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कल शाम दिनांक 21 जनवरी को मोकामा सकरवार टोला के वरिष्ठ निवासी श्री प्रसिद्ध नारायण सिंह का निधन हो गया। उनकी आयु करीब नब्बे साल की थी.एक समाजसेवक के रूप में मोकामा को उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी.

कल ही   दिनांक 21 जनवरी को सकरवार श्री बबलू शर्मा जी के माता जी का देहांत हो गया .

 

 

 

 

 

 

 

अच्छे लोग कभी नहीं मरते वो अपनी माद्दी जिस्मानी सूरत से तो आज़ाद हो जाते हैं लेकिन उनकी यादें दिलों में हमेशा घर किए रहती हैं और हम उन्हें वक़्तन फ़वक़्तन याद करते रहते हैं।

 

साल के प्रारम्भ होते ही   3 तरुण और 2 बुजुर्ग की मौत से पूरा सकरवार टोला शोक में डूबा हुआ है.नया साल मानो प्रलय की सुनामी लेकर आया है,खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा.नये साल का जश्न मनाने गए कुछ युवा वेस्ट बंगाल गए थे मागे वंहा से लौटते समय संजीव और दीपक की दर्दनाक मौत हो गई,मोह्हले के कुछ युवा घायल भी हुए थे.युवकों का शव देखकर वो कौन शख्स था जिसकी आँखें नाम न हुई. अभी जख्म हरे थे की अगले ही दिन अधिवक्ता श्री रामनंदन सिंह जी का निधन हो गया, रामनंदन सिंह जी एक मात्र पुत्र श्री विनय जी की मृत्यु भी आज से करीब 9 साल पहले हो गई थी.इनके गुजरने के 4 दिन बाद ही पूचुस गुजर गया ,पूचुस भी सिर्फ 20-21 साल का लड़का था कुछ वर्ष पूर्व गंगा नदी में नहाते समय चोट लगने की वजह से चल फिर नहीं पा रहा था .पूचुस के पिता श्री मांझी दा की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी और परिवार समाज से भी किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिली,और इलाज के आभाव में पुचूस गुजर गया .और 12 तारीख को  श्री महेंद्र सिंह जी का निधन हो गया ,वो कृषि बिभाग से सेवा निवृत थे,पिछले कुछ सालों से बीमार चल रहे थे..

नये साल के आरम्भ से ही समूचा सकरवार समाज शोक में डूबा हुआ है. वैसे तो मृत्यु का कोई तय समय नहीं होता .मगर इतनी जल्दी जल्दी एक के बाद एक शायद समाज झेल न पायेगा.

 

ईश्वर इन सभी पुण्यात्माओं को शांति दें.परिवार और समाज को शक्ति दें की वो ये दुःख झेल सके.

नहीं रहे प्रसिद्ध बाबु
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