याद आये याजी

वह वोलता तो बड़े बड़े की बोलती बंद हो जाती थी । आजादी के दीवानों में कुछ एक ही ऐसे लोग थे जिनको गाँधी जी ओर सुभाष चंद्र बोस दोनों का सानिध्य प्राप्त था । जब उनका दिल करता तो गाँधी जी से गाँधी वाद सीख लेते जब दिल में आता तो सुभाष के साथ मिलकर अंग्रेजो से लोहा लेने लगते । चाहे आहिंसा के पुजारी ,चाहे गरम दल के लोग दोनों ही दल के लोग याजी को अपना नेता मानते थे । याजी भी फक्कर मसीहा थे जब दिल में आया गरम दल में ,जब दिल में आया नरम दल में । मगर हर हाल में अंग्रेजो को बाहर भगाने के लिए तत्पर । अपनी पूरी जिन्दगी उन्होंने समाज सेवा में लगा दिया , जब तक वो जीवित रहे लड़ते रहे समाज सुधारमें लगे रहे , जीवन के आखरी दिनों में भी वो लड़ते रहे :- चाहे बात किसानो की हो , चाहे बात मजदूरों की हो , चाहे गरीबों के हक़ की बात हो , उन्होंने अपना पूरा जीवन देश पर न्योछावर कर दिया .श्री याजी जी एक प्रख्यात स्वतंत्रता सैनानी, प्रखर पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के निकटतम सहयोगी एवं अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संगठन के संस्थापक कार्यकारी अध्यक्ष थे.

अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य स्व. शीलभद्र याजी की 22वीं पुण्यतिथि मनायी गयी. सभा में वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदानों का उल्लेख किया. संगठन के प्रदेश सचिव हरिशंकर नाथ तिवारी ने सरकार द्वारा सेनानी परिवार को दी जाने वाली सुविधाओं को महज छलावा बताया. इस संदर्भ में उन्होंने सरकार द्वारा बेटियों की शादी में 51 हजार रुपये सहयोग राशि दिए जाने के वादे का उल्लेख किया. साथ ही उन्होंने सेनानियों का परिचय पत्र बनाने एवं अधिकारियों द्वारा सेनानी परिवार को सम्मान न देने का भी जिक्र किया. संगठन के सदस्य जनार्दन शर्मा ने सेनानी परिवार को सरकारी नौकरियों में दो प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के निर्णय को संगठन की जीत बताया. अन्य वक्ताओं ने आजादी की लड़ाई में स्व. याजी के समकालीन शहीदों रबाईच ग्राम के स्व. मोगल सिंह एवं राघोपुर गांव के नाथो यादव की स्मृतियों को संजोने की बातें कहीं. सभा की अध्यक्षता वाल्मीकि प्रसाद एवं संचालन रामानंद शर्मा ने किया.