टाल में पईन उड़ाही पर तनाव

हाथीदह थाना क्षेत्र के टाल में गुरुवार को दो गांवों के लोग पईन उड़ाही के मुद्दे पर अचानक आमने-सामने आ गए। तनातनी की स्थिति के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शात किया। घटनास्थल से पुलिस ने जेसीबी बरामद किया। वहीं विधि व्यवस्था के मद्देनजर कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया।ज्ञात हो कि क्षेत्र के किसानों की माग पर सूबे के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह टाल क्षेत्र में पईन उड़ाही का कार्य बरसात पूर्व पूरा कराने पर दृढ संकल्पित हैं। मकसद है टाल क्षेत्र में देर तक जल जमाव न रहे ताकि दलहनी फसलों की बुआई समय पर हो जाए। आए दिन इस कार्य के संचालित होने में पईन की पहचान को लेकर कई गांवों के किसान आपस में उलझ जाते हैं तो कहीं निर्माण कार्य में लगी एजेंसी से भिड़ जाते हैं। इससे काम में रुकावट आती है।

ऐसा ही मामला गुरुवार को हुआ जब बड़हिया गांव के किसानों ने जुटकर पईन उड़ाही का कार्य बंद करा दिया। इन लोगों का कहना था कि जिस जमीन पर उड़ाही की जा रही है वहां पईन का अस्तित्व कभी था ही नहीं। नक्शे में भी इसका उल्लेख नहीं है। यह उड़ाही किसानों की निजी जमीन पर की जा रही है। सैकड़ों एकड़ किसानो की जमीन बर्बाद हो जाएगी। छोटे व सीमात किसानो के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। इस आरोप से उलट औंटा गांव के लोग इस उड़ाही को जायज ठहरा रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों गांवों के लोग आपस में उलझ गए। विधि व्यवस्था बिगड़ने की आशका की सूचना थाने को दी गयी। मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शात कराया। समाचार लिखे जाने तक दोनों गांवों के लोग हाथीदह थाने पर जमा थे। थाना अध्यक्ष अविनाश कुमार ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)

किसानों को तत्काल कोई राहत देने से इनकार

मोकामा बड़हिया के किसान अपने दलहनी फसल की उचित मूल्य पर खरीद के किये क्रय केंद्र खोलें की मांग को लेकर एक दिवसीय शांति पूर्ण धरना पर बैठे थे. धरने का असर पटना से लेकर लखीसराय तक देखने को मिला .21 किलोमीटर से भी लम्बा जाम लग गया.इतना बड़ा आन्दोलन एकदम शांतिपूर्ण तरीके से हुआ.किसान महाबन्दी पटना से लेकर लखीसराय तक सफल रहा है,कंही ज्यादा कंही कम पर हर जगह लोग सड़कों पर उतरे। एक ऐसा आंदोलन जो सबको सीख दे गया,जब बड़हिया मे किसानों ने रेल रोका तो यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया।उन्हें खाने के लिए नाश्ते का पैकेट,पीने के लिए पानी मुहैया कराया गया। सड़को पर लोगो ने बिस्कुट बांटे, कई जगहों पर टाल का सत्तू से बना शीतल पेय पिलाया गया। लम्बी लम्बी जाम में फंसे गाड़ी और यात्रियों को टाल के बेसन से बना पकोड़ा भी बांटा गया।जिनको फ़िक्र था किसानों का उन्होंने किसान आंदोलन सफल बनाने के लिए अपना सहयोग दिया।

43 डिग्री की तपती धूप में मातृ शक्ति भी आंदोलन का हिस्सा बनी।हर आदमी ने अपनी औकाद। से बढ़कर आंदोलन में मदद किया।एक मुसलमान भाई ने अपना पूरा ठेला तरवुज जाम में फंसे यात्रियों में बाँट दिया। एक अखब्बार वेंडर ने 1000 से ज्यादा अखबार जाम में फंसे यात्रियों को दे दिया ताकि उनका समय कट जाय।जाम में फंसे यात्री भी सुकून से आंदोलन समाप्त होने का इन्तजार कर रहे थे। कंही कोई तोड़ फोड़ की कोई घटना नही। सांसद वीणा देवी पुरे समय किसानों के साथ तपती धूप में बैठी रहीं,पसीने से तर वतर होकर भी बैठी रहीं।पार्टी लाइन से परे किसानों के साथ रहीं। 80 साल से ज्यादा बुजुर्ग भी टस से मस नही हुए।ललन सिंह भी पार्टी पॉलिटिक्स छोड़ धरने में शामिल हुए। उन सभी छोटे बड़े लोगो को सलाम जिनकी छोटी बड़ी मदद से ये किसान आंदोलन सफल हुआ।केंद्र सरकार ने दाल की गिरती कीमतों के मद्देनजर किसानों की समस्याएं दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। हालांकि, सरकार ने तुरंत किसी तरह की राहत देने से इनकार किया है। दूसरी तरफ, 2019 में आम चुनाव के मद्देनजर सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून के लाभार्थियों के लिए अनाज की कीमतों में अगले एक साल तक बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर केंद्रीय खाद्य आपूर्ति व उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने आज यहां इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘दाल की कीमत बढ़ जाए, तो परेशानी। कम हो जाए तो परेशानी।

बिहार विधानसभा चुनाव में यह एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरा था। हम लोगों ने 20 लाख टन का बफर स्टॉक तैयार किया। अब जमाखोरी कम हुई तो दाम घटना शुरू हो गया। दाल की इस बार बंपर फसल हुई है। हमने धान और गेहूं की तर्ज पर दाल की न्यूनतम कीमत भी तय की है। दाल की कीमत हमारे लिए चिंता का विषय जरूर है। हमने इस पर एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है।’ हालांकि, उन्होंने किसानों को तत्काल कोई राहत देने से इनकार किया। दाल के आयात पर शुल्क बढ़ाने से जुड़े एक सवाल पर मंत्री ने कहा, ‘विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के मुताबिक हम किसी वस्तु के आयात पर रोक नहीं लगा सकते हैं। हम बस शुल्क कम या अधिक कर सकते हैं। इस पर तुरंत कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है।’ केंद्र सरकार ने हाल में मोजांबिक से दाल आयात करने का निर्णय लिया था।

मरे किसान हँसे शैतान

मोकामा टाल के किसान इन दिनों नीलगाय के आतंक  से परेशान है. नीलगायों का एक एक झुण्ड किसानो के हरे भरे खेत पल भर में पल भर में तबाह कर देते है .अपने हरे भरे फसलों को बचने के चक्कर में किसान इस हांड कपाती ठंड में अपने खेतों के बीच जाकर जागने को मजबूर है.कई किसान फसलो को बचाने के चक्कर में अपनी जान से न चले जाये डर लगता है .तमाम रात जागने के बाद भी फसल बचेगी कहना मुश्किल है .शेखपुरा और जमुई की पहाड़ियों से नीलगाय का रुख मोकामा टाल की और हो गया है.पिछले 15 दिनों में सेकड़ों एकर फसल बर्बाद हो चुकी है .धनिया और मटर नीलगायों का फेवरेट हो गया है.

खाने के बाद कंही सुस्ताने भी बैठ जाती है नीलगाय तो बीघा दो बीघा फसल बर्बाद हो जाती है .पहले पटाखों की आवाज़ से डर जाती थी पर अब वो भी अभ्यस्त हो गई है उन्हें पटाखों और रौशनी से कोई भय नहीं रहता है .अकेला किसान दर्जनों नीलगायों को भगाने में भी असमर्थ रहता है .

मोकामा टाल का 15 से 30 प्रतिशत फसल हर साल नीलगायों की भेंट चढ़ जाता है.एसा मन जा रहा है की क्षेत्र में १०००० से ज्यादा नील गाय है.

सरकार बेकार साबित हो चुकी है.किसानों के नाम पर सिर्फ योजनायें है वो भी अधिकारिओं और नेताओं के जेब भरने के लिए .किसानो के दर्द पर हँसना फैशन बन गया है. अब बौधा के मालिक सीताराम .