मोकामा कन्हायपुर में अमरजीत कुमार की मौत से गमनिन हुआ माहौल

मोकामा के कन्हायपुर में अमरजीत कुमार के पोखर में डूब कर मौत हो गई. पटना किउल रेलवे ट्रेक के किनारे बहुत सारे पोखर हैं ,जिसे ज्यादातर मवेशी को नहाने के लिए इस्तेमाल होता है.

मगर यंही एक पोखर में अमरजीत कुमार के फिसल कर गिरने फिर डूबकर मृत्यु से पूरा गावं गमनिन है.यंहा के पोखर में ज्यादा पानी नही होता है.पर अभी बरसात के कारन बहुत ज्यादा पानी होने से वो बाहर नही निकल पाया और और डूबकर उसकी मृत्यु हो गई .मृतक वृज नन्दन पासवान का पुत्र था.मृतक की उम्र मात्र 19 साल थी.थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर राजेश रंजन ने हादसे की पुष्टि की है.

मोकामा ऑनलाइन
मोकामा में मौत पर माहौल गमनिन ,

पटना जिला कन्हायपुर का ये इलाका जायदातर खेती के लिए ही जाना जाता है.तरह तरह की सब्जी की खेती , टाल में मसूर और चना की खेती से ही यंहा के किसान अपना जीवन यापन करते है.गंगा नदी के किनारे बसा ये गावं खेती और मवेशी के लिए छोटे छोटे पोखर पर ही निर्भर है.और ये हादसा हो गया है तो सारे किसान दुखी है.मोकामा जैसे प्रखंड में एक प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था नहीं है.येसे सेकड़ों हादसे अक्सर होते रहते हैं,मगर जनप्रतिनिधि और प्रशासन को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है.मोकामा जो आज से महज 10 साल पहले तक बिहार के सबसे अच्छे स्वास्थ सुविधाओं से परिपूर्ण वाला जगह था.मोकामा का नाजरथ अस्पताल ३०० से करीब बेड और २० से जायदा टॉप क्लास के डॉक्टर से लेस था. बड़ी से बड़ी आपदा पर लोग मोकामा आते थे और सस्वस्थ होकर अपने घर वापस जाते थे.उतम प्रसूति के लिए ये पुरे बिहार का सबसे सुरक्षित अस्पताल में से एक था मोकामा का नाजरथ अस्पताल .आज मोकामा का ये गौरव बोझ और भार भर है.इसी तरह मोकामा का रेफरल अस्पताल भी अनेकों उपकरणों और अच्छे डॉक्टर से भरा पड़ा था.गरीब गुरबो को दवाई भी मिल जाती थी .फिर नजर लग गई विकास पुरुस की और सारे उपकरण यंहा से दूर भेज दिए गये,डॉक्टर का ताबल्दा करवा दिया गया.आज मोकामा के इस अस्पताल को खुद ही इलाज की जरूरत है.मोकामा के किसी भी जनप्रतिनिधि का ध्यान मोकामा के स्वास्थ व्यवस्था पर शायद इसलिए नही जाता क्योंकि उनके घर में अभी तक किसी को इसकी जरूरत नहीं पड़ी. जब कभी थोरी जरूरत हो तो उनके लिए पटना और दिल्ली दूर नहीं.फिलहाल अमरजीत कुमार के मौत पर गम मनाइये और भारत बंद और चुनाव चुनाव खेलिए .

हथियार समेत दो तस्कर गिरफ्तार

मोकामा में बाइक सवार दो तस्कर गिरफ्तार .

मोकामा के घोसवरी थाना ने एक संदिग्ध बाईक सवार को गश्ती के क्रम में देखा जो पुलिस को देखते ही गाड़ी घुमाकर भागने लगा. हालांकि पुलिस ने खदेड़कर उसे दबोच लिया और फिर जब उसकी तलाशी ली गई तो उसके कमर से एक एक लोडेड देशी कट्टा बरामद हुआ. बिहार में लगातार बढ़ रहे अपराध और विपक्ष के हमले से बौखलाएसत्ता पक्ष ने अपराध पर लगाम लगाने के लिए कमर कस ली है. मुख्यमंत्री के तेवर तल्ख हैं और वो अपराध के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस के चरित्र को किसी सूरत में खराब होने देना नही चाहते. वो भी तब जब चुनाव सर पर हो. यही कारण है कि पुलिस को शायद फ्री हेंड दे दिया गया है जिसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं. और आई जी,डी आई जी तक ए सी चेम्बर से निकल कर सड़कों पर गश्त कर रहे हैं. इसी क्रम में बीती शाम मोकामा के घोसवरी थाना ने एक संदिग्ध बाईक सवार को गश्ती के क्रम में देखा जो पुलिस को देखते ही गाड़ी घुमाकर भागने लगा, हालांकि पुलिस ने खदेड़कर उसे दबोच लिया और फिर जब उसकी तलाशी ली गई तो उसके कमर से एक एक लोडेड देशी कट्टा बरामद हुआ. पुलिस को शक है कि दोनो हथियार तस्कर हैं. अतः दोनों के आपराधिक इतिहास खंगालने के साथ ही पुलिस गहनता से पूछताछ कर रही है ताकि इनके सरगना तक पहुंचा जा सके.मोकामा में आजकल बाहरी अपरधियों की संख्या दिनोदिन बढती जा रही है.बाहर से आये अपराधी घटना को अंजाम देकर यंहा से निकल जाते हैं.अगर गिरफ्त न हुए तो पता तक नही चलता की अपराधी कन्हा का था.पुलिस और आम जनता भी इस तरह के अपराधियों से त्रस्त हो चुकी है.इसलिए इन्हें गिरफ्तार करने के लिए जोर शोर से अभियान चलाया जा रहा है.उन्मीद है आगले कुछ महीने में ये मामला भी सुलझ जाना चाहिए (सौजन्य:-सिटी पोस्ट)

20 साल बाद भी क्यों एक शादी कार्ड सोशल मिडिया पर वायरल है

दाल अरहर है, घी अहगर है.किसी की शादी है इसका पता निमंत्रण पत्र से चलता है लेकिन कुछ निमंत्रण पत्र खास होते हैं, मानो कोई पांडुलिपि हो – एकदम सदियों तक संभालकर रखा जाने वाला। हर किसी की चाहत रहती है कि हमारी ‘शादी’ यादगार बने। शादी में जब मेहमान आएं तो व्यवस्थाएं देखकर दंग रह जाएं। हम भारतीय अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करते हैं। अपने बच्चों की शादी के लिए माता-पिता अपने जीवन की सारी पूंजी तक न्यौछावर कर देते हैं। एक से बढ़कर एक खाने की आइटम, शादी की सजावट, गहने-कपड़े और खासकर शादी का निमंत्रण पत्र। हर कोई चाहता है कि उसकी शादी का निमंत्रण पत्र कुछ खास हो, कुछ अलग हो और इसके लिए कुछ लोग एक्सपेरिमेंट करने से भी गुरेज नहीं करते। निमंत्रण पत्र की खूबी यह भी है कि इसमें वैवाहिक कार्यक्रमों के अलावा विभिन्न सामाजिक संदेशों के जरिए समाज को जगाने की कोशिश की जाए। अपनी परंपरा और लोक संस्कृति की झलक हो। निमंत्रण पत्र पढते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाए, मन मचलने लगे कि इस विवाह समारोह में तो जरुर जाना है।

ऐसा ही एक निमंत्रण पत्र इन दिनों मेरे गांव ‘मोकामा’ में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह भी 19 वर्ष पूर्व हुई शादी का निमंत्रण पत्र।इस निमंत्रण पत्र में न कहीं गणेश की प्रतिमा है और ना ही ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसे मंत्र बल्कि इसमें मंत्र के कामायनी की पंक्‍तियां उद्धृत हैं और गणेश की जगह अजंता की प्रस्तर प्रतिमा। और भी बहुत कुछ जो आपको अचंभित करेगा। वर्ष-1999 शरत सांकृत्यान की शादी थी तो उनके पिताजी डॉ (प्रो.) जर्नादन प्रसाद सिंह ने बेटे के विवाह का निमंत्रण पत्र ऐसा छपवाया कि आज तक उसकी चर्चा है। कुछ विशेषताओं पर गौर करें – जहां ‘मंगलम भगवान विष्णु’ जैसा मंत्र लिखा जाता है वहां उन्होंने कामायनी की पंक्‍ति ‘सत्य ही रहता नहीं यह ज्ञान-तुम कविता, कुसुम या कामिनी हो।’ इन पंक्‍तियों के ऊपर अजंता की प्रस्तर प्रतिमा जो आप संलग्‍न फोटो से देखकर समझ सकते हैं। इसी प्रकार आगे के पन्‍नों पर है – बारात सजेगी, बाजे बजेंगे, द्वाराचार होगा, गलसेंकी होगी, विविध मिष्ठान, शरबत-ठंडई, पान सुपारी से स्वागत का आयोजन है-इत्र, फाहे गमकेंगे-हास्य विलास होगा। रात्रि में मृगशिरा नक्षत्र में कन्यादान होगा, तदुपरांत सिन्दूरदान-सप्‍तपदी होगी। अठंगर कुटाएगा, कमरखोलाई होगी, खिरखिलायी होगी। इस बारात में शामिल होने वाले बारातियों को बताया गया है कि खाने में क्या होगा। हमारे बिहार में पहले विवाह के बाद वाले दिन बारात पक्ष को लड़की वाले भात खिलाते थे, अब यह परंपरा न के बराबर है। तो निमंत्रण पत्र में लिखा गया है -दोपहर में भातखय है,भात गमकउआ है,दाल अरहर है,घी अहगर है,विदुर का शाक है,छान्दस परिपाक है, मुक्‍त दधिलेप है,सूचना संक्षेप है ,भांड़ी और गाली सब है….

डॉ जेपी सिंह यह भी जानते हैं कि इस विवाह के पश्‍चात जो अगली पीढी आएगी वह भी अपना रोशन करेगी। इसलिए वे लिखते हैं। अवश्य ही इनका दामपत्य असाधारण होगा,काव्यात्म होगा,दिव्य से दिव्यतर होगा,लोक कल्याणकारी एवं लोकार्पित होगा,इनकी सन्ततियां करेंगी स्वयं को प्रमाणित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्यों में। तो अगली बार जब आप भी कोई निमंत्रण पत्र छपवाएं तो कुछ अलग करें जैसा हमारे मोकामा वाले डॉ जेपी सिंह जी ने अपने शरत की शादी पर किया था।

बिहार प्रतिभा सम्मान में शानू होंगे सम्मानित

आज बिहार प्रतिभा सम्मान के वार्षिक समारोह में मोकामा के कुमार शानू भी होंगे सम्मानित .उन्हें ये सम्मान उनके समाज में किये गये अनगिनत कार्यों के लिए मिलेगा.इस बार बिहार प्रतिभा सम्मान बिहार के उन प्रतिभाशाली युवकों को समर्पित है जिन्होंने किसी न किसी रूप में बिहार का नाम रौशन किया है. 35 युवको को बिहार प्रतिभा सम्मान दिया जा रहा है.समारोह के संयोजक ब्रजेश कुमार ने बताया की “बिहार के कोने कोने से प्रतिभा संपन्न युवको का चयन किया गया है.जिन्होंने समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दिया है.चाहे वो सिविल सर्विस में चयनित युवा हों,समाज को नयी दिशा देने वाले युवा हों,या वक्तिगत जीवन में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले युवा.”मोकामा के कुमार शानू का चयन उसके समाज में किये जाने वाले बेहतरीन कार्यों के लिए किया गया है.सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत में शानू की अहम् भूमिका थी ,इस अधिकार से 50 लाख बच्चे ने फायदा लिया है. शानू ने अभी कुछ दिन पहले भी अपने पैतृक गावं मोकामा में 30 लोगो की टीम तैयार की है जो RTI के माध्यम से मोकामा के समाजिक व्यवस्था को मजबूत करेंगे . शानू के इन्ही सब सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें चुना गया है.फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का चयन हुआ है,इसके लिए बिहार प्रतिभा सम्मान टीम उन्हें बधाई देता है वो जीवन में यूँ ही आगे बढ़ते रहे और समाज को बेहतर बनाने मैं अपना योगदान देते रहें”.

एक परिचय:-पटना सेंट पॉल के स्टूडेंट कुमार शानू ने बिहार का नाम पूरी दुनिया में रौशन कर दिया है। उनका सेलेक्शन अमेरिका के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई के लिए हुआ है। अपने बचपन को याद करते हुए वह कहते हैं 90 के दशक में जब मेरा जन्म मोकामा में हुआ था उस वक्त वहां क्राइम रेट बहुत ज्यादा था इसीलिए मेरी मम्मी हम तीनों भाई-बहनों को लेकर पटना आ गई। यहां हम किराए के घर में रहने लगे। मेरा एडमिशन सेंट पॉल स्कूल दीघा में कराया गया। दसवीं तक मैंने यहीं से पढ़ाई की। लोयला स्कूल से मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई की। यह कहते-कहते कुमार शानू थोड़े गंभीर हो जाते हैं। वह आगे कहते हैं मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैंं अमेरिका के इतने प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करूंगा। वह कहते हैं यह एक ऐसा ख्वाब था जिसे साकार करने में शरद सागर के डेक्स स्कूल ने मेरी मदद की। फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी में शानू का हुआ सेलेक्शन.अमेरिका के इस कॉलेज में एलएलएम प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए दुनियाभर से सिर्फ पंद्रह स्टूडेंट को चुना जाता है। 25 साल के कुमार शानू इन्हीं कुछ खुशनसीब स्टूडेंट में से एक हैं। उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से 20 हजार डॉलर स्कॉलरशिप भी दी गई है। 90 के दशक में मोकामा में जन्मे पर क्राइम रेट ऐसा था कि परिवार पटना आ गया, लोएला स्कूल से 12 वीं तक पढ़ाई की .दादाजी से मिली दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा .कुमार शानू अपने दादाजी से बेहद प्रभावित हैं। उनकी जिंदगी पर दादाजी का बहुत गहरा असर रहा है। अपने दादाजी के बारे में बातें करते हुए शानू गर्व से भर उठते हैं। वह कहते हैं मेरे दादाजी सरकारी शिक्षक थे लेकिन वह सैलरी नहीं लेते थे। हम संपन्न किसान परिवार से आते थे इसीलिए किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं थी। दादाजी का मानना था कि सक्षम लोगों को बढ़-चढ़ कर समाज की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने हमें जो जीवन मूूल्य दिए वो जीवन के अबतक के हर पड़ाव पर मेरे काम आया। मुझे मेरे पिताजी से भी सीखने को काफी कुछ मिला। मां ने अपराध के कारण समाज के युवाओं का पतन होते देखा था। वो बताते हैं कि मां दूरदर्शी थी वो जानती थी कि यह माहौल हमारे मन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। इसलिए वो हमें लेकर पटना आ गईं। उनकी सोच का आज सकारात्मक परिणाम निकला है। मां भी मेरी सफलता से काफी खुश हैं और पिताजी भी।

सीबीएसई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत बड़ी सफलता .सीबीएसई के खिलाफ साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में मिली जीत ने कुमार शानू का हौसला बढ़ाया। वह कहते हैं पहली बार सूचना के अधिकार के तहत 50 लाख स्टूडेंट को जांची हुई उत्तरपुस्तिका देखने को मिली। इस जीत ने मुझे लोगों के लिए काम करने का हौसला दिया। पढ़ाई पूरी कर लौटूंगा तो बिहार की हर संभव मदद करूंगा .कुमार शानू कहते हैं कि मैं बिहार में ज्यूडिशियल सिस्टम को स्ट्रांग करना चाहता हूं। जब तक यह नहीं होगा बाहर से इन्वेस्टर यहां नहीं आएंगे और राज्य का विकास नहीं होगा। वह कहते हैं पढ़ाई पूरी करके वापस आने के बाद मैं वहां के अनुभवों से राज्य की पूरी मदद करने की कोशिश करूंगा। पढ़ाई के लिए किया था दिल्ली का रुख.कुमार शानू कहते हैं मैं ऐसा करना चाहता था जिससे दूसरों की मदद कर सकूं । इसलिए लॉ करने की ठानी। नोएडा के एमिटी लॉ स्कूल से डिग्री लेने के दौरान पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया अल्तमस कबीर से मिला। उनसे मिलने के बाद मैंने लोगों को सोशल इश्यू पर अवेयर करने की ठानी। दोस्तों के साथ मिलकर मैंने राइट टू एजुकेशन एक्ट से कई बच्चों का एडमिशन बड़े स्कूलों में करवाया।

शरद संवाद बना मोकामावासियों के लिए नजीर

मोकामा। यूथ आइकॉन शरद सागर का प्रेरणादायक संवाद कार्यक्रम मोकामा क्षेत्र के लोगों के लिए नजीर बन गया। मोकामा के शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग शरद सागर के कार्यक्रम की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं। मोकामा के शिक्षक पारस कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, आज शरद सागर जी के आगमन से बच्चों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। शरद सागर ने विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान किया और जीवन के हर एक मौके को सफल कैसे बनाया जाए इसके बारे में जानकारी दी । बच्चे उनकी बातों से काफी उत्साहित थे। इस प्रकार के कार्यक्रम होने से विद्यार्थियों को बल मिलता है और मानसिक रूप से आगे बढ़ने को तैयार होंगे। इस प्रकार के कार्यक्रम मोकामा में हमेशा होते रहने चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रामसागर सिंह ने कहा, शरद सागर जी का कार्यक्रम अत्यंत प्रशंसनीय रहा। ऐसे आयोजन होते रहने चाहिए ताकि समाज में सकारात्मकता का प्रभाव बढ़े। सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए आयोजकों विशेष कर युवा अधिवक्ता कुमार शानू का आभार जताया जिनकी वजह से मोकामा के युवाओं को शरद सागर जैसे ओजस्वी वक्ता को सुनने का अवसर मिला।


शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा,बच्चों संग की बात

जुलाई 5, 2018,मोकामा के ऐतिसाहिक स्थलों पर किया हज़ारों युवाओं का सम्बोधन, राष्ट्रकवि दिनकर के स्कूल जाकर भी किया छात्रों को सम्बोधित .भारतीय युवा आइकॉन और विश्व प्रसिद्द युवा उद्यमी श्री शरद सागर ने किया दो दिवसीय मोकामा दौरा। 4 और 5 जुलाई के दौरे की शुरुआत श्री शरद सागर ने मोकामा से लखीसराय जाकर एक सरकारी स्कूल में सैंकड़ों बच्चों से बातचीत कर की। शरद सागर ने विश्व प्रसिद्द मोकामा टाल का भी भ्रमण किया। मोकामा टाल को दाल के कटोरे के नाम से जाना जाता है। मोकामा टाउनहॉल में किया 600 से भी ज़्यादा बच्चों को सम्बोधित.5 जुलाई सुबह 10 से 12 शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक टाउनहॉल में लगभग 10 स्कूलों से आये 600 से अभी अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को किया सम्बोधित। अपने भाषण में श्री शरद सागर ने कहा – “मेरा जीवन दिनकर की कविताओं से प्रेरित रहा है और दिनकर का जीवन और उनकी कविताएं इसी मोकामा से प्रेरित रही हैं। इसलिए मेरा मोकामा आना सम्मान की बात है। हमें ज़रूरत हैं की मोकामा से हम भारत के लिए अगला नेतृत्व तैयार करें। हमने अपने बच्चों को नेतृत्व से दूर रखा है। आज हमें ज़रूरत है की हम शिक्षा और नेतृत्व को जोड़ें ताकि देश के अगले डॉक्टर, चिकित्सक, अभियंता और राजनेता मोकामा जैसे छोटे शहरों से आएं।”

टाउनहॉल में श्री शरद सागर के साथ मोकामा के ही रहने वाले श्री कुमार शानू थे। श्री कुमार शानू एक सामाजिक कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं जिन्होंने अपारदर्शिता को बढ़ावा देते सुस्त सरकारी विभागों के खिलाफ कई मुक़दमे लड़े हैं। शानू ने सीबीएसई के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक मुकदमा भी जीता जिसके बाद सीबीएसई भी सूचना का अधिकार क़ानून के अंतर्गत आता है। टाउनहॉल में आपन बिहार के संस्थापक अविनाश कुमार भी मौजूद थे। टाउन हॉल के बाद श्री शरद सागर ने मोकामा के ऐतिहासिक राम रतन सिंह महाविद्यालय जाकर श्री राम रतन जी की प्रतिमा को माल्यार्पण भी किया।मोकामा घाट जाकर राष्ट्रकवि दिनकर के ऐतिहासिक स्कूल का किया दौरा और बच्चों को किया सम्बोधित – श्री शरद सागर ने मोकामा घाट स्थित सरकारी उच्च विद्यालय के निमंत्रण को स्वीकार किया और वहां स्कूल के सभी बच्चों को किया सम्बोधित.मोकामा घाट हाई स्कूल में डॉ सुधांशु शेखर जी ने मंच संचालन कर बच्चों को शरद जी के बारे में बताया,एवं प्रचार्य द्वारा शरद जी को बुके भेंट कर समानित किया गया ,इस मौके पे रंजन सर ,अब्दुल मोगनी सर,रंजन सर,धरमेंद्र सर,गोपाल सर,कन्हैया सर ,किरण मैडम , कुंदन मैडम आदि मौजूद थे.300 से ज्यादा बच्चे और शिक्षक गण वंहा मौजूद थे .कुंदन मैडम के द्वारा राष्ट कवि दिनकर जी का एक शोध किया गया था ,जिसे उन्होंने बच्चों एवं शरद सागर जी को सुनाया .शरद जी रामधारी सिंह दिनकर जी के छात्रावास ,वो कूआं जन्हा दिनकर जी स्नान करते थे ,वह क्लास रूम जन्हा दिनकर जी पढ़ते थे देखा और स्कुल प्रांगन का भ्रमण किया. वहां स्कूल के बच्चों से शरद सागर ने कहा – “देश और दुनिया भर को दिनकर और उनकी कविताओं ने प्रेरित किया और आप सभी तो उसी कक्षाओं में पढ़ते हैं जहाँ राष्ट्रकवि पढ़े। इन्ही जगहों से दिनकर ने इस देश का मार्गदर्शन किया। आज आवश्यक है की आप सब भी वही मार्गदर्शन करें जो इसी विद्यालय के एक छात्र ने किया।शरद जी ने दिनकर जी की कविता भी बच्चों को सुनाई. “4 जुलाई को मोकामा के स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को किया सम्बोधित और की मुलाकात – मोकामा टाल समिति के अध्यक्ष एवं स्थानीय शिक्षक, अध्यापकगण, उद्यमी, एवं लोगों के परेशानियों को समझा और एक बेहतर नेतृत्व का निर्माण करने पर बात की.

मोकामा के विद्यार्थियों के साथ साथ स्थानीय ग्रामीण भी शरद सागर को सुनने आये थे .डॉ सुधांशु शेखर,आनंद मुरारी,प्रणव शेखर शाही,विक्रांत जी ,चन्दन जी ,अजय सर,प्रभात जी,चन्दन जी आत्मा,गौतम जी,बीट्टू जी,आनंद कुमार सिंह और सेकड़ो स्थानीय लोग भी उन्हें सुनने के लिए उत्सुक नज़र आये .


मोकामा में समाजसेवियों को दिया जा रहा है R.T.I अधिनियम की जानकारी

आए दिन मोकामा में भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रही है , जिससे आम लोग एवं सामाजिक कार्यकर्ता काफी परेशान है इस भ्रष्टाचार से मुक्त होने के लिए ना जाने कितने लिखित आवेदन ऊपर के कार्यालयों में दिए गएँ ।कई बार धरना की गई हैं यहां तक की सामूहिक उपवास भी किए गएँ हैं इसके बावजूद भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रही है इसलिए आज मोकामा श्याम मार्केट दुर्गा स्थान मंदिर के निकट सामाजिक कार्यकर्ता चंदन जी एवं प्रणव शेखर साही की अध्यक्षता में एक मीटिंग रखी गई जिस का संचालन चंदन जी की है इस मीटिंग का मकसद लोगों को आरटीआई ( Right to information act ) की जानकारी के बारे में बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट कुमार सानू जी के द्वारा सभी को आरटीआई दाखिला करने का प्रशिक्षण दिया गया कुमार सानू जी ने कहा की मुख्य रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 2005 में एक अधिनियम लागू किया गया जिसे सुचना का अधिकार यानी RTI कहा गया. इसके अंतर्गत कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी जानकारी ले सकता है बस शर्त यह है की RTI के तहत पूछी जाने वाली जानकारी तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए. यानि हम किसी सरकारी विभाग से उसके विचार नही पूछ सकते. जैसे आप के ईलाके में विकास के कामो के लिए कितने पैसे खर्च हुए है और कहाँ खर्च हुए है, आपके इलाके की राशन की दुकान में कब और कितना राशन आया, स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल में कितने पैसे खर्च हुए है जैसे सवाल आप Right to information act के तहत पता कर सकते है.

1.ये तो है सुचना के अधिकार का मतलब   लेकिन अभी भी लोगो के पास सुचना के अधिकार को लेकर कई सवाल है. और उन सवालों को हम बहुत ही सरल तरीके से जवाब देने की कोशिश करेंगे.2 कोई भी नागरिक, किसी भी सरकारीविभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है.3 ये अधिकार एक आम नागरिक के पास है जो सरकार के काम या प्रशासन में और भी पारदर्शिता लाने का काम करता है.4 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा कदम है.5● RTI के तहत कैसी जानकारी मांगी जाए? – इस अधिकार का उपयोग हम किसी भी सरकारी विभाग की राय जानने के लिए नही कर सकते. इसका उपयोग हम तथ्यों की जानकारी पाने के लिए कर सकते है. जैसे, “डिस्पेंसरी में कितनी दवाइयां आती है, पार्क और साफ़ सफाई में कितना खर्च हुआ, किसी सरकारी दफ्तर में कितनी नियुक्तियां हुई?” इसके अलावा “ सड़क बनाने के लिए कितने पैसे आये और कहा पर खर्च हुए?”. सभी गवर्मेंट डिपार्टमेंट, प्रधानमंत्री, मुख्यमत्री, बिजली कंपनियां, बैंक, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, राष्ट्रपति, पुलिस, बिजली कंपनियां, RTI act के अन्दर आते है.सरकार की सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी या गोपनीय जानकारी इस अधिकार के अंतर्गत नही आती. कैसे प्राप्त करे जानकारी?हर सरकारी विभाग में जन सुचना अधिकारी होता है. आप अपने आवेदन पत्र उसके पास जमा करवा सकते है.आवेदन पत्र का फॉर्मेट इन्टरनेट से डाउनलोड कर सकते है या फिर एक सफ़ेद कागज पर अपना आवेदन(एप्लीकेशन) लिख सकते है जिसमे जन सुचना अधिकारी आपकी मदद करेगा.RTI की एप्लीकेशन आप किसी भी भारतीय भाषा जैसे हिंदी, इंग्लिश या किसी भी स्थानीय भाषा में दे सकते हैं.अपने आवेदन पत्र की फोटो कॉपी करवा कर जन सुचना अधिकारी से रिसीविंग जरुर ले ले.https://rtionline.gov.in/ इस साईट पर जा कर केंद्र सरकार के किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते है.कब मिलेगी जानकारी?.आवेदन पत्र डालने के ३० दिन के अन्दर आपको जवाब मिल जाएगा.note – भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर ही ऐसा राज्य है जहाँ आप rti का इस्तेमाल नहीं कर सकते.

इस बैठक में घोसवरी , पैजना , मोकामा , हतिदाह , बादपुर , मोकामाघाट आदि जगहों से युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने भी भाग लिया और सामाजिक कार्यकर्ता चंदन कुमार एवं प्रणव शेखर साही जी को सभी ने धन्यवाद किया कि उन्होंने कुमार सानू जी के माध्यम से सभी को आरटीआई संबंधित अच्छी जानकारी प्राप्त हुई हैं.इस बैठक में आनंद मुरारी, विनय शंकर जी( वादपुर), वीरेंद्र कुमार, मुरारी कुमार, राहुल कुमार, आशुतोष कुमार ,आदि शामिल हुए ।( विक्रांत कुमार,मोकामा)

मोकामा की बेटी 3 बार मेट्रिक फेल ,तीनो बार गणित में 17 नंबर ,संयोग या साजिश

बिहार बोर्ड से छात्रा ने पूछा सवाल, मैट्रिक में तीन बार से एक ही पेपर में समान अंक क्‍यों?बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में फेल कर रही एक छात्रा को तीन बार से एक ही विषय में समान अंक आ रहे हैं। छात्रा का कहना है कि ऐसा संभव नहीं, उसे इस बार करीब 70 अंक की अपेक्षा थी।अगर यह संयोग है तो अद्भुत है। अगर नहीं तो बड़ा सवाल भी है। बिहार विद्यालय परीक्षा समीति (बिहार बोर्ड) के हाल में जारी मैट्रिक रिजल्ट में एक छात्रा को एक ही विषय में तीसरी बार 17 अंक आए हैं। छात्रा शुक्रवार को बिहार बोर्ड कार्यालय में अपनी ऐसी समस्‍याओं के साथ पहुंचे सैकड़ों अन्‍य छात्र-छात्राओं में शामिल थी।लगातार तीन परीक्षाओं में समान नंबर.पटना के मोकामा की रहने वाली छात्रा प्रियंका कुमारी पिछले साल से मैट्रिक की परीक्षा में फेल कर रही है। वजह है गणित में 17 अंक। मोकामा के मोर स्थित श्रीभगवती हाईस्कूल की छात्रा प्रियंका को 1917 की मैट्रिक परीक्षा में गणित में 17 अंक आए। उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा दी। उसमें भी गणित में 17 अंक हीं आए। फिर 2018 की परीक्षा के हाल में घोषित रिजल्‍ट में भी प्रियंका को गणित में 17 अंक ही आए हैं। छात्रा ने इसपर सवाल उठाते हुए अनियमितता की आशंका जाहिर की है।,/p>

छात्रा का दावा, आने चाहिए अधिक नंबर.प्रियंका का कहना है कि उसकी परीक्षा ठीक गई थी तथा उसे 70 के आसपास अंक आने चाहिए। उसके अनुसार मूल्‍यांकन में गड़बड़ी की गई है। हालांकि, बोर्ड के एक अधिकारी ने नाम नहीं देने के आग्रह के साथ कहा कि गोपालगंज में मैट्रिक की कॉपियां गायब हुईं हैं तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं है। लेकिन, जरूरी नहीं कि यह गड़बड़ी का ही मामला हो।

रंग उमंग कार्यशाला,17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे ले रहे भाग

रंगकर्म के ककहरे से गुलजार हुआ मरांची गांव,आदर्श मध्य विद्यालय मरांची में सौ से अधिक बच्चे ले रहे भाग.रंगकर्म के ककहरे से गुलजार हुआ मरांची गांव। 17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे ले रहे हैं कार्यशाला में भाग। आदर्श मध्य विद्यालय मरांची में संगीत, नृत्य, नाटक, ललित कला और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर 17 गांवों के सौ से अधिक बच्चे अपनी विधाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं। आकाशगंगा रंग चौपाल एसोसिएशन बरौनी द्वारा ग्रीष्मकालीन रंग कार्यशाला रंग-उमंग के तहत 11 दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कई विधाओं के प्रशिक्षक अपने-अपने तरीके से गांव के बच्चों को रंगकर्म के ककहरे से वाकिफ कर रहे हैं।

गर्मी की छुट्टी के दिनों में खासकर के ग्रामीण बच्चों के लिए आकाशगंगा का यह प्रयास मध्य विद्यालय मरांची के मैदान में अल सुबह से देखते बन रहा है । अल सुबह 5:30 से ही कार्यशाला में पहुंच रहे हैं इन बच्चों का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं । सुबह 6 बजे इन बच्चों का व्यायाम-योग शुरू होता है जिसे मध्यप्रदेश नाटय़ विद्यालय से पास आउट ऋषिकेश कुमार देख रहे हैं। शरीर के विभिन्न अंगों के साथ-साथ भाषा और शब्दों को भी ध्यान में रखकर बच्चों का वाइस एक्सरसाइज भी कराया जा रहा है। इसके बाद कार्यशाला के संगीत प्रशिक्षक नरेश कुमार के नेतृत्व में बच्चे स्वर अभ्यास भी करते हैं। फिर इन बच्चों की मस्ती की पाठशाला में ये बच्चे अपनी अभिरुचि के अनुसार अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण लेते हैं। नाटक, लोक नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, पाश्चात्य नृत्य, ललित कला, संगीत सहित अन्य विधाओं में यह बच्चे प्रशिक्षण लेकर अपने अंदर कला की भूख को पैदा कर रहे हैं । कार्यशाला में पटना से आये नृत्य प्रशिक्षक राहुल मुकेश, लक्ष्मण, कुंदन, विक्की, संगीत में नरेश कुमार, बबलू कुमार, सुबोध कुमार ललितकला में मनीष कुमार अंकित वर्मा राधे कुमार, रूपेश कुमार, अमरेश कुमार, डॉ. कुन्दन कुमार आदि लगातार प्रशिक्षण दे रहे हैंर्।शाला निर्देशक राष्ट्रीय नाटक विद्यालय नई दिल्ली से पास आउट गणोश गौरव कहते हैं कि गांव के बच्चों के लिए सुनहरा अवसर है जहां वे एक साथ अलग-अलग विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं । यह एक मानव निर्माण की कार्यशाला है, जिसमें समाज के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है ।

लगातार गांव के हर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों से मिलकर कार्यशाला की सफलता को लेकर प्रयास किया जा रहा है । कार्यशाला प्रभारी और आकाश गंगा के संयोजक डॉ. कुन्दन कुमार कहते हैं कि का कस्बाई रंगमंच और गांव के बच्चों के लिए विगत 14 वर्षो से रंग उमंग कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है ।(Rastiy Sahara)

मोकामा में एक और सड़क दुर्घटना माँ बेटे की मौत

मोकामा में सडक हादसों की संख्या और मरने वालों की गिनती दिनोदिन बढती जा रही है .ताज़ा घटना आज की है हथिदह के पास एक ट्रक से धक्का लगने से माँ और उसके 6 वर्षीय बेटे की घटनास्थल पर ही मौत हो गई ,जबकि उसका पति भी गम्भीर रूप से घायल है .घायल को थाना अध्यक्ष अविनाश कुमार ने तत्काल अस्पताल पहुचाया जन्हा उसका इलाज चल रहा है .ये लोग अमरपुर थाना चकिया , बरौनी ज़िला बेगुसराय के रहने वाले हैं.
माँ का नाम मोना देवी है जबकि उसके पति का नाम गोरेलाल राय हैं.ये दुर्घटना तब घटी जब जब ये परिवार अपने बाइक से लखीसराय से बरौनी जा रहे थे ,इसी यात्रा के दौरान हथिदह के पास ये लोग एक ट्रक का शिकार हो गये .घायल को अच्छे इलाज के लिए रेफर किया गया है जबकि मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चूका है.पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है.