कियूल नदी का लाल बालू निकलने पर शंका।

कियूल नदी का लाल बालू निकलने पर शंका।

बिहार।पटना।लखीसराय।(Bihar News 13) कियुल नदी का लाल बालू निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। लखीसराय और लगभग 10 जिलों में इसी जगह से बालू जाता है।मगर इस बार एनजीटी से इजाजत नहीं मिलने के कारण टेंडर प्रक्रिया अधर में लटकी है।लंबे इंतजार के बाद 8 अक्तूबर को बिहार सरकार ने लखीसराय, जमुई जिला के कई घाटों का टेंडर लॉटरी के जरिए करने आदेश जारी किया था। 20अक्तूबर टेंडर डालने की आखिरी तिथि थी।1नवंबर से बालू उठाव शुरू होने वाला था।

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एनजीटी ने बिना प्रमाण पत्र लिए टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी।

इससे पहले की बालू खनन शुरू होता ,लोगों को सस्ता बालू मिलता, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता विभागीय और प्रशासनिक कार्यवाही शुरू हो गई।एनजीटी ने बिना प्रमाण पत्र लिए टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी।(Bihar News 13)

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लंबे समय बाद कीयूल नदी से बालू खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो रही थी।

लंबे समय बाद कीयूल नदी से बालू खनन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो रही थी।लोगों को उम्मीद थी कि सस्ती दरों पर बालू मिलना शुरू हो जाएगा।

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एनजीटी का कहना है कि पहले विभाग उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र ले उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करें।

एनजीटी का कहना है कि पहले विभाग उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र ले उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करें।अब वैसे लोग जो बालू खनन के लिए घाटों का टेंडर लेना चाहते हैं,परेशान हो रहे हैं।दबी जुबान में लोग आरोप लगा रहे है कि ज्यादा लोग टेंडर प्रक्रिया में भाग न लें इसलिए इस तकनीकी खेल को खेला गया है।(Bihar News 13)

अब 27अक्टूबर को फिर से बोली लगाया जाएगा।

अब 27अक्टूबर को फिर से बोली लगाया जाएगा जो सबसे ज्यादा की बोली लगाएगा घाट उसके नाम हो जाएगा।

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