता के लिए अपनी रचनाएँ की। मोकामा कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार ने कहा दिनकर की रचनाएँ मानव समाज के लिए पथप्रदर्शक हैं। मोकामा सीईओ ज्ञानानंद ने काव्य पाठ कर दिनकर का स्मरण किया। मोकामा थाना प्रभारी राजनंदन ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आदर्श स्थापित किया जा सकता है। मोकामा आरपीएफ इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने कहा जिस भूमि पर दिनकर जैसे साहित्यिक सूर्य ने शिक्षा पाई उसे ज्ञान भूमि के रूप में संरक्षित रखना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने रश्मिरथी का पाठ कर श्रोताओं की वाह वाही लूटी। अधिकारियों ने काव्य एवं संदेश लेखन के विजेताओं को पुरस्कृत किया। कार्यक्रम का संचालन शालिनी एवं प्रिया ने किया। इस अवसर पर मोकामा क्षेत्र के दर्जनों साहित्य प्रेमी एवं बुद्धिजीवियों ने विचार व्यक्त किया।

सात साथियों के शहादत के बाद भी रामकृष्ण सिंह ने सचिवालय पर झंडा फहराया था।

स्व.पं. साधू शरण शर्मा ,खूब लड़े अंग्रेजो से।

याद किये गये चाकी।

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