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मेघा रे ——————————–

मेघा रे !तू आया बड़ा बन -ठन के

आगे -आगे नाचती -गाती बयार चली

मोरों ने भी पंख पसारे तेरे स्वागत की

मेघा रे …..

पेड़ झुक झांकने लगे गर्दन ऊचकाये

आँधी चली धूल भागी घाघरा उठाए

मेंढकों की टर्ट्राह्ट से चितवन गूँज उठा

पंछियों की जल-कलरव से नदिया सरका

मेघा रे ……..

बूढे पीपल ने आगे बढ़कर जूहार की

बरस तू काली घटाओ के साथ

बोली अकुलायी लता ओट से

मेघा रे !……

प्यासे तालाबों मे आया जल परात भर के

बाँध टूटा झर -झर मिलन के

अश्रु धड़का ढरका ढर -ढर के

प्यासी नदियाँ वही कल -कल के

मेघा रे !तू आया बड़ा बन -ठन के

(sawanjali sharma )

मेघा रे ——————————-
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