मोकामा
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सरांध मारता स्वास्थ्य

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पिछले कुछ वर्सो से जबसे मोकामा का नाजरथ अस्पताल बंद हुआ है .लोग छोटी छोटी बिमारियों और दुर्घटनाओ से मरने लगे है.मोकामा के जनप्रतिनिधि सिर्फ नाम मात्र  के हैं .कहने के लिए मोकामा राजनितिक और रणनीतिक तौर पर काफी मजबूत है,मगर ये वास्तव में इतनी खोखली है की हिलने मात्र से ही टूट जाये.वैसे तो इस सबके लिए किसी को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा मगर सोचिये आखिर जिम्मेदार कौन है .विधायक ,सासंद ,पार्षद ,वार्ड कमिश्नर ,जनता या कोई और .सबसे बड़ी दोसी तो जनता ही है जो इतने संवेदनशील मुद्दे पर भी एक नहीं हो पाते  है जबकि इससे सीधे उसकी जान जा रही है. हो सकता है उनको लगता है की हम तो सुरक्षित है इसलिए आवाज़ उठाना गलत है .शायद  उन्हें नहीं पता बारी बारी से नंबर आ रहा है किसी का नंबर भी आ सकता है उस दिन कुछ नहीं मिलेगा सिवाय मौत के .

बुरा वक्त किसी को पहचानता नहीं है .जनता को लगता  है बस वोट दे दिया तो सारा काम नेता जी करेंगे ,अरे झांक के देखिये अपने अन्दर अगर आपका बच्चा स्कूल में ठीक नहीं पढ़ पाता आप क्या करते है ,खुद पढाते है ,टयूसन भेजते है ,स्कूल बदलते है मगर क्या आप चुप बैठते है नहीं न कयोंकि ये आपके बच्चे के भविष्य से जुड़ा है इसलिए आप बहुत सोच विचार कर कदम उठाते है .आज मोकामा के गरीब से गरीब परिवार का बच्चा भी अच्छे से अच्छा स्कूल जाने लगा है.अपने सामर्थ्य से ज्यादा ही कर रहे है लोग अपने बच्चों के लिए के क्या पटना , दिल्ली अब तो विदेश भी भेजने लगे है .कर्जा लेकर,खेत बेचकर पढ़ा रहे है अपने बच्चो को ,कतई  गलत नहीं है कयोंकि एक शिक्षित बच्चा ही सही  समाज का निर्माण करेगा.मगर उसके स्वास्थ्य का ठीका पने जनप्रतिनिधि को दे दिया है ,उम्मीद गलत भी नहीं है ,पर अगर येलोग कुछ नहीं कर प् रहे है तो कौन करेगा ,क्या इस बात के लिए अपने मोकामा में चरक और बैद्यनाथ का पैदा लेने का इन्जार करेंगे हमसब .आज सारे जनप्रतिनिधि बहुत ताकतवर हैं बिहार में हीओ नहीं भारत का भविष्य बनाते और बिगारते है तो मोकामा के साथ ये अन्याय क्यों ,मोकामा की सबसे बड़ी जरूरत है ये ,सबसे विकट समस्या है ये तो ताला क्यों लगा है संबके मुंह पर.

मोकामा को एक अच्छे सरकारी अस्पताल की सख्त जरूरत है.सरकार नहीं कर पाती  है तो खुद कमर कसना होगा.आपसी मतभेद दूर कर मील बैठ कर इस समस्या का समाधान निकलना होगा.