बिहार प्रतिभा सम्मान में शानू होंगे सम्मानित

आज बिहार प्रतिभा सम्मान के वार्षिक समारोह में मोकामा के कुमार शानू भी होंगे सम्मानित .उन्हें ये सम्मान उनके समाज में किये गये अनगिनत कार्यों के लिए मिलेगा.इस बार बिहार प्रतिभा सम्मान बिहार के उन प्रतिभाशाली युवकों को समर्पित है जिन्होंने किसी न किसी रूप में बिहार का नाम रौशन किया है. 35 युवको को बिहार प्रतिभा सम्मान दिया जा रहा है.समारोह के संयोजक ब्रजेश कुमार ने बताया की “बिहार के कोने कोने से प्रतिभा संपन्न युवको का चयन किया गया है.जिन्होंने समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दिया है.चाहे वो सिविल सर्विस में चयनित युवा हों,समाज को नयी दिशा देने वाले युवा हों,या वक्तिगत जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले युवा.”मोकामा के कुमार शानू का चयन उसके समाज में किये जाने वाले बेहतरीन कार्यों के लिए किया गया है.सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत में शानू की अहम् भूमिका थी ,इस अधिकार से 50 लाख बच्चे ने फायदा लिया है. शानू ने अभी कुछ दिन पहले भी अपने पैतृक गावं मोकामा में 30 लोगो की टीम तैयार की है जो RTI के माध्यम से मोकामा के समाजिक व्यवस्था को मजबूत करेंगे . शानू के इन्ही सब सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें चुना गया है.फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का चयन हुआ है,इसके लिए बिहार प्रतिभा सम्मान टीम उन्हें बधाई देता है वो जीवन में यूँ ही आगे बढ़ते रहे और समाज को बेहतर बनाने मैं अपना योगदान देते रहें”.

एक परिचय:-पटना सेंट पॉल के स्टूडेंट कुमार शानू ने बिहार का नाम पूरी दुनिया में रौशन कर दिया है। उनका सेलेक्शन अमेरिका के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई के लिए हुआ है। अपने बचपन को याद करते हुए वह कहते हैं 90 के दशक में जब मेरा जन्म मोकामा में हुआ था उस वक्त वहां क्राइम रेट बहुत ज्यादा था इसीलिए मेरी मम्मी हम तीनों भाई-बहनों को लेकर पटना आ गई। यहां हम किराए के घर में रहने लगे। मेरा एडमिशन सेंट पॉल स्कूल दीघा में कराया गया। दसवीं तक मैंने यहीं से पढ़ाई की। लोयला स्कूल से मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई की। यह कहते-कहते कुमार शानू थोड़े गंभीर हो जाते हैं। वह आगे कहते हैं मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैंं अमेरिका के इतने प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करूंगा। वह कहते हैं यह एक ऐसा ख्वाब था जिसे साकार करने में शरद सागर के डेक्स स्कूल ने मेरी मदद की। फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का हुआ सेलेक्शन.अमेरिका के इस कॉलेज में एलएलएम प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए दुनियाभर से सिर्फ पंद्रह स्टूडेंट को चुना जाता है। 25 साल के कुमार शानू इन्हीं कुछ खुशनसीब स्टूडेंट में से एक हैं। उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से 20 हजार डॉलर स्कॉलरशिप भी दी गई है। 90 के दशक में मोकामा में जन्मे पर क्राइम रेट ऐसा था कि परिवार पटना आ गया, लोएला स्कूल से 12 वीं तक पढ़ाई की .दादाजी से मिली दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा .कुमार शानू अपने दादाजी से बेहद प्रभावित हैं। उनकी जिंदगी पर दादाजी का बहुत गहरा असर रहा है। अपने दादाजी के बारे में बातें करते हुए शानू गर्व से भर उठते हैं। वह कहते हैं मेरे दादाजी सरकारी शिक्षक थे लेकिन वह सैलरी नहीं लेते थे। हम संपन्न किसान परिवार से आते थे इसीलिए किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं थी। दादाजी का मानना था कि सक्षम लोगों को बढ़-चढ़ कर समाज की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने हमें जो जीवन मूूल्य दिए वो जीवन के अबतक के हर पड़ाव पर मेरे काम आया। मुझे मेरे पिताजी से भी सीखने को काफी कुछ मिला। मां ने अपराध के कारण समाज के युवाओं का पतन होते देखा था। वो बताते हैं कि मां दूरदर्शी थी वो जानती थी कि यह माहौल हमारे मन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। इसलिए वो हमें लेकर पटना आ गईं। उनकी सोच का आज सकारात्मक परिणाम निकला है। मां भी मेरी सफलता से काफी खुश हैं और पिताजी भी।

सीबीएसई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत बड़ी सफलता .सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत ने कुमार शानू का हौसला बढ़ाया। वह कहते हैं पहली बार सूचना के अधिकार के तहत 50 लाख स्टूडेंट को जांची हुई उत्तरपुस्तिका देखने को मिली। इस जीत ने मुझे लोगों के लिए काम करने का हौसला दिया। पढ़ाई पूरी कर लौटूंगा तो बिहार की हर संभव मदद करूंगा .कुमार शानू कहते हैं कि मैं बिहार में ज्यूडिशियल सिस्टम को स्ट्रांग करना चाहता हूं। जब तक यह नहीं होगा बाहर से इन्वेस्टर यहां नहीं आएंगे और राज्य का विकास नहीं होगा। वह कहते हैं पढ़ाई पूरी करके वापस आने के बाद मैं वहां के अनुभवों से राज्य की पूरी मदद करने की कोशिश करूंगा। पढ़ाई के लिए किया था दिल्ली का रुख.कुमार शानू कहते हैं मैं ऐसा करना चाहता था जिससे दूसरों की मदद कर सकूं । इसलिए लॉ करने की ठानी। नोएडा के एमिटी लॉ स्कूल से डिग्री लेने के दौरान पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अल्तमस कबीर से मिला। उनसे मिलने के बाद मैंने लोगों को सोशल इश्यू पर अवेयर करने की ठानी। दोस्तों के साथ मिलकर मैंने राइट टू एजुकेशन एक्ट से कई बच्चों का एडमिशन बड़े स्कूलों में करवाया।

मोकामा में समाजसेवियों को दिया जा रहा है R.T.I अधिनियम की जानकारी

आए दिन मोकामा में भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रही है , जिससे आम लोग एवं सामाजिक कार्यकर्ता काफी परेशान है इस भ्रष्टाचार से मुक्त होने के लिए ना जाने कितने लिखित आवेदन ऊपर के कार्यालयों में दिए गएँ ।कई बार धरना की गई हैं यहां तक की सामूहिक उपवास भी किए गएँ हैं इसके बावजूद भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रही है इसलिए आज मोकामा श्याम मार्केट दुर्गा स्थान मंदिर के निकट सामाजिक कार्यकर्ता चंदन जी एवं प्रणव शेखर साही की अध्यक्षता में एक मीटिंग रखी गई जिस का संचालन चंदन जी की है इस मीटिंग का मकसद लोगों को आरटीआई ( Right to information act ) की जानकारी के बारे में बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट कुमार सानू जी के द्वारा सभी को आरटीआई दाखिला करने का प्रशिक्षण दिया गया कुमार सानू जी ने कहा की मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सुचना का अधिकार यानी RTI कहा गया. इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है की RTI के तहत पूछी जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए. यानि हम किसी सरकारी विभाग से उसके विचार नही पूछ सकते. जैसे आप के ईलाके में विकास के कामो के लिए कितने पैसे खर्च हुए है और कहाँ खर्च हुए है, आपके इलाके की राशन की दुकान में कब और कितना राशन आया, स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल में कितने पैसे खर्च हुए है जैसे सवाल आप Right to information act के तहत पता कर सकते है.

1.ये तो है सुचना के अधिकार का मतलब   लेकिन अभी भी लोगो के पास सुचना के अधिकार को लेकर कई सवाल है. और उन सवालों को हम बहुत ही सरल तरीके से जवाब देने की कोशिश करेंगे.2 कोई भी नागरिक, किसी भी सरकारीविभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है.3 ये अधिकार एक आम नागरिक के पास है जो सरकार के काम या प्रशासन में और भी पारदर्शिता लाने का काम करता है.4 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम है.5● RTI के तहत कैसी जानकारी मांगी जाए? – इस अधिकार का उपयोग हम किसी भी सरकारी विभाग की राय जानने के लिए नही कर सकते. इसका उपयोग हम तथ्यों की जानकारी पाने के लिए कर सकते है. जैसे, “डिस्पेंसरी में कितनी दवाइयां आती है, पार्क और साफ़ सफाई में कितना खर्च हुआ, किसी सरकारी दफ्तर में कितनी नियुक्तियां हुई?” इसके अलावा “ सड़क बनाने के लिए कितने पैसे आये और कहा पर खर्च हुए?”. सभी गवर्मेंट डिपार्टमेंट, प्रधानमंत्री, मुख्यमत्री, बिजली कंपनियां, बैंक, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, राष्ट्रपति, पुलिस, बिजली कंपनियां, RTI act के अन्दर आते है.सरकार की सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी या गोपनीय जानकारी इस अधिकार के अंतर्गत नही आती. कैसे प्राप्त करे जानकारी?हर सरकारी विभाग में जन सुचना अधिकारी होता है. आप अपने आवेदन पत्र उसके पास जमा करवा सकते है.आवेदन पत्र का फॉर्मेट इन्टरनेट से डाउनलोड कर सकते है या फिर एक सफ़ेद कागज पर अपना आवेदन(एप्लीकेशन) लिख सकते है जिसमे जन सुचना अधिकारी आपकी मदद करेगा.RTI की एप्लीकेशन आप किसी भी भारतीय भाषा जैसे हिंदी, इंग्लिश या किसी भी स्थानीय भाषा में दे सकते हैं.अपने आवेदन पत्र की फोटो कॉपी करवा कर जन सुचना अधिकारी से रिसीविंग जरुर ले ले.https://rtionline.gov.in/ इस साईट पर जा कर केंद्र सरकार के किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते है.कब मिलेगी जानकारी?.आवेदन पत्र डालने के ३० दिन के अन्दर आपको जवाब मिल जाएगा.note – भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर ही ऐसा राज्य है जहाँ आप rti का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

इस बैठक में घोसवरी , पैजना , मोकामा , हतिदाह , बादपुर , मोकामाघाट आदि जगहों से युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने भी भाग लिया और सामाजिक कार्यकर्ता चंदन कुमार एवं प्रणव शेखर साही जी को सभी ने धन्यवाद किया कि उन्होंने कुमार सानू जी के माध्यम से सभी को आरटीआई संबंधित अच्छी जानकारी प्राप्त हुई हैं.इस बैठक में आनंद मुरारी, विनय शंकर जी( वादपुर), वीरेंद्र कुमार, मुरारी कुमार, राहुल कुमार, आशुतोष कुमार ,आदि शामिल हुए ।( विक्रांत कुमार,मोकामा)