याद किये गए श्रीबाबू

मोकामा के मरांची में बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की पुण्यतिथि  मनाई गई .इस कार्यक्रम काआयोजन विचार मंच के सौजन्य से  गया था.जिसका संयोजन पवन कुमार ने किया.कार्यक्रम की शुरुआत बीडीओ नीरज कुमार, सीओ जयकृष्ण प्रसाद, थानाध्यक्ष राजीव कुमार पटेल, भाजपा नेता शशि शंकर शर्मा व जदयू नेता परशुराम पारस ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया बीडीओ नीरज कुमार और श्रीकृष्ण विचार मंच के अध्यक्ष पवन कुमार ने कहा कि श्रीबाबू का जीवन प्रेरणा स्रेत है तथा उनके मुख्यमंत्रीत्वकाल में बिहार ने कई बुलंदियों को छुआ. मौके पर मुखिया राम कुमार, पूर्व मुखिया केदार सिंह, मंटू यादव, राजकुमार यादव, प्रणव कुमार, अशोक सिंह, संजय सिंह आदि मौजूद थे.

श्री बाबू 02/04/1946 से 31/01/1961 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे .डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तथा अनुग्रह नारायण सिन्हा के साथ वे भी आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं। बिहार, भारत का पहला राज्य था, जहाँ सबसे पहले उनके नेतृत्व में ज़मींदारी प्रथा का उन्मूलन उनके शासनकाल में हुआ.आघुनिक बिहार के निर्माता डा0 श्री कृष्ण सिंह स्वतंत्रता-संग्राम के अग्रगण्य सेनानियों में से रहे है . इनका का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र एवं जन-सेवा के लिये समर्पित था . स्वाधीनता की प्राप्ति के बाद बिहार के नवनिर्माण के लिए उन्होंने जो कुछ किया उसके लिए बिहारवासी सदा उनके ऋणी रहेंगे . राजनीतिक जीवन के दुर्धर्ष संघर्ष में निरन्तर संलग्न रहने पर भी जिस स्वाभाविकता और गम्भीरता के साथ वे अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते थे. वह आज के युग मे अत्यन्त दुर्लभ है . सत्य और अहिंसा के सिद्धांत में उनकी आस्था अटल थी .

अपनी अद्भुत कर्मठता उदारता एवं प्रखर राजनीतिक सूझ-बूझ के धनी डा0 श्रीकृष्ण सिंह सन् 1917 ई0 में लेजिस्लेटिव कौंसिल और सन् 1934 ई0 में केन्द्रीय एसेम्बली के सदस्य चुने गये . सन् 1931 ई0 का भारतीय संविधान जब 1 अप्रैल 1937 से लागू हुआ तो डा0 श्रीकृष्ण सिंह के प्रधान मंत्रित्व से ही बिहार में स्वायत्त शासन का श्रीगणेश हुआ . वे ही बिहार के एक ऐसे वरेण्य कालपुरूष थे जो जीवन के अंतिम घड़ी (31 जनवरी 1961) तक बिहार के मुख्य मंत्री के सम्मानित पद पर बने रहे . उन्होंने इस राज्य का लगभग 15 वर्षो तक मुख्य मंत्री के रूप में सफलतापूर्वक दिशा-निर्देश किया था एवं इस राज्य के नव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी .

कृष्ण सिंह बड़े ओजस्वी अधिवक्ता थे. ये 1937 में केन्द्रीय असेम्बली के और 1937 में ही बिहार असेम्बली के सदस्य चुने गए. 1937 के प्रथम कांग्रेस मंत्रिमंडल में ये बिहार के मुख्यमंत्री बने. राजनैतिक बंदियों की रिहाई के प्रश्न पर इन्होंने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पंत ने त्याग पत्र की धमकी देकर अंग्रेज सरकार को झुकाने के लिए बाध्य कर दिया था. 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने पर कृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल ने त्याग पत्र दे दिया. 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए गांधी जी ने सिंह को बिहार का प्रथम सत्याग्रही नियुक्त किया था 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी ये जेल में बंद रहे.1946 में कृष्ण सिंह फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने और 1961 तक मृत्युपर्यंत इस पद पर रहे. इनके कार्यकाल में बिहार में महत्त्व के अनेक कार्य हुए. जमींदारी प्रथा समाप्त हुई, सिंद्री का खाद कारखाना, बरौनी का तेल शोधक कारखाना, मोकामा में गंगा पर पुल इनमें से विशेष उल्लेखनीय है.