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टाल के किसानों ने रुकवाई पईन की उड़ाही

किसानों ने कहा कि पईन की जमीन को छोड़कर खेतों की जमीन में किया जा रहा गड्‌ढा
मोकामा . पईनकी उड़ाही के नाम पर किसानों की कृषियोग्य निजी जमीन को बिना सहमति खोदे जाने के विरोध में किसानों ने बवाल काटा तथा जेसीबी और पोकलेन मशीनों को वापस लौटा दिया। कई गांवों के दर्जनों किसानों ने कार्यस्थल पर उड़ाही कार्य को सिर्फ रुकवाया बल्कि किसानों के खेतों से काटी गई मिट्टी को वापस खेतों में डलवाया। मरांची के किसान अरविंद सिंह और अजय सिंह ने बताया कि टाल की नदियों की वास्तविक और प्राकृतिक धारावाली जगह को छोड़कर किसानों की रैयती जमीन में जेसीबी और पोकलेन लगाकर मिट्टी काटी जा रही है। काटी गई मिट्टी को भी वहीं छोड़ दिया गया है। किसानों ने बताया कि मिट्टी काट कर बिना ढालनुमा बनाए मिट्टी को वही छोड़ दिया जा रहा है जिससे किसानों को लाभ के बदले नुकसान पहुंचेगा। पईन के पास मिट्टी का ढेर जमा होने से खेत का पानी तो पईन में जाएगा और ही पईन का पानी खेतों में पाएगा।

ठेकेदार कर रहे मनमानी, रैयती जमीन खोद रहे
मरांची टाल के किसानों ने भी उड़ाही के तौर तरीकों पर ऐतराज जताया है। मरांची टाल के किसान अरविंद सिंह, ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि मरांची में भी कई किसानों की रैयती जमीन पर भी मिट्टी काटने के लिए निशान लगाया गया है। मरांची उत्तरी पंचायत के मुखिया रामकुमार सिंह की भी निजी जमीन पर निशान लगाया गया है। मरांची के किसानों ने बताया कि लखनचंद औंटा टाल के बाद मरांची टाल में भी रैयती जमीन को कटवाया जाता। किसानों ने बताया कि उड़ाही के बाद मिट्टी का निस्तारण नहीं होने से उड़ाही का लक्ष्य पूरा नहीं होगा और दलहनी फसलों की खेती के दौरान कृषि यंत्रों तथा वाहनों के आवागमन में भी समस्या उत्पन्न होगी। गौरतलब है कि मोकामा टाल में राज्य सरकार का जल संसाधन विभाग पईन और नदियों की उड़ाही करा रहा है।

उड़ाही का तरीका सही नहीं है
लखनचंद टाल के किसान मानिक सिंह, गोपाल, राजकिशोर सिंह, सतीश सिंह की मानें तो उड़ाही के नाम पर मनमानी की जा रही है तथा ठेकेदार और अभियंताओं के गठजोड़ के कारण उड़ाही के बदले किसानों की रैयती जमीन को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। औंटा टाल किसान समिति के सचिव रमेश चंद्र सिंह ने बताया कि समझौते के विपरीत किसानों की निजी जमीन और सार्वजनिक उपयोग वाले रास्ते में बगैर किसानों की सहमति के 14 से 15 फीट चौड़ा गड्ढा कर दिया गया है।

Source : Dainik Bhasakr

mkm

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