बिहार में 15 साल बाद बदली नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया,क्या क्या हुए बदलाव।

बिहार में 15 साल बाद बदली नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया,क्या क्या हुए बदलाव।(After 15 years municipal election process changed)

बिहार।पटना।मोकामा।बिहार के शहरी निकाय चुनाव को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है।15 साल बाद इससे जुड़े कानून में संशोधन किया गया है।संसोधन कर नई नियमावली बना ली गई है।नई नियमावली को औपचारिक रूप से मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति मिल जाने के बाद ये लागू भी हो गई है।(After 15 years municipal election process changed)

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After 15 years municipal election process changed
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निकाय चुनाव में मेयर, डिप्टी मेयर के साथ साथ मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा।(Mokama Online)

अब बिहार के शहरी निकाय चुनाव में मेयर, डिप्टी मेयर के साथ साथ मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाएगा।अब शहरी निकायों के चुनाव में जनता सीधे सीधे मेयर, डिप्टी मेयर के साथ साथ मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के लिये वोट करेगी।अभी तक जनता द्वारा वार्ड पार्षद चुने जाते थे और वार्ड पार्षदों द्वारा मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद का चुनाव होता था।(After 15 years municipal election process changed)

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इस नए नियमावली का प्रभाव आने वाले चुनाव में 19 नगर निगम और 263 नगर निकायों पर पड़ने वाला है।(Mokama Online)

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मन्त्रिमण्डल की बैठक में बिहार नगरपालिका निर्वाचन संसोधन नियमावली 2022 को मंजूरी दे दी गई।इस नए नियमावली का प्रभाव आने वाले चुनाव में 19 नगर निगम और 263 नगर निकायों पर पड़ने वाला है।(After 15 years municipal election process changed)

अब मुख्य पार्षद के चुनाव में भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा।(Mokama Online)

अगर किसी मेयर या डिप्टी मेयर ,मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद की कार्य के दौरान मृत्यु होती है या वे इस्तीफा देते हैं या उन्हें किसी कारण वश बर्खास्त किया जाता है और पद रिक्त हो जाती है तो इस हालत में फिर से जनता द्वारा ही चुनाव करवाया जाएगा।नव नवनिर्वाचित मेयर या मुख्य पार्षद बचे हुए कार्यकाल तक ही पद धारण कर पाएंगे।अब मुख्य पार्षद के चुनाव में भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा।पहले गिनती के पार्षदों को पैसे के लालच में मिला कर इस पद को कब्जा लिया जाता था।अब जनता सीधे मुख्य पार्षद चुनेगी तो एक हद तक भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा ।(After 15 years municipal election process changed)

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