जाने महादेव स्थान मोकामा वाले गंगाधर महादेव की कथा

जटाजूटमध्ये स्फुरद्गांगवारि,महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम्।।(वेदसारशिवस्तव:).अर्थात्–जिनके जटाजूट में श्रीगंगाजी खेल रही हैं, उन एकमात्र कामारि श्रीमहादेवजी का मैं स्मरण करता हूँ।पर्वतराज हिमालय की ज्येष्ठ कन्या हैमवती गंगा को मृत्युलोक में जाने का आदेश तो ब्रह्माजी ने दे दिया, पर गंगा के स्वर्ग से गिरने का वेग एक समस्या बनकर रह गई। ब्रह्माजी ने स्पष्ट कहा–’गंगा के गिरने का वेग पृथ्वी सहन नहीं कर सकेगी। केवल त्रिनेत्रधारी शंकर में ही इसके प्रचण्ड वेग को रोकने की क्षमता है।’आकाश से गिरती हुई गंगाजी को, जो स्वच्छ, सुन्दर एवं चंचल जलराशि से युक्त तथा ऊंची-ऊंची लहरों से उल्लसित होने के कारण भयंकर जान पड़ती थी, भगवान शिव ने फूलों की हिलती हुई सुन्दर माला की भांति सहसा ही अपने मस्तक पर धारण कर लिया। भगवान शंकर के सिर पर अपनी लहरों के साथ लहराती हुई गंगा आकाश से इस प्रकार अवतरित हो रही है, जैसे चन्द्रमा को निर्मल मृणालकन्द (कमल के डंठल के मध्य का रेशा) समझकर उसे पाने की इच्छा करती हुई और अपने पंखों को हिलाती-डुलाती हंसिनी आकाश से सरोवर में उतर रही हो। भगवान शंकर की अनुकम्पा ने पृथ्वी को गंगा जैसा अद्भुत उपहार प्रदान किया, उन औघड़दानी शिव की प्रशंसा में जितना कुछ कहा जाए, कम ही होगा।गंगा किनारे 108 गंगाधर शिव विराजमान हैं जिन्होंने गंगा के प्रचंड वेग को काबू किया.मोकामा के महादेव स्थान वाले शिव भी गंगाधर शिव हैं जो शिवलिंग में विराजते हैं,

भगवान शंकर का मंदिर महादेव स्थान मोकामा के दो टोलों के ठीक बिच में है .जी हाँ मोकामा के सकरवार और मोलदियार टोला का बोर्डर है . रामायण काल में जब राम भगवान अपने गुरुदेव के साथ माता सीता के स्वयम्बर में जा रहे थे तो इसी महादेव स्थान में उन्होंने विश्राम किया था राम ने महादेव की पूजा आराधना की थी .भगवान राम ने जब भी महादेव की पूजा की भगवान शंकर ने उनकी इच्छा पूरी की . भगवान राम ने मोकामा में महादेव की पूजा की थी और मंदिर में विश्राम किया था तब से ही इस जगह को मोकामा कहा जाने लगा ..एक जगह और भी जब भगवान राम ने महादेव को इसी रूप में पूजा था तो वंहा का नाम रामेश्वरम पड़ा .बड़ी पवित्र जगह है महादेव स्थान . एक समय में महादेव स्थान मोकामा का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र था .कलकत्ता ,बनारस ,बम्बई ,पटना आदि से लोग यंहा व्यापार करने आते थे . यंही पर गौरी माता का भी मंदिर है .कुमारी कन्यायें यंहा दोनों मंदिर में अपने लिए अछे पति की प्रार्थना करती है .और महादेव और माता गौरी की कृपा से उन्हें अपना मन पसंद जीवन साथी मिलता है .आइये सुनते है इस सावन अपने मोकामा के बेटे मंजय कश्यप की आवाज़ में गाया गया बाबा भोला का पावन गीत