कल 6 जून को है अपरा एकादशी,अपनी गलतियों की क्षमा प्राप्ति के लिए करें अपरा एकादशी

जाने अनजाने हम सब से कभी न कभी कोई न कोई गलती हो ही जाती है यैसे समय में हम पश्चाताप के आग में जलते रहते हैं.अगर हमसे कोई गलती हो जाए और हमें ज्ञान भी न रहे तो भी हम पाप के भागी बनते ही हैं.अपरा एकादशी के दिन अनजाने में हुई गलतियों और पापों को नष्ट के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से मुनष्‍य के द्वारा किया गए हर अनजाने पाप से मुक्ति मिल जाती है उसके जीवन में आने वाला हर संकट टल जाता है.

अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का आशीर्वाद दिलाने वाले व्रत की कहानी इस प्रकार है. बहुत समय पहले महीध्वज नाम का एक राजा था.महीध्वज का छोटा भाई वज्रध्वज बड़े भाई से ईर्ष्या रखता था इसी वजह से एक दिन मौका देखकर इसने महीध्वज की हत्या कर दी और जंगल में एक पीपल के पेड़ नीचे गाड़ दिया महीध्वज की अकाल मृत्यु होने के कारण इसकी आत्मा प्रेत बनकर उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगी. इस मार्ग से गुजरने वाले हर आने जाने वाले व्यक्ति को महीध्वज की आत्मा परेशान किया करती थी .एक दिन एक ऋषि इस रास्ते से गुजर रहे थे. इन्होंने प्रेत को देखा और अपने अंतरज्ञान से इनके प्रेत बनने का कारण जान लिया .ऋषि ने पीपल के पेड़ से महीध्वज की प्रेतात्मा को नीचे उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया.महीध्वज को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए ऋषि ने स्वयं अपरा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी के दिन व्रत पूरा होने पर व्रत का पुण्य महीध्वज के प्रेत को दे दिया.एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त करके राजा प्रेतयोनि से मुक्त हो गया और स्वर्ग चला गया.जिस तरह महीध्वज को प्रेतयोनि मुक्ति मिली इसी तरह श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों की मुक्ति के लिए भी अपर एकादशी का व्रत करते हैं .

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