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मोकामा की मिट्टी में खेले बेटे ने आज लिख दिया सामवेद उर्दू में

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फ़िल्मी दुनिया के जाने माने लेखक इकबाल दुर्रानी जिन्होइने शारुख खान,अक्षय कुमार,रानी मुखर्जी और अजय देवगन के लिए पहले ही फिल्म में येसे किरदार रचे की आज वो दोनों फ़िल्मी दुनिया के बेताज बादशाह है.एबीएन उन्होंने एकबार फिर कमाल कर दिखाया है.दुर्रानी ने सामवेद का उर्दू अनुवाद किया है .उनका कहना है की सामवेद हमें मुहब्बत का पैगाम देता है.जाने माने फिल्म लेखक-निर्देशक इकबाल दुर्रानी ने कहा कि सामवेद का अनुवाद करने में उन्हें लगभग ढाई साल लगे। इस दौरान फिल्मी दुनिया के काम-काज से परहेज रखा। नवंबर तक उर्दू सामवेद का वो लोकार्पण कराएंगे। कहा कि आध्यात्मिक प्रवृत्ति उन्हें विरासत में मिली है। उनके दादा बिहार के मोकामा में सरकारी स्कूल में संस्कृत पढ़ाते थे। उन्हें लोग पंडितजी का पोता कहकर पुकारा करते थे।

इकबाल दुर्रानी मंगलवार को राजधानी के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथ सामवेद हमें मुहब्बत का पैगाम देता है। लोग अपने मजहब को मानते हैं, लेकिन उसके अंदर छिपी गहराइयों को नहीं जानने की वजह से गलतफहमियों का शिकार हो जाते हैं।ऐतिहासिक है सामवेद का हिंदी व उर्दू में अनुवाद, फिल्म निर्माता-निर्देशक इकबाल दुर्रानी ने किया है अनुवाद.अनुवाद का प्रकाशन कर नवंबर-दिसंबर तक लोगों के बीच लाने का प्रयास .हे प्रकाशवान परमेश्वर तू हमारे अत्यंत करीब है, तू हमारा रक्षक है, कल्याण करनेवाला है. सामवेद में अच्छी चीजें हैं. उसके अंदर एक म्यूजिक है. भजन में वजन है. वह दोहा की शक्ल में है. उसके 1870 मंत्र वंदना के हैं. मोहब्बत की आवाज है. लोग धर्मों को मानते तो जरूर हैं, लेकिन उन्हें जानते बहुत कम है. हम दूसरे धर्मों के बारे में नहीं जानते हुए भी नफरत करने लग जाते हैं. यह अच्छी बात नहीं है. लोगों के मन की दूरियां तभी खत्म होगी, जब हम अपने-अपने धर्मों को जानेंगे. अपनी किताबें पढ़ेंगे, तभी भ्रांतियां खत्म होंगी. यह सभी को जानना चाहिए. अच्छी चीजें अलग-अलग नहीं होतीं. शाश्वत सत्य कभी नहीं बदलते हैं.झूठ बदल जाता है, क्योंकि झूठ का कोई अस्तित्व नहीं होता. यह बातें सामवेद का हिंदी व उर्दू भाषा में अनुवाद करनेवाले फिल्म निर्माता-निर्देशक व लेखक इकबाल दुर्रानी ने कही. वे मंगलवार को होटल बीएनआर चाणक्या में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर पिंटू दुर्रानी, आजम अहमद व विकास कुमार भी उपस्थित थे.

फिल्म निर्माता श्री दुर्रानी ने कहा कि वे फिल्मी दुनिया से अलग हट कर समाज व देश को कुछ देने की इच्छा रखते हैं. सूर्य सिर्फ देता है, लेता कुछ नहीं है. इसलिए लोग उसे पूजते हैं. उन्होंने कहा कि वे लीक से हट कर वैदिक काल के संस्कृत में लिखे ऋग वेद, अथर्ववेद व सामवेद पढ़ा है. उसमें से सामवेद का हिंदी व उर्दू भाषा में अनुवाद करने की इच्छा जागृत हुई. इस पर काम शुरू कर दिया. ढाई साल हो चुके हैं. अनुवाद का दूसरा वर्जन जल्द ही तैयार हो जायेगा. उन्होंने कहा कि सामवेद के अनुवाद का प्रकाशन कर नवंबर-दिसंबर तक लोगों के बीच लाने का प्रयास कर रहा हूं. मुझे शुरू से ही लिखने-पढ़ने की आदत है. इसी आदत ने साहित्य के मामले में मुझे अमीर बनाया है. श्री दुर्रानी ने कहा कि सामवेद का दूसरी भाषाअों में अनुवाद ऐतिहासिक है. शाहजहां के समय दारा शिकोह ने कुरान का पर्सियन में अनुवाद कराया था. उसकी इच्छा वेदों का अनुवाद कराने की थी, लेकिन उसके पहले ही उसकी गर्दन काट दी गयी थी. उन्होंने कहा कि वे हाजी है. जब शादी नहीं हुई थी, उसी समय उन्होंने हज किया था. वे फिल्मी दुनिया में जाना नहीं चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उन्हें जाना पड़ा. उन्होंने कई सुपर हिट फिल्में दी हैं.
श्री दुर्रानी कहते हैं कि सामवेद के अनुवाद के कारण उन्होंने फिल्मों के निर्माण को लंबित रखा है. फूल आैर कांटे पार्ट-टू व बाबा जान निर्माणाधीन है. अगले साल रिलीज हो सकेंगे. इसके पहले उनकी पूरी प्राथमिकता सामवेद के अनुवादित पुस्तक को लोगों के बीच लाने की है.उन्होंने कहा कि सक्सेस के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं होता है. सरकार ने फिल्म नीति बनायी है. झारखंड के कलाकारों को अवसर मिलना चाहिए. उन्हें आगे बढ़ानेवाले निर्माताअों को प्रोत्साहित करना चाहिए, इज्जत देनी चाहिए. झारखंड में लोकेशन की कोई कमी नहीं है. यहां ऐसी फिल्में बननी चाहिए, जिसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हो सके. श्री दुर्रानी ने कहा कि झारखंड मेरी जमीन है.

अपने लोग हैं. यहां की धरती से कमाना नहीं है. यहां मैं अपनी ऊर्जा देना चाहता हूं, इसके लिए मैं प्रयासरत हूं. सभी श्लोकों का अनुवाद होने के बाद इकबाल दुर्रानी सामवेद की हिंदी-उर्दू में पुस्तक प्रकाशित कराने की तैयारी में जी-जान से जुटे हुए हैं.