मोकामा
कृषि

आइये हिस्सा बने किसान महाबन्दी का,अपने ही देश में उपेक्षित क्यों किसान

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आज का   किसान अपने आप को अकेला और असहाय पाता है.कभी सुखा कबी बाढ़ से जब उसकी फसल बर्बाद हो जाती है.साल 5 साल में अगर उसकी फसल थोड़ी अच्छी हो भी जाय तो व्यापारी उसे कौड़ी के भाव भी नहीं खरीदना चाहते .नेता मंत्री तो किसान को चिमटे से भी छूना पसंद नहीं करते .हालत येसी दयनीय की किसान खुद को किसान कहने में भी शरमाता है.जो किसान भारत का पेट भरता है खुद भूखा सोता है.आखिर किसानों की येसी दुर्गति का जिम्मेदार कौन ,क्या किसान क्या नेता या भगवान् स्वयं.चलिए हम भी आपकी तरह मान लेते है की किसान की येसी दुर्गति के लिए खुद किसान ही जिम्मेदार है,क्योंकि वह न तो अपने आप को समय के साथ साथ बदल पाया ,न उसे नेताओ की चरण वंदना आती है,न ही कभी खेतो से निकल कर मंदिर तक गया .तो आखिर जिनके हाथ में ख़ुशी की चाभी है वो किसानो को क्यों खुश करेंगे.

जब किसान हर और से परेशान हो जाता है तो वह  मौत को गले लगता है.उसके मौत पर भी नेता हिजरे की तरह नाचने आ जाते है ,मगर जो किसान जिन्दा है उनके लिए एक भी काम एसा नहीं करते जिससे किसानो का भला हो .देश और राज्य के सबसे बड़े पद पर बैठे नेता और अधिकारी किसानो को कीड़े मकोड़े से जायदा कुछ नहीं समझते .अगर कुछ किसान जागरूक होकर कुछ आन्दोलन और विरोध में कुछ करते है तो सरकार और पुलिस उनपर मनमाने ढंग से कार्यवाही करते है ,पहले से लाचार किसान पुलिसिया और क़ानूनी कारवाही में टूट जाता है .इस तरह किसानो के हर आन्दोलन को दबा दिया जाता है.आज भी मोकामा बड़हिया के किसान अपने फसल की बिक्री को लेकर बंद करने  जा रहे है .3 सालों से उनका फसल बिका तक नहीं है .भूख और बीमारी उनके घर तक दस्तक दे रही है .बच्चे की पढाई लिखाई  बंद हो चुकी .भर पेट भोजन तो बीते युग की बात है.किसान करे तो क्या करे आत्महत्या ,या फिर अपराधी बन जाय लुट ले किसी को अपनी भूख मिटाय .शायद नहीं वो आत्महत्या कर लेगा पर कभी भी अपराधी नहीं बनेगा .कभी कभी आत्महत्या को छोड़कर वागवत भी करता है किसान, पर होता क्या है .किसी नेता का पिट्ठू उस वगावत में अपनी राजनीती चमका ले लेता है .आज मोकामा बड़हिया टाल के किसान आन्दोलन पर उतर आये है.सरकार से मांग है की उनकी फसल को उचित कीमत पर खरीदा जाय.दलहन क्रय केंद्र स्थापित किया जाय .पिछले 2 महीने से सरकार को अपने माध्यम से कहने की नाकाम कोशिश कर चुके किसान .2 टुक जबाब मिला .राज्य के मंत्री कहते है ये केद्र का काम है.केंद्र के लोग कहते है ये राज्य का काम है ,किसान करे तो क्या करे.आइये आज किसानो के साथ हम आप भी एक दिन के इस हरताल को सफल बनाने में सहयोग करें.क्योंकि किसान खुश तो देश खुश .नेता लोग अपनी राजनीती चमकते रहेंगे हमे भी तो अपना फर्ज निभाना है.

आइये निकालिए अपने अपने घरो से ,अब्नैये इस आन्दोलन को सफल.सुना दीजिये उन बहरो को जोस किसानो को महज कीड़ा मकोड़ा समझते है.आइये ताकत बने उनका जो हमारा भी ताकत है.देश को खोखला बनाने वालो के खिलाफ इस आन्दोलन का हिस्सा बन गौरव महसूस कीजिये .अन्नदाता की आवाज में अपनी आवाज मिलाइए.आइये किसान महाबन्दी को सफल बनाये .जय जवान जय किसान .