मेघा रे ——————————-

मेघा रे ——————————-

मेघा रे ——————————– मेघा रे !तू आया बड़ा बन -ठन के आगे -आगे नाचती -गाती बयार चली मोरों ने भी पंख पसारे तेरे स्वागत की मेघा रे ….. पेड़ झुक झांकने लगे गर्दन ऊचकाये आँधी चली धूल भागी घाघरा उठाए

मुझे भी हक है क्या

मुझे भी हक है क्या

कभी-कभी सोंचता हूं मुझे भी हक है क्या कुछ बोलने का, या फिर सोचने का? मोकामा चौक और नुक्कड़ों पर लोग बातें करते हैं अपने पड़ोसियों के चूल्हों और देश-विदेश की खबरों पर, उनकी ओर जब देखता हूं, तो कहते