दीन दयाल उपाध्याय की हत्या का क्या है मोकामा कनेक्शन?

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या का क्या है मोकामा कनेक्शन?(Mokama Online)

बिहार।पटना।मोकामा।आज 11 फरवरी को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि है।11 फरवरी 1968 को रहस्यमय तरीके से पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मौत हो गई। मुगलसराय रेलवे यार्ड में उनकी लाश मिलने से सारे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी।भारतीय जनसंघ की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा वर्ष 1951 में किया गया एवं दीनदयाल उपाध्याय को प्रथम महासचिव नियुक्त किया गया था।(350 Mokama Online News)

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पंडित जी का पटना जाने के लिए पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी में आरक्षण करवाया गया था।(Mokama Online)

10 फरवरी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय लखनऊ से पटना जा रहे थे।कौन जानता था की यह पंडित जी का आखिरी सफर था।पंडित जी का पटना जाने के लिए पठानकोट-सियालदह एक्सप्रेस के प्रथम श्रेणी में आरक्षण करवाया गया था।टिकट का नंबर था 04348। ट्रेन की प्रथम श्रेणी की बोगी के ‘ए’ कम्पार्टमेंट में उनको सीट मिली थी। शाम के सात बजे, पठानकोट-सियालदाह लखनऊ पहुंची थी। पंडित जी को स्टेशन तक छोड़ने ले लिए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुप्त साथ थे।(350 Mokama Online News)

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रात 2 बजकर 15 मिनट पर मुग़लसराय जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आकर उनकी गाड़ी रुक गई।(Mokama Online)

रात 2 बजकर 15 मिनट पर मुग़लसराय जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आकर उनकी गाड़ी रुक गई।यह गाड़ी पटना नहीं जाती थी इसलिए इस डिब्बे को दिल्ली-हावड़ा एक्सप्रेस से जोड़ दिया जाता था। शंटिंग की इस पूरी प्रक्रिया में लगभग आधे घंटे का समय लगता था।इस गाड़ी को 2 बजकर 50 मिनट खुलना था।यहां से चलकर इस गाड़ी को सुबह 6 बजे पटना जंक्शन पहुंचना था।(Mokama Online)

लगभग 3:30 बजे लिवर मैन ईश्वर दयाल ने मुग़लसराय स्टेशन के यार्ड में लाइन से करीब 150 गज दूर एक बिजली के खंबे संख्या 1267 से करीब तीन फुट की दूरी पर एक लाश पड़ी देखी।(Mokama Online)

लगभग 3:30 बजे लिवर मैन ईश्वर दयाल ने मुग़लसराय स्टेशन के यार्ड में लाइन से करीब 150 गज दूर एक बिजली के खंबे संख्या 1267 से करीब तीन फुट की दूरी पर एक लाश पड़ी देखी।ईश्वर दयाल ने तुरंत सहायक स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दी। करीब पांच मिनट के अंदर ही सहायक स्टेशन मास्टर मौके पर पहुंचे और रजिस्टर में इस घटना को दर्ज किया।
इस घटना के लगभग 15 मिनट के अंदर रेलवे पुलिस के दरोगा फ़तेहबहादुर सिंह और उनके साथ दो सिपाही राम प्रसाद और अब्दुल गफूर वारदात की जगह पहुंचे।इसके बाद डॉक्टर शव का मुआयना करने आए और अधिकारिक तौर पर उन्हें मृत घोषित कर दिया।उनकी मृत्यु का समय 3 बजकर 55 मिनट दर्ज कर दिया गया ।(Mokama Online)

पुलिस को उनके पास से एक प्रथम श्रेणी का टिकट,एक आरक्षण की पावती, हाथ में बंधी घड़ी, जिस पर नाना देशमुख दर्ज था और 26 रुपए मिले थे।(Mokama Online)

पुलिस को उनके पास से एक प्रथम श्रेणी का टिकट,एक आरक्षण की पावती, हाथ में बंधी घड़ी, जिस पर नाना देशमुख दर्ज था और 26 रुपए मिले थे।इसी स्टेशन पर बनमाली भट्टाचार्य भी काम करते थे।वो दीनदयाल उपाध्याय को पहले से जानते थे,उन्होंने शव की शिनाख्त पंडित दीन दयाल उपाध्याय के रूप में की। टिकट से मिलान के बाद कन्फर्म कर दिया गया।(Mokama Online)

पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या की खबर सुनते ही देश में शोक की लहर उठ पड़ी।(Mokama Online)

पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या की खबर सुनते ही देश में शोक की लहर उठ पड़ी।जनसंघ के नेताओं को इसकी सूचना मिली तो लोग अंतिम दर्शन को उमड़ पड़े।(Mokama Online)

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इसी बीच सुबह करीब 9.30 बजे दिल्ली-हावड़ा एक्सप्रेस मोकामा रेलवे स्टेशन पहुंची।यहां गाड़ी की प्रथम श्रेणी बोगी में चढ़े यात्री ने सीट के नीचे एक लावारिस सूटकेस देखा।(Mokama Online)

इसी बीच सुबह करीब 9.30 बजे दिल्ली-हावड़ा एक्सप्रेस मोकामा रेलवे स्टेशन पहुंची।यहां गाड़ी की प्रथम श्रेणी बोगी में चढ़े यात्री ने सीट के नीचे एक लावारिस सूटकेस देखा।उसने इसे उठाकर रेलवे कर्मचारियों के सुपुर्द कर दिया।बाद में पता चला कि यह सूटकेस पंडित जी का था।

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