एक सप्ताह में दूसरा कत्ल

मोकामा में अपराध का पुनह आगमन होता प्रतीत हो रहा है. 1 हप्ते के अन्दर ये दूसरा वाकया है जब किसी की हत्या हुई है.पुरे बिहार का यही हाल है.हर जिले में हत्याओं का दौर चल निकला है.मोकामा जो कभी अपराध की राजधानी कहा जाता है पिछले 1 दशक से शांत था.पर पुनह लगता है की इसका पुराना रूप रंग लौट आया है.अभी मोर में हुए गोलीकांड में मरे युवक गौतम यादव की चिता ढंडी भी नहीं हुई थी की रविवार को एक और हत्या की खबर से मोकामा कापने लगा .इस बार हत्यारों ने बन्दुक का इस्तेमाल न करके डंडे और पत्थर से पिटाई कर जान ली है .मोकामा के पंचमहला निवासी मुकेश को उसके ही किसी जानने वाले ने पहले फ़ोन कर बुलाया और फिर हत्या कर दी.पशु अस्पताल के अन्दर खून के धब्बे मिले है .पुलिस ओपी के सामने पशु अस्पताल परिसर के पीछे खंडहरनुमा भवन में कई जगह खून के धब्बे मिले, जिससे पीट-पीटकर हत्या किए जाने के कई साक्ष्य मिले। चारदीवारी के सटे मुकेश के गले से गिरा माला और बगीचे में भी कई जगह खून के धब्बे मिले.बंधक बनाकर की गई हत्या,हत्यारों ने पहले अस्पताल के समीप मुकेश को बुलाया और उसे कब्जे में ले किया. फिर अस्पताल के खंडर में ले गए जहां. जगह-जगह खून के मिले धब्बे से प्रतीत होता है कि बदमाश और मुकेश के बीच हाथापाई हुई होगी. लेकिन अपराधियों की संख्या अधिक होने के कारण मुकेश बच नहीं सका.

पांच भाइयों में सबसे छोटा था मुकेश.मुकेश पाच भाइयों में सबसे छोटा था। मां गिरिजा देवी, भाई कांत सिंह, योगी सिंह समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था.जाम स्थल पर एएसपी मनोज कुमार तिवारी, बीडीओ नीरज कुमार, सीओ जयकृष्ण प्रसाद आदि मौजूद रहे.प्रशासन का डर लोगो के मन से उतर चूका है और वो हत्या तक करने से नहीं डरते है.5 दिन के भीतर ये दूसरा हत्या है,मगर किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगता .सरकार सोई है ,प्रशासन परेशान है और जनता जान गवां रही है .