डर या लालच क्या है सच

पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम में जिस तरह मोकामा  विधायक अनंत सिंह  जी का नाम बार बार मिडिया में उछाला जा रह है. सचमुच 50 लाख की सुपारी दी  गई थी या बस पब्लिसिटी स्टंट था.पुलिस ने जो प्रेस रिलीज जारी  किया था उसमे अनंत सिंह को मारने का प्लान हो  येसा  कुछ भी नहीं था..तो फिर कौन है जो अनंत सिंह के बारे में येसी बाते वायरल करता है .अंसारी और अनंत की कोई दुश्मनी नहीं फिर मुख्तार अंसारी का नाम क्यों लिया जा रहा है.

 

 

 

 

राजनीती के गलियारे से बात उठ रही है की येसी बाते खुद ही मिडिया से प्लांट करवाई जा रही है ताकि मिडिया में बना रहा  जा सके.चुनाव की भी उलटी गिनती शुरू है . आम चुनाव के साथ ही बिहार  विधानसभा चुनाव भी मुमकिन है तो उसकी तैयारी की शुरुआत भी की जा रही है. बार बार किसी न किसी घटना से जोड़ कर सहानभूति बटोरने की बात भी हो रही है.ताकि चुनाव में सहानुभूति वोट भी पाया जा सके .

अभी लोकसभा से पहले राज्यसभा का चुनाव है .खेल काफी रोचक हो गया है .एक एक विधायक महवपूर्ण है .निर्दलीय विधायक तो सबसे जयादा .भाजपा और जदयू  दोनों को अपनी सीटें बचाने  के लिए निर्दलीय विधायक भी चाहिए.कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी तो जदयू का भरोसा जीत चुके है और  हो सकता है राज्यसभा के चुनाव में वो जदयू को समर्थन दें.बोचहां  विधायक बेबी कुमारी भी एनडीए के सम्पर्क में है वो भी भाजपा या जदयू के समर्थन में वोट करेंगी.वाल्मीकि नगर  विधायक धीरेंद्र प्रसाद सिंह भी एनडीए के सम्पर्क में है,बगहा में आयोजित पार्टी स्तर पर हुई एक बैठक में एनडीए नेताओं के साथ धीरेंद्र प्रसाद सिंह शिरकत कर चुके हैं. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास कार्यों की समीक्षा यात्रा के दौरान भी वह मंच साझा कर चुके हैं.अब बचते है मोकामा विधायक  अनंत सिंह जी जिसे जदयू ने जीरो क्राइम की निति के तहत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था.नितीश कुमार खुद इस मामले को देखते है .इसलिए जदयू तो अंनत सिंह को भाव देने वाली नहीं .लालू यादव से 36 का आंकड़ा है तो वंहा से भी निमन्त्रण  नहीं के बराबर है .वैसे भी आरजेडी और कांग्रेस को किसी विधायक  के वोट की दरकार नहीं है .अब सारा गणित ये है की ये खुद ही एनडीए को अपना समर्थन करें या नोटा दबा कर अपनी अलग राजनीती करे.सोसल मिडिया पर बात चल रही है की वोट के बदले सपोर्ट की निति चाहते है अनंत सिंह सिर्फ इसीलिए येसी अफवाहे फैलाई जा रही ताकि राज्यसभा में समर्थन के बदले कुछ  अतिरिक्त सुरक्षा ली जा सके

 

असुरक्षित अनंत ?

पुलिस का दावा की मोनू और निलेश ने अनंत सिंह को मारने  के लिए मुख्तार अंसारी से 50 लाख की सुपारी ली थी ,मोकामा और आसपास के लोगो को हजम नहीं हो रही है. यूँ तो जग जाहिर है अनंत दूध के धुले नहीं है ,बाहुबली से विधायक बने है .खौफ इतना की विरोध मात्र से लोग राम नाम सत्य हो जाते है .

मगर पुलिस जिस तरह हर घटना और सुचना के तार अंनत सिंह से जोड़ रही है लोगो को समझ नहीं आ रहा है .

अभी कुछ महीने पहले भी जब कन्हैयापुर में एक आदमी बम बनाने के क्रम  में मारा गया उसका भी तार अनंत सिंह से जोड़ा गया .जबकि गावं वाले तक समझ रहे थे की कोई युवक अपराधी श्याम सुंदर से बदला लेने की तैयारी के क्रम में  अपनी जान गवां बैठा .

मोनू की दुश्मनी अनंत सिंह के गुर्गे मणि पहलवान से तो जग जाहिर थी.जबसे   मोनू की बहन नेहा  सबसे कम उम्र की महिला मुखिया बनी थी ,मणि पहलवान खार खाए बैठा था .उसने अंनत सिंह ,राज्य सरकार और प्रशासन के मदद से कागजी आधार का सहारा लेकर नेहा का निर्वाचन रद्द करवा दिया . तो एक दफा मान भी लिया जाय की मोनू मणि पहलवान को मारने  की साजिस कर सकता है .मगर अनंत सिंह को मारने  की कोई वजह नहीं थी न मोनू के पास और न उसके तथाकथित आका मुख्तार अंसारी के पास .

मोनू के पकडे जाने की खबर 3 दिन पहले से मिडिया में दी  जा रही थी की उसे पटना में पुलिस ने पकड़ा है .उसके परिवार वाले भी येसा  ही दावा कर रहे है .तो फिर पुलिस अचानक कहती है की मोनू को कल रात बाढ़ के पास से मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया जिसके बाद उसने कबूल  किया की वो लोग अंनत को मरने केलिए मुख्तार अंसारी से 50 लाख की सुपारी ले चुके है.

सोसल मिडिया पर लोग कह रहे है की ये सब अनंत सिंह को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए कहानी रची जा रही है.

अब अनंत सिंह को ललन सिंह (मंत्री) के लिए चुनाव प्रचार करना है। बिना पूरा तामझाम के कइसे होगा, सुरक्षा में पुलिस बल बढ़ाने के लिये सारा ड्रामेबाजी हो रही है। अपराधी पूरा प्लान बता दिया!!सुग्गा था ना?? Gaurav Ranjan Singh

“तथाकथित माँ बहन के रक्षक पिछले दरवाज़े से किस तरह से आम जनता के द्वारा चुनी की गांव की बेटी को अपने लठैत के पक्ष में करने के लिए सभी तिकरम करने से बाज नही आये। एक चुनी हुई युवा महिला मुखिया को अंनत सिंह राज्य सरकार और प्रशासन के मदद से कागजी आधार का सहारा लेकर उसे बे दखल किया गया। मणि पहलवान जो कि अनंत सिंह का लट्ठेत था उसे हराने वाली नेहा कुमारी को अंततः राज्य सरकार और प्रशासन के मिली भगत से लोकतंत्र का गला घोटा गया।

एक बार फिर से तथाकथित माँ बहन के रक्षक को जान का खतरा का एपिसोड बिहार में खूब बढ़ चढ़ कर पत्रकार, राज्य सरकार, प्रशासन और खुद अनंत सिंह द्वारा परोसा जा रहा है। जिस सोनू मोनू के गिरफ्तारी करके उसे अनंत सिंह का सुपारी किलर के रूप में जनता के सामने पेश किया गया वो किसी सिनेमा के स्टोरी से कम नही है।बाढ़ कोर्ट में गुड्डू सिंह के हत्या के मामले में सोनू मोनू को पकड़ने के लिए SIT गठित किया गया था और SIT द्वारा ही सोनू मोनू को पटना के बी एन कॉलेज के गेट पर 5 दिन पूर्व ही गिरफ्तार किया गया था ऐसा दावा परिजन द्वारा किया गया है। लेकिन ठीक उसके उलट बिहार पुलिस द्वारा एनकाउंटर करके पकड़ा गया ऐसा झूठा कहानी राज्य के जनता के समक्ष रख गया।सोनू मोनू के परिवार द्वारा लोअर कोर्ट में 5 दिन पूर्व ही ये गुहार लगाया गया था को उसी पटना में किसी जगह से गिरफ्तार किया गया लेकिन पुलिस द्वारा 5 दिन बाद नई कहानी बनाई गई कि किसी अन्य जगह से गिरफ्तार किया गया।
बहुत दिनों से नीतिश कुमार जी के चहेते को पार्टी में पुनः वापसी का मैदान तैयार किया जा रहा है मेरे समझ से इसी कड़ी में एक और कहानी को गढ़ दिया गया है। लोकसभा चुनाव में मुंगेर से जदयू के घोषित अघोषित चहेते के लिए अनंत सिंह जी को जरूरत है और उसी को ध्यान में रखकर ये सारी कहानी को बुना गया है।
मोनू सोनू उसी मुखिया नेहा कुमारी का भाई है जिसने अनंत सिंह के लठैत को हरा कर सबको चौंका दिया था। जिस मोनू सोनू को मुख्तार अंसारी का सूटर बताया जा रहा है उसके पास से सबसे निम्न हथियार बरामद हुआ है और समझ से पड़े है अनंत सिंह जी को मारने के लिए 47-56 के जगह इसे क्यों उपयोग करेंगें।
किस लिए राज्य सरकार, प्रशासन इस तरह की नौटंकी कर रहा है, अनंत सिंह है ही नीतिश बाबू और न. 2 के चहेते उसे पार्टी में लेकर अपना रास्ता सुगम कर ले। इस तरह के कहानी से अनंत सिंह जी को अब लाव लश्कर वाली सुरक्षा भी मिल जायेगा और चुनाव आते ही फिर से माँ बहन का रक्षक बनने का ढोंग बखूबी करेंगे। ये वही माँ बहन के रक्षक है जिसने भूमिहार की बेटी को तमाम तिकरम से हटा कर अपने लठैत के लिए रास्ता बना दिये।”

Sourabh Singh

 

 

कफ़न से कम्बल का सफ़र

आजकल फिर बाहुबली विधायक अनंत सिंह चर्चा में बने हुए है.अभी सोनू मोनू गेंग के मोनू और निलेश ने पकडे जाने के बाद ये खुलासा किया की वो  मोकामा विधायक अनंत सिंह को जान से मारने  का प्लान बना रहे थे.इनलोगों ने विधायक अनंत सिंह को सोनपुर मेले में मारने का प्लान बनाया था,जिसमे वो कामयाब नहीं हो पाए थे.50 लाख की सुपारी ली गई है ,उत्तर प्रदेश के बाहुबली  विधायक मुख्तार अंसारी का नाम भी सामने आ रहा है .

वैसे तो अनंत सिंह का भी इतिहास अपराधिक रहा है .कितनो को उन्होंने कफ़न के अन्दर पहुचाया उन्हें भी नहीं पता .पर जबसे वो विधायक बने है कफ़न की नहीं कम्बल की राजनीती करने लगे है. अभी 4 दिन पहले भी मोकामा के श्री कृष्ण विद्यालय में उन्होंने हजारों गरीब गुरबा को कम्बल बाटते नज़र आये थे.

ये पहली बार नहीं है अनंत ने इससे पहले भी कई बार मौत को मात दी है.गोली बन्दुक से  उनका  नाता बहुत पुराना है.हाँ जब से उनका संबंध नितीश से टूटा  है कुछ अकेले पड़ गए है.नितीश कुमार भी वोट बैंक के कारण  खुलकर अनंत सिंह का सपोर्ट नहीं कर पाते है.कभी वो दिन भी था जब नितीश कुमार छोटे सरकार के आगे हाथ जोड़े खड़े दिखते थे.

मगर अनंत सिंह नितीश कुमार को ही अपना नेता मानते है.अभी जब नितीश कुमार लालू यादव से अलग होकर सरकार बन रहे थे तब भी अंनत सिंह ने उन्हें अपना समर्थन दिया था.

जब भी नितीश कुमार संकट में आये, अनंत सिंह संकटमोचन बन कर नितीश को बचाने में लग जाते थे.चाहे बात जीतन राम मांझी की हो जब वो मुख्यमंत्री पद  नहीं छोरना चाहते थे मगर  नितीश पुनह मुख्यमंत्री बनना चाहते थे.तब भी अनंत सिंह आगे आये और मांझी को बल पूर्वक कुर्सी से बाहर किया और नितीश को मुख्यमंत्री बनाया.

नितीश जी जब भाजपा से अलग होना चाहते थे जिसके लिए वो दिल्ली के राम लीला मैदान में अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहते थे.वो अनंत ही थे की दिल्ली में लाखों की भीड़ उनके लिए जुटा दी और नितीश भाजपा से अलग होने की निति में सफल हो गए.

मगर कहते है न जरूरत के बाद लोगो की कद्र नहीं होती .जब लालू यादव ने अपने यादव वोट बैंक के लिए अनंत सिंह पर हमला करना  शुरू किया तो नितीश कुमार अनंत का बचाव क्या करते या चुप रहते उलटे वो अनंत सिंह पर तीखे और हमलावर हो गये .जिसका खामयाजा अनंत सिंह को 2 साल जेल में गुजरना पड़ा.

जब से जेल से बाहर आये है बराबर कह रहे है की उनकी जान को खतरा है .हालंकि वो ये नहीं बता पा रहे है की किससे उनको खतरा है . शायद अपने चढ़ते वक्त में उन्होंने कितने दुश्मन बना लिए  उन्हें खुद याद नहीं.

लोग कहय हय छोटे सरकार

मोकामा विधानसभा से लगातार 4 बार विधायक बने अनन्त सिंह 2015 में निर्दलीय जीत कर आये थे.अपराध की दुनिया से राजनीती में कदम रखने वाले अनंत सिंह पुरे बिहार में छोटे सरकार के नाम से जाने जाते है. जानवरों से प्यार करने वाले छोटे सरकार चर्चा में तब आये थे जब उन्होंने लालू यादव का घोडा पवन खरीदा था.2007 में जानवरों के मेले में वह लालू यादव का घोड़ा लेकर पहुंचे थे. अनंत सिंह को पता था कि लालू उन्हें अपना घोड़ा नहीं बेचेंगे, इसलिए उन्होंने किसी और के जरिए घोड़ा खरीदा था.उन्हें पास बहुत सारे जानवर है ,जिसमे हाथी,घोडा,सांड तक हैं..

अजगर पालने का शौकीन है.एक बार उनके घर पर अजगर भी पाया गया था,जिसके बाद् उनपर वन अधिकारिओं ने कार्यवाही भी की थी.उनके सांड की कीमत लाखों में है.इस सांढ़ की  हर दो घंटे पर जैतून के तेल से मालिश होती है .

लोग कहते है राजनीती उनके खून में है .उनके बड़े भाई स्व. दिलीप सिंह भी 2 बार मोकामा का विधायक रह चुके है .उस समय भी सारे जनता कार्यकर्ता को वो खुद ही मेनेज करते थे. उसी समय से उनका नाम छोटे सरकार के नाम से मशहूर हो गया.राजनीती में रुतबा येसा सीधे मुख्यमंत्री तक उन्हें करीब रखना चाहते है. उस ज़माने जब लालू यादव जी मुख्यमंत्री थे तो अनंत का ही प्रभाव था की दिलीप सिंह मंत्री बने हुए थे.जब नितीश का दौर आया तो नितीश कुमार खुद छोटे सरकार के आगे बौने नज़र आये.जो इस तस्वीर में दीखता भी है .

उनके ऊपर फिल्माया ये गीत बहुत मशहूर हुआ था.जिसे संगीत के सम्राट उदित नारायण जी ने स्वर दिया था.छोटे सरकार पटना  की सड़क पर खुद बग्घी चलाकर निकले  और देखने वाले देखते रह गए.पूछे जाने पर अनंत ने कहा, मैंने दिल्ली से बग्घी बनवाई और यहां लेकर आया हूँ , मैं तब से इसकी सवारी का मजा ले रहा हूं और इसमें ईंधन भी नहीं लगता.नय कोई तेल जाता है नय कोई चालक रखना पड़ता है जब मन हुआ खुद ही चला लेते है.  इस बग्घी में लाइट और म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ है। सवारी के दौरान बैकग्राउंड में एक गाना भी चल रहा था, हम हैं मगहिया डॉन, लोग कहें छोटे सरकार। ये गाना एक भोजपुरी फिल्म के लिए तैयार किया गया था जिसमें खुद अनंत सिंह अभिनय करने वाले थे.छोटे सरकार का संगीत प्रेम भी किसी से छुपा नहीं है.लोग कहते है अपने पैतृक गावं नदामा में वो हर दशहरे और सरस्वती पूजा पर मुंबई से कलाकार बुला कर कार्यकर्म करवाते थे.जिसमे मशहूर तरीका  मलाईका अरोरा तक परफोर्म  कर चुकी है.

कई तो पिद्दी लोग उनकी तारीफ करके भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के बड़े कलाकार में कन्वर्ट हो गए.