मुझे भी हक है क्या

मुझे भी हक है क्या

कभी-कभी सोंचता हूं मुझे भी हक है क्या कुछ बोलने का, या फिर सोचने का? मोकामा चौक और नुक्कड़ों पर लोग बातें करते हैं अपने पड़ोसियों के चूल्हों और देश-विदेश की खबरों पर, उनकी ओर जब देखता हूं, तो कहते