खंडहर बन गई श्री कृष्ण गोशाला

गायों के संरक्षण लिए वर्ष 1913 में मोकामा में बनी श्री कृष्ण गोशाला अब सिर्फ नाम की गोशाला रह गई है। रखरखाव के अभाव में भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। परिसर में झाडिय़ां उग आई हैं। कभी यहां लोगों का तांता लगा रहता था मगर अब लोग दिन में यहां जाने से कतराते है। हां, असामाजिक तत्वों के लिए गोशाला जरूर सेफ जोन बन गया है।गायों के लिए बने शेड व नाद जीर्ण-शीर्ण होकर अपनी बदहाली की गाथा सुना रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो दशक पूर्व इस गोशाला में उन्नत किस्म की दर्जनो गायें हुआ करती थीं। प्रति दिन दर्जनों गैलन दूध का उत्पादन होता था। ऑर्डर के हिसाब से कर्मचारी उपभोक्ता के घरों तक दूध की आपूर्ति करते थे। वहीं सुबह शाम दूध के ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी.

कार्तिक शुक्ल पक्ष की जन्माष्टमी को प्रति वर्ष गोशाला परिसर में विशाल मेला आयोजित होता था, जिसमें दूर दराज से भी लोग मेले में आते थे। सामान की खरीद-बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा गोशाला को दिया जाता था। अपराधियों का बोलबाला हुआ तो व्यापारी पलायन कर गए और गोशाला बदहाल होती चली गई. गोशाला से लगी करीब 2 बीघे की जमीन से प्रति वर्ष 25 हजार रुपये की आय होती है।गोशाला की करीब 20 बीघा जमीन दियारा में है, जिससे प्रति वर्ष 60 हजार रुपये की आमदनी होती है.