मोकामा
समाचार

असुरक्षित अनंत ?

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पुलिस का दावा की मोनू और निलेश ने अनंत सिंह को मारने  के लिए मुख्तार अंसारी से 50 लाख की सुपारी ली थी ,मोकामा और आसपास के लोगो को हजम नहीं हो रही है. यूँ तो जग जाहिर है अनंत दूध के धुले नहीं है ,बाहुबली से विधायक बने है .खौफ इतना की विरोध मात्र से लोग राम नाम सत्य हो जाते है .

मगर पुलिस जिस तरह हर घटना और सुचना के तार अंनत सिंह से जोड़ रही है लोगो को समझ नहीं आ रहा है .

अभी कुछ महीने पहले भी जब कन्हैयापुर में एक आदमी बम बनाने के क्रम  में मारा गया उसका भी तार अनंत सिंह से जोड़ा गया .जबकि गावं वाले तक समझ रहे थे की कोई युवक अपराधी श्याम सुंदर से बदला लेने की तैयारी के क्रम में  अपनी जान गवां बैठा .

मोनू की दुश्मनी अनंत सिंह के गुर्गे मणि पहलवान से तो जग जाहिर थी.जबसे   मोनू की बहन नेहा  सबसे कम उम्र की महिला मुखिया बनी थी ,मणि पहलवान खार खाए बैठा था .उसने अंनत सिंह ,राज्य सरकार और प्रशासन के मदद से कागजी आधार का सहारा लेकर नेहा का निर्वाचन रद्द करवा दिया . तो एक दफा मान भी लिया जाय की मोनू मणि पहलवान को मारने  की साजिस कर सकता है .मगर अनंत सिंह को मारने  की कोई वजह नहीं थी न मोनू के पास और न उसके तथाकथित आका मुख्तार अंसारी के पास .

मोनू के पकडे जाने की खबर 3 दिन पहले से मिडिया में दी  जा रही थी की उसे पटना में पुलिस ने पकड़ा है .उसके परिवार वाले भी येसा  ही दावा कर रहे है .तो फिर पुलिस अचानक कहती है की मोनू को कल रात बाढ़ के पास से मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया जिसके बाद उसने कबूल  किया की वो लोग अंनत को मरने केलिए मुख्तार अंसारी से 50 लाख की सुपारी ले चुके है.

सोसल मिडिया पर लोग कह रहे है की ये सब अनंत सिंह को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए कहानी रची जा रही है.

अब अनंत सिंह को ललन सिंह (मंत्री) के लिए चुनाव प्रचार करना है। बिना पूरा तामझाम के कइसे होगा, सुरक्षा में पुलिस बल बढ़ाने के लिये सारा ड्रामेबाजी हो रही है। अपराधी पूरा प्लान बता दिया!!सुग्गा था ना?? Gaurav Ranjan Singh

“तथाकथित माँ बहन के रक्षक पिछले दरवाज़े से किस तरह से आम जनता के द्वारा चुनी की गांव की बेटी को अपने लठैत के पक्ष में करने के लिए सभी तिकरम करने से बाज नही आये। एक चुनी हुई युवा महिला मुखिया को अंनत सिंह राज्य सरकार और प्रशासन के मदद से कागजी आधार का सहारा लेकर उसे बे दखल किया गया। मणि पहलवान जो कि अनंत सिंह का लट्ठेत था उसे हराने वाली नेहा कुमारी को अंततः राज्य सरकार और प्रशासन के मिली भगत से लोकतंत्र का गला घोटा गया।

एक बार फिर से तथाकथित माँ बहन के रक्षक को जान का खतरा का एपिसोड बिहार में खूब बढ़ चढ़ कर पत्रकार, राज्य सरकार, प्रशासन और खुद अनंत सिंह द्वारा परोसा जा रहा है। जिस सोनू मोनू के गिरफ्तारी करके उसे अनंत सिंह का सुपारी किलर के रूप में जनता के सामने पेश किया गया वो किसी सिनेमा के स्टोरी से कम नही है।बाढ़ कोर्ट में गुड्डू सिंह के हत्या के मामले में सोनू मोनू को पकड़ने के लिए SIT गठित किया गया था और SIT द्वारा ही सोनू मोनू को पटना के बी एन कॉलेज के गेट पर 5 दिन पूर्व ही गिरफ्तार किया गया था ऐसा दावा परिजन द्वारा किया गया है। लेकिन ठीक उसके उलट बिहार पुलिस द्वारा एनकाउंटर करके पकड़ा गया ऐसा झूठा कहानी राज्य के जनता के समक्ष रख गया।सोनू मोनू के परिवार द्वारा लोअर कोर्ट में 5 दिन पूर्व ही ये गुहार लगाया गया था को उसी पटना में किसी जगह से गिरफ्तार किया गया लेकिन पुलिस द्वारा 5 दिन बाद नई कहानी बनाई गई कि किसी अन्य जगह से गिरफ्तार किया गया।
बहुत दिनों से नीतिश कुमार जी के चहेते को पार्टी में पुनः वापसी का मैदान तैयार किया जा रहा है मेरे समझ से इसी कड़ी में एक और कहानी को गढ़ दिया गया है। लोकसभा चुनाव में मुंगेर से जदयू के घोषित अघोषित चहेते के लिए अनंत सिंह जी को जरूरत है और उसी को ध्यान में रखकर ये सारी कहानी को बुना गया है।
मोनू सोनू उसी मुखिया नेहा कुमारी का भाई है जिसने अनंत सिंह के लठैत को हरा कर सबको चौंका दिया था। जिस मोनू सोनू को मुख्तार अंसारी का सूटर बताया जा रहा है उसके पास से सबसे निम्न हथियार बरामद हुआ है और समझ से पड़े है अनंत सिंह जी को मारने के लिए 47-56 के जगह इसे क्यों उपयोग करेंगें।
किस लिए राज्य सरकार, प्रशासन इस तरह की नौटंकी कर रहा है, अनंत सिंह है ही नीतिश बाबू और न. 2 के चहेते उसे पार्टी में लेकर अपना रास्ता सुगम कर ले। इस तरह के कहानी से अनंत सिंह जी को अब लाव लश्कर वाली सुरक्षा भी मिल जायेगा और चुनाव आते ही फिर से माँ बहन का रक्षक बनने का ढोंग बखूबी करेंगे। ये वही माँ बहन के रक्षक है जिसने भूमिहार की बेटी को तमाम तिकरम से हटा कर अपने लठैत के लिए रास्ता बना दिये।”

Sourabh Singh