2022 में उन्नत कृषि द्वारा युवा सशक्तिकरण की राह पर मोकामा।

2022 में उन्नत कृषि द्वारा युवा सशक्तिकरण की राह पर मोकामा।

बिहार। पटना। मोकामा। मोकामा टाल में जितनी संभावनाएं हैं उतनी शायद देश के किसी कृषि क्षेत्र में हों। मगर अफसोस मोकामा टाल के किसान आज भुखमरी के कगार पर है। लगभग पांच दशक पहले से ही मोकामा टाल को दो फसला बनाने के लिए स्थानीय लोगों सहित नेतृत्व भी एड़ी चोटी एक कर चुका है मगर आज तक यह संभव नहीं हुआ। पिछले कई सालों से तो मोकामा टाल में कई इलाके बिना बुवाई के रह गए। कभी समय से पानी नहीं निकला तो कभी बिल्कुल पानी आया ही नहीं।(259 Mokama Online News)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगनी हो जाए ।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगनी हो जाए ।उन्होंने कहा था कि हमारे किसान जितने सशक्त होंगे कृषि क्षेत्र की प्रगति और राष्ट्र की उन्नति की गति भी उतनी ही तेज होगी।(259 Mokama Online News)

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मोकामा की लगभग 70% आबादी अपने जीविकोपार्जन के लिए कृषि एवं कृषि आधारित कार्यों पर निर्भर है ।

मोकामा की लगभग 70% आबादी अपने जीविकोपार्जन के लिए कृषि एवं कृषि आधारित कार्यों पर निर्भर है ।मोकामा में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मोकामा के कई युवा अब आगे आ रहे हैं। मोकामा के चंदन कुमार, प्रणव शेखर शाही, कन्हैया कुमार जैसे कई किसान इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कृषि रोड मैप बनाकर योजनाओं का सफल क्रियान्वयन करने की कोशिश में लगे हुए हैं।(259 Mokama Online News)

किसानों को समृद्ध और सशक्त बनाने की हर तकनीक को मोकामा के किसानों के साथ बाटने की कोशिश कर रहे हैं।


ये युवा किसान बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर,डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर ,कृषि विज्ञान केंद्र अगवानपुर बाढ़ ,बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना ,कृषि अनुसंधान संस्थान पटना, भारतीय चारागाह अनुसंधान संस्थान झांसी,भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी और भी अन्य कृषि और पशुपालन से संबंधित कार्यालय में जाकर किसानों को समृद्ध और सशक्त बनाने की हर तकनीक को मोकामा के किसानों के साथ बाटने की कोशिश कर रहे हैं।

युवा किसान चंदन कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में मोकामा को उन्नत खेती के लिए तकनीकी हब बनाया जायेगा।

युवा किसान चंदन कुमार ने बताया कि वर्ष 2022 में मोकामा को उन्नत खेती के लिए तकनीकी हब बनाया जायेगा।परंपरागत खेती से इतर तकनीक से आधुनिक खेती से किसान समृद्ध और सशक्त हो सकता है।मोकामा का वातावरण हरे चारे के लिए अनुकूल है। आजकल नई नई प्रजातियों के चारा घास की खेती हो रही है ।नेपियर,गिन्नी,गन्ना घास जैसे चारा लगाकर किसान कम लागत में अपने पशुओं से जायदा दूध ले सकते हैं। सब्जी पर नए नए अनुसंधान हो रहे हैं। क्राफ्टिंग विधि से बैंगन और टमाटर को एक ही पौधे से उपजाया जा रहा है। लाल भिंडी में जायदा पोषक तत्व है, खेती में लागत भी कम है इसमें कीड़े का प्रकोप भी कम है।

कन्हैया कुमार ने बताया कि मशरूम की खेती से भी किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

कन्हैया कुमार ने बताया कि मशरूम की खेती से भी किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। मशरूम न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद है।मोकामा और आसपास के कई किसान कई तरह के मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। मोकामा के कई किसानों ने मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग भी ली है।

प्रणव शेखर शाही ने बताया कि मोकामा में पशुपालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

प्रणव शेखर शाही ने बताया कि मोकामा में पशुपालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।पशुओं के लिए चारा महंगा होने से किसानों का लागत मूल्य बढ़ जाता है। अगर किसान आधुनिक चारा की खेती करें तो उन्हे न सिर्फ सालों भर हरा चारा मिलेगा बल्कि यह बहुत सस्ता भी होता है। नेपियर,गिन्नी,गन्ना घास एक बार लगाने से 4 से 5 साल तक फसल देते हैं।मोकामा के किसानों का रुझान अब अंडा उत्पादन, मछली उत्पादन की ओर करना ही होगा। किसान आधुनिक खेती करेंगे तो उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।

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