जिनकी आवाज से मोकामा की सुबह होती थी, वह आवाज सदा के लिए बंद हो गई।

जिनकी आवाज से मोकामा की सुबह होती थी, वह आवाज सदा के लिए बंद हो गई।

बिहार।पटना।मोकामा।मोकामा की आवाज बन चुके संकटमोचन मंदिर के मुख्य पुजारी 70 वर्षीय चंद्रशेखर पांडे का लंबी बीमारी के बाद कल दिनांक 19/11/2021 को निधन हो गया।वे पिछले कुछ दिनों से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इनके निधन की खबर सुनते ही ग्रामीणों में शोक की लहर है।(167 Mokama Online News)

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चंद्रशेखर पांडे जी के द्वारा की गई भविष्यवाणी शत प्रतिशत सही होती थी।

पिछले 30 सालों से हर सुबह संकटमोचन मंदिर के मुख्य पुजारी चंद्रशेखर पांडे के द्वारा पंचाग की सूचना का इंतजार श्रद्धालुओं सहित ग्रामीणों को भी रहता था।इनके बताए पंचांग के हिसाब से लोग अपने दिन की शुरुआत करते थे।शादी, व्याह,मुंडन,जनेऊ तक सभी की सूचना प्रसारित होती थी उनके द्वारा।चंद्रशेखर पांडे जी के द्वारा की गई भविष्यवाणी शत प्रतिशत सही होती थी।(167 Mokama Online News)

सुबह 4 बजे से ही वो मंदिर आ जाया करते थे।

डॉ प्रेम रंजन कुमार ने बताया की संकटमोचन के मुख्य पुजारी चंद्रशेखर पांडे संकटमोचन मंदिर के निर्माण से अबतक जिम्मेदारी संभाले हुए थे। सुबह 4 बजे से ही वो मंदिर आ जाया करते थे। मंदिर की सभी पूजा व्यवस्था उनके द्वारा ही संचालित होती थी।धार्मिक प्रवृत्ति के होने के बावजूद पांडे जी अनुशासन प्रेमी थे।

पिछले 30 सालों से मंदिर व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए चंद्रशेखर पांडे संकल्पित थे।

नितिन मिश्रा ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं होगी। संकटमोचन मंदिर और चंद्रशेखर पांडे एक दूसरे के पूरक बन गए थे।पिछले 30 सालों से मंदिर व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए चंद्रशेखर पांडे संकल्पित थे।(167 Mokama Online News)

उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे आज देश विदेश में कार्यरत हैं।चंदशेखर पांडे संस्कृत के जाने माने विद्वान थे।

प्रणव शेखर शाही ने मोकामा ऑनलाइन को बताया कि चंद्रशेखर पांडे संकटमोचन मंदिर के मुख्य पुजारी के साथ साथ शिक्षाविद भी थे। उनके द्वारा पढ़ाए गए बच्चे आज देश विदेश में कार्यरत हैं।चंदशेखर पांडे संस्कृत के जाने माने विद्वान थे।

मोकामा और आसपास में जब कोई गुमशुदगी की सूचना आती थी तो चंद्रशेखर पांडे की आवाज संकटमोचन के लाउडस्पीकर से गूंजती थी।

चंद्रमणि शर्मा ने कहा कि चंदशेखर पांडे ने कई बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने में अहम भूमिका अदा की है।मोकामा और आसपास में जब कोई गुमशुदगी की सूचना आती थी तो चंद्रशेखर पांडे की आवाज संकटमोचन के लाउडस्पीकर से गूंजती थी ,उनकी मार्मिक अपील का असर इतना कि स्थानीय ग्रामीण भी गुमशुदा बच्चे को ढूढने में जुट जाते थे।

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वे एक ख्यातिप्राप्त भविष्यवक्ता और संस्कृत शिक्षक थे।

इनके छोटे भाई राजशेखर पांडे ने बताया कि चंदशेखर पांडे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।उनके परिवार में 2 बेटी,1 बेटे जबकि 3 नाती और 2 पोते हैं।पुत्र हिमांशु शेखर नागपुर रेलवे डिवीजन में स्टेशन मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। वे एक ख्यातिप्राप्त भविष्यवक्ता और संस्कृत शिक्षक थे।हिंदू पुजारी होने के वावजूद भी उन्होंने कभी भी हिन्दू और मुस्लिम के नाम पर भेद- भाव नहीं किया। दान दक्षिणा में भी श्रद्धालु प्रेम भाव से जो अर्पित करते थे उसे आदर पूर्वक स्वीकार करते थे।सभी की समस्या का समाधान करने की हर संभव कोशिश करते थे।जीवन के आखिरी दिनों तक सभी की निस्वार्थ सेवा करते रहे।चंद्रशेखर पांडे ने सायकोलॉजी में ऑनर्स किया था।वे सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे।

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