औंटा में 3 पीढ़ियों ने मिलकर पर्यावरण को सवारने का संकल्प लिया

सूबे के मुख्यमंत्री माननीय श्री नितीश कुमार के आवाहन पर बिहार के हर जिले में बड़े ही संकल्प के साथ ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाया जा रहा है . मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए ‘करो या मरो’ की तर्ज पर ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाने की घोषणा की थी . मोकामा के आदर्श ग्राम औंटा में भी बहुत ही उत्साह से वृक्षारोपण का कार्यक्रम किया गया.कार्यक्रम की खास बात रही की शीला उच्च विदयालय के वर्तमान और पूर्व शिक्षको और छात्रों ने मिलकर हिस्सा लिया.औंटा के शीला उच्च विद्यालय प्रांगण में सोमवार को पौधराेपण कार्यक्रम हुआ. विद्यालय के भूतपूर्व प्रधानाध्यापक मुरारी कुमार मिश्रा जी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण बहुत जरुरी है.इससे न केवल आज की पीढ़िया स्वस्थ रहेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका भरपूर फायदा मिलेगा.बीती सदी के दौरान पृथ्वी का औसत तापमान 0.28 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. पृथ्वी के औसत तापमान में हो रही यह वृद्धि जलवायु और मौसम प्रणाली में व्यापक स्तर पर विनाशकारी बदलाव ला सकती है. जलवायु और मौसम में बदलाव के सबूत मिलने शुरू हो चुके हैं. भू-विज्ञानियों ने खुलासा किया है कि पृथ्वी में से लगातार 44 हजार बिलियन वाट ऊष्मा बाहर आ रही है.इसलिए हम सभी का कर्तव्य है की अपनी धरती को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाये .

वर्तमान प्रधानाध्यापक अशोक कुमार जी कहा की औद्योगिकीकरण के बढऩे और वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो रही है.पिछले 50 वर्षों की वार्मिंग प्रवृत्ति लगभग दोगुना हो गई है पिछले 100 वर्षों के मुकाबले.समुद्र का तापमान 3000 मीटर की गहराई तक बढ़ चुका है.समुद्र जलवायु के बढ़े हुए तापमान की गर्मी का 80 प्रतिशत सोख लेते हैं.भूमध्य और दक्षिण अफ्रीका में सूखे की समस्या बढ़ती जा रही है.अंटार्टिका में बर्फ जमे हुए क्षेत्र में 7 प्रतिशत की कमी हुई है जबकि मौसमी कमी की रफ्तार 15 प्रतिशत तक हो चुकी है.उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्से, उत्तरी यूरोप और उत्तरी एशिया के कुछ हिस्सों में बारिश ज्यादा हो रही है.पश्चिमी हवाएं बहुत मजबूत हो रही हैं.सूखे की रफ्तार तेज होती जा रही है, भविष्य में यह ज्यादा लंबे वक्त तक और ज्यादा बड़े क्षेत्र में होंगे. पर्यावरण के प्रदूषण के कारण कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जिसकी वजह से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं पर्यावरण की विनाश की बढ़ती समस्या से बचने के लिए पेड़ अहम भूमिका निभाते है इसलिए सभी लोगो को ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाकर धरती को हरा भरा बनाना चाहिए.विदयालय के पूर्व छात्र सत्यम कुमार मनीष ने कार्यक्रम में अपनी हिस्सेदारी के बाद कहा की पेड़ न सिर्फ हरयाली और सुन्दरता बढ़ाते है बल्कि धरती के वर्षा चक्र को संतुलित भी करते है जिससे वजह से बरसात अपने समय से और सही मात्रा में होती है.जिसके कारन मानव जीवन सहज बना रह सकता है .पेड़ हमें प्रदूषण से भी बचाते है इसलिए हमलोगों को वृक्षारोपण में अवश्य भाग लेना चाहिये .

इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में विद्यालय के भूतपूर्व प्रधानाध्यापक मुरारी कुमार मिश्रा सहित वर्तमान प्रधानाध्यापक अशोक कुमार एवं शिक्षक-रामानुज प्रसाद,पंकज कुमार,सुभाष सर,धीरज सर सहित कई शिक्षक शिक्षिकाओं ने हिस्सा लिया. इन सभी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम को सफल बनाया गया .विद्यालय के भूतपूर्व छात्रों के साथ साथ वर्तमान में अध्यनरत विद्यार्थियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही .इस कार्यक्रम के माध्यम से वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने एवं पर्यावरण को संरक्षित करने का संदेश दिया गया .स्कूल शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को पेड़ नहीं काटने व जल को दूषित नहीं करने की शपथ दिलाई गई है .

रामकृष्ण सिन्हा जैसे व्यक्तित्व की जीवनी से युवा पीढ़ी को अवगत कराकर उन्हें प्रेरित करना चाहिए:- मुख्यमंत्री

पटना, 11 अगस्त 2018:- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में कवि एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व0 रामकृष्ण सिन्हा के काव्य संग्रह ‘टंकार’ का लोकार्पण किया। बिहार विधान परिषद के उप सभागार में आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में कार्यक्रम के संयोजक विधान पार्षद श्री नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री को गुलदस्ता भेंटकर उनका स्वागत किया।लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस काव्य संग्रह के लोकार्पण समारोह में शामिल होकर मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है। आज शहीद दिवस के दिन 11 अगस्त को जिस पुस्तक का लोकार्पण हुआ है, उसमंे महान स्वतंत्रता सेनानी स्व0 रामकृष्ण सिन्हा द्वारा लिखी गयी कविताओं का संग्रह है। 11 अगस्त के साथ स्व0 रामकृष्ण सिन्हा का अद्भुत संबंध है। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त को आज ही के दिन वर्ष 1942 में युवाओं के एक समूह ने सचिवालय को घेर लिया था और वे वहाॅ झंडा फहराना चाहते थे, जिसका अंग्रेज सिपाहियों ने काफी विरोध किया। इन सबके बीच स्व0 रामकृष्ण सिन्हा ने सचिवालय के अंदर प्रवेश कर झंडा फहरा दिया। यह अपने आप में काफी महत्वपूर्ण बात है कि झंडा फहराने के बाद भी जो भीड़ वहाॅ जमा थी, वह पीछे हटने को तैयार नहीं थी। अंग्रेजों ने भीड़ को पीछे न हटते देख फायरिंग कर दी, जिसमें सात लोग आज ही के दिन सायंकाल में शहीद हो गये। सात लोग जो शहीद हुए उनकी स्मृति और सम्मान में हम सब शहीद दिवस मनाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों की जो सात मुर्तियाॅ लगी हैं, वह काफी अद्भुत है। इन्हें इटली से लाकर लगाया गया है। सात लोग तो शहीद हो गये लेकिन रामकृष्ण सिन्हा झंडा फहराने में कामयाब हुए और वे वहां से निकल गये। बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया और सजा भी हुई। जिस रामकृष्ण सिन्हा ने इतना बड़े काम को अंजाम दिया, उन्होंने कभी भी इसकी चर्चा तक किसी से नहीं की। जेल में ही उन्होंने कविताएँ लिखीं। उन्होंने सरकारी नौकरी भी की और सेवानिवृति के बाद 61 वर्ष की उम्र में ही उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों का दायित्व बनता है कि इस तथ्य को प्रचारित-प्रसारित करें कि जिस व्यक्ति ने इतना बड़ा काम किया, उसने इसकी चर्चा तक किसी से नहीं की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोकामा से हमारा आत्मीय संबंध है। जिस धरती पर स्व0 रामकृष्ण सिन्हा जी पैदा हुए थे, वहां के लोगों ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, जिसके कारण लोग हमें जानने लगे। मोकामा को हम कभी भूल नहीं सकते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं तो यही चाहूँगा कि ‘टंकार’ नाम से जो पुस्तक प्रकाशित हुई है, इसे सभी सरकारी पुस्तकालयों के साथ ही प्रत्येक स्कूलों में भी पहुंचा दिया जाए ताकि नई पीढ़ी के लोग यह जान पायें कि सचिवालय पर झंडा किसने फहराया था। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त 1942 को 7 लोग शहीद हुए थे, इनमें सारण जिले के उमाकांत प्रसाद सिंह, पटना के धनरुआ निवासी रामानंद सिंह, भागलपुर के सतीश प्रसाद झा, औरंगाबाद के जगपति कुमार, मिलर हाई स्कूल पटना में छात्र रहे देवीपद चैधरी, सारण जिले के नया गाँव निवासी राजेन्द्र सिंह एवं रामगोविंद सिंह के नाम शामिल हंै।

शहीदों के परिवारों के प्रति हमारे मन में आदर का भाव होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि हम सभी को रामकृष्ण सिन्हा जी से प्रेरणा लेनी चाहिए कि उन्होंने इतना बड़ा काम किया और कभी इसका दावा तक नहीं किया। आजकल तो जमाना 180 डिग्री से सीधे घूम गया है, पूरा जमाना ही बदल गया है। लोग करते कुछ नहीं और सिर्फ झूठा दावा करने में ही लगे रहते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण सिन्हा जैसे व्यक्तित्व की जीवनी से युवा पीढ़ी को अवगत कराकर उन्हें प्रेरित करना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का इतिहास अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। चंपारण के किसानों को नीलहों के अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए राजकुमार शुक्ल के काफी आग्रह और निरंतर प्रयास के कारण 10 अप्रैल 1917 को गाँधी जी पटना पहुंचे और उसी दिन चंपारण के लिए रवाना हो गये। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर एक साल तक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गाँधी जी के उपर ‘विमर्श’ कार्यक्रम से हुई क्योंकि गाँधी जी कहा करते थे कि मेरा विचार ही मेरा सन्देश है। उनके विचारों से युवा पीढ़ी को अवगत कराने एवं उसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए गाँधी जी पर दो किताबें प्रकाशित करवाकर स्कूलों में कथावाचन की शुरुआत करवाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के बारे में नहीं जानता हो। मुझे पूरा विश्वास है कि 10 से 15 प्रतिशत लोग भी अगर गाँधी जी के विचारों को आत्मसात कर लंे तो फिर जमाना 180 डिग्री घूमकर वापस रामकृष्ण सिन्हा के दौर में पहुँच जाएगा। गाँधी जी के जन्म के 150 साल पूरा होने को हंै, ऐसे में हमने महामहिम राष्ट्रपति और आदरणीय प्रधानमंत्री जी को दो सुझाव दिए थे। पहला यह कि पूरे देश में गाँधी जी के विचारों पर आधारित कथावाचन करायें एवं दूसरा जेल में बंद जो बुजुर्ग व्यक्ति या महिलायें हैं, जिनका कोई घृणित अपराध नहीं हो, उन्हें रिहा कर दिया जाय। केंद्र सरकार ने इसे मान भी लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को गाँधी जी के जीवन से सीखना चाहिए। भारत छोड़ो आन्दोलन का संचालन जे0पी0 और लोहिया ने भी किया, उन सबकी बदौलत ही देश आजाद हुआ। इस बात को निरंतर हमें युवा पीढ़ी को बताना होगा कि देश गुलाम था और वह कैसे आजाद हुआ। देश को आजाद कराने में काफी लोगों को शहादत देनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि आजकल तो भटकाव और गाली-गलौज का माहौल है। समाज में टकराव पैदा कराने के लिए सोशल मीडिया का दुरूपयोग किया जा रहा है इसलिए नई पीढ़ी के लोगों को देश को आजाद कराने वाले शहीदों एवं गाँधी जी के विषय में बताने की आवश्यकता है ताकि उनमें बदलाव आ सके। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण सिन्हा जैसा व्यक्तित्व होना कोई मामूली बात नहीं है। इनसे युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद स्व0 रामकृष्ण सिन्हा के सुपुत्र श्री नवेंदु शर्मा सहित उपस्थित लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए रामकृष्ण सिन्हा के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘टंकार’ पुस्तक को प्रकाशित करने वाले मानक प्रकाशन के प्रकाशक श्री मथुरा प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री ने गुलदस्ता भेंटकर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन विधान पार्षद श्री रामवचन राय ने किया।लोकार्पण समारोह को बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति श्री हारून रशीद, बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार चैधरी, उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पाण्डेय, विधान पार्षद श्री नीरज कुमार ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ0 निहार नंदन सिंह सहित बिहार विधानमंडल के सदस्यगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

साक्षी की सफलता से गौरवान्वित हुआ मोकामा

मोकामा। पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, इस कहावत को मोकामा के महेन्द्रपुर गांव की यशस्विनी बेटी साक्षी कुमारी ने चरितार्थ किया है। साक्षी ने अपनी शैक्षणिक प्रतिभा को साबित करते हुए नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में शत प्रतिशत अंक लाने का गौरव प्राप्त किया है। पटना जिले में सामान्य श्रेणी में एक मात्र साक्षी को ही शत प्रतिशत अंक आया है और अब उसकी आगे की पढाई नवोदय विद्यालय में होगी। अपनी शैक्षणिक प्रतिभा को सार्थक करने वाली साक्षी राकेश कुमार सिंह और सोनी सिंह की बेटी और दादा राजेन्द्र प्रसाद सिंह एवं दादी श्रीमती प्रभा देवी की पोती है। साक्षी की इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा महेन्द्रपुर और मोकामा क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है।

वह बालिका शिक्षा के क्षेत्र में समाज में एक नजीर के तौर पर उभरी है। राकेश सिंह ने बताया कि उनकी बेटी साक्षी न सिर्फ पढाई बल्कि संगीत और चित्रकला में भी रुचि रखती है। पिछले वर्षों के दौरान उसने पढाई तथा संगीत एवं चित्रकला की विविध प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार हासिल किए हैं। अब नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में सौ प्रतिशत अंक हासिल करने वाली एक मात्र बच्ची बनकरं साक्षी ने अपनी श्रुतशीलता को सार्थक किया है।

सात साथियों के शहादत के बाद भी रामकृष्ण सिंह ने सचिवालय पर झंडा फहराया था

आज सचिवालय पटना में साथ शहीद का स्मारक पटना के गौरव को बढ़ता है.बिहार के स्वतंत्रा सेनानिओं की क़ुरबानी की गाथा सुनाता है . 11 अगस्त, 1942 को जब कुछ युवक सचिवालय पर तिरंगा फहराने लेकिये आगे बढे तो किसी को ये अनुमान तक नही था की अंग्रेज इस आन्दोलन को दबाने के लिए अपने सबसे वीभत्स तरीके का इस्तेमाल करेंगे .लोहे का विशाल फाटक बंद था. बगल वाले छोटे फाटक में भी ताला लगा दिया गया था. फाटक के अन्दर और बाहर बड़ी संख्या में लाठीधारी पुलिस के जवान तैनात थे. बाहर बड़ी संख्या में घुड़सवार पुलिस भी आदेश की प्रतीक्षा में खड़ी थी. भीतर का पूरा परिसर अंग्रेज और भारतीय अफसरों से भरा था. अंग्रेज अफसरों में मिस्टर डब्लू. जी. आर्चर (कलक्टर), मिस्टर क्रीड(डी.आई.जी.) और मिस्टर स्मिथ (सचिवालय सार्जेन्ट मेजर) ब्रिटिश हुकूमत की ‘नाक’ बचाने के लिए व्यूह-रचना करने में मशगूल थे.

उनके साथ भारतीय अफसर उदित नारायण पांडेय (एस.डी.ओ.), विश्वम्भर चौधरी (डिप्टी कलक्टर) और अली बशीर (डी.एस.पी.) भी थे. परिषद खंड के आगे बंदूकधारी गोरखा पुलिस की टुकड़ी सज-धजकर खड़ी थी. ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’, ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’, ….‘हम सचिवालय पर झंडा फहरायेंगे’ जुलूस आगे बढ़ा और ब्रिटिश हुकूमत एक्शन में आ गयी.जैसे ही युवकों का झुण्ड सचिवालय की तरफ बढ़ा,अंग्रजों ने ताबर तोड़ लाठी चार्ज शुरू कर दिया .भारत माता की जय और वन्दे मातरम के नारे लगात्ते ये युवक हंसकर लाठी खाते आगे बढ़ते गये .सचिवालय की खपरेल पर चढ़ते चढ़ते इनकी संख्या 200 से महज 10 रह गई.मगर ये आजादी के मतवाले रुकने वाले कन्हा थे. अंग्रेजो का झंडा उतार दिया गया.मगर जैसे ही इन्होने तिरंगा फहराना चाहा अंग्रेजो ने गोली बारी शुरू कर दी .जिस नौजवान के हाथ में तिरंगा था उसे गोली मार दी ,इससे पहले वाज युवक निचे गिरता उसने तिरंगा अपने आगे वाले साथी को दे दी ,गोली चलती रही,एक पर एक लोग मरते रहे मगर तिरंगा आगे बढ़ता रहा ,वन्दे मातरम की आवाज़ में अंग्रेज थोरा उलझे तब तक किसी ने तिरंगा गाड़ दिया ,मगर तब तक उसके सात साथी शहीद हो गये .उस युवक ने अपनी जान की तनिक भी परवाह न करते हुए सचिवालय के खपरेल पर तिरंगा फहरा कर अंग्रेजो को चकमा दे दिया .मगर अंग्रेजो ने सचिवालय को पूरी तरह घेर रख था .पुरे सचिवालय की तलाशी हुई .एक माली को इतने गोली बाड़ी के बीच भी पौधे की निराई गुराई करते देख अंग्रेजो ने पकड़ लिया .बाद में पता चला की वो माली कोई और नहीं बल्कि साथ शहीदों का आठवां साथी था जिसने अंग्रेजो के आँखों में धुल झोंकर सचिवालय पर तिरंगा फहरा दिया.सेना के कर्नल चिमनी (भारतीय) ने उस युवक से पूछा – ‘तुमने ऊपर झंडा फहराया?’ युवक ने पूरे जोश और साहस के साथ जवाब दिया – ‘जी हां, मैंने ही उसे फहराया है।’उस युवक का सिर मुड़ा हुआ था। वह एक धोती पहने और शरीर पर भी लपेटे हुए था

उस युवक ने अपना परिचय दिया – ‘नाम रामकृष्ण सिंह, घर मोकामा, पटना कॉलेज में आनर्स का विद्यार्थी. उस युवक ने पूछताछ कर रहे भारतीय अफसरों को अंग्रेजी में धिक्कारना शुरू किया – ‘आप लोगों को शर्म नहीं आती कि विदेशियों की सेवा कर रहे हैं? उन विदेशियों को, जो सात समुंदर पार से आकर हमारे देश पर हुकूमत चला रहे हैं?’रामकृष्ण सिंह को कैम्प जेल भेज दिया गया .इतिहास में इतना ही दर्ज है। फिर रामकृष्ण सिंह कहां गया? उसके साथ ब्रिटिश हुकूमत ने क्या सुलूक किया? इसके बारे में आजादी के 50 साल बाद भी किसी ने प्रामाणिक जानकारी नहीं दी.1.उमाकांत प्रसाद सिन्हा (रमन जी) – राम मोहन रॉय सेमिनरी, कक्षा 9, नरेंद्रपुर, सारण.२.रामानंद सिंह – राम मोहन रॉय सेमिनरी, कक्षा 9, साहदित नगर (वर्तमान धनवारुआ), पटना.3 .सतीश प्रसाद झा – पटना कॉलेजिएट स्कूल, कक्षा एक्स, खडहर, भागलपुर4.जगत्पति कुमार – बिहार नेशनल कॉलेज, द्वितीय वर्ष, खरती, औरंगाबाद.5.देविपदा चौधरी – मिलर हाई इंग्लिश स्कूल, कक्षा 9, सिलहट, जमालपुर 6.राजेंद्र सिंह – पटना उच्च अंग्रेजी स्कूल, मैट्रिक वर्ग, बनवारी चक, नयागांव, सारण (बिहार).7.रामगोविन्द सिंह – पुणुन उच्च अंग्रेजी स्कूल, मैट्रिक वर्ग IX, दसरथा, पटना ये सातों साथी इस कांड में शहीद हो गये.इन साथ सहिदों की बात तो अक्सर होती है मगर वो आठवां साथी आज भी गुमनाम ही रहा .बिहार की नयी पीढ़ी तो क्या, पुरानी पीढ़ी को भी यह ठीक-ठीक मालूम नहीं और मालूम हो भी तो उसकी प्रामाणिकता संदेह से मुक्त नहीं कि सचिवालय पर किस क्रांतिकारी ने झंडा फहराया? स्कूल,-कालेज की किताबों में भी यह सवाल अनुत्तरित है. बिहार के अभिलेखागार और इतिहासकार भी इसके प्रति उदासीन हैं.

.हालांकि इतिहास में प्रामाणिक रूप से यह दर्ज है कि वे सात नौनिहाल तिरंगा फहराने के लिए सचिवालय गेट से आगे बढ़ने का प्रयास करते हुए शहीद हुए. तो वह आठवां क्रांतिकारी कौन था, जिसने सचिवालय के गुंबद पर चढ़कर झंडा फहरा दिया?अगस्त क्रांति के 56 साल बाद भी बिहार ने उस ‘युवक’ की सुध नहीं ली। उसने आजाद भारत में करीब 36 साल जिन्दा रहकर भी कभी किसी के सामने खुलकर यह कहना उचित नहीं समझा कि उसने ही सचिवालय पर झंडा फहराया! वह हर साल सचिवालय के शहीद स्थल पर माथा टेकता। अपने संगी-साथी शहीदों की याद करता। संभवतः मन ही मन कहता – ‘तुम शहीद होकर मौन हो गये। मैं तुम्हारा साथी हूं। इसलिए मैं जिंदा रहकर भी मौन साधूंगा’(स्रोत-सन्दर्भ : 8 अगस्त, 1998 में प्रकाशित आलेख ‘शहीद स्मारक’)

मालती रामाश्रय ज्ञान भारती +2 उच्च विद्यालय में मनाया गया बिहार पृथ्वी दिवस

‘बिहार पृथ्वी दिवस’ इस वर्ष तीन दिन मनाया जा रहा है . आठ, नौ और दस अगस्त में से किसी भी दिन स्कूल अपनी सुविधानुसार ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मना रहे हैं . इसमें राज्य के सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों को प्रार्थना के समय बच्चों को पृथ्वी को बचाने के लिए 11 संकल्प दिलाना होगा। साथ ही उन्हें बताना होगा कि पृथ्वी किस स्थिति में है, कैसे बचेगी.पहले सिर्फ नौ अगस्त को ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता था। इस वर्ष तीन दिन कर दिया गया है। बता दें कि राज्यभर के स्कूली बच्चे पृथ्वी को बचाने के लिए 2011 से संकल्प लेते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए ‘करो या मरो’ की तर्ज पर ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाने की घोषणा की थी।

इसी क्रम में कल दिनांक 09-08-2018 को मालती रामाश्रय ज्ञान भारती +2 उच्च विद्यालय में शिक्षकों और छात्रों ने बिहार पृथ्वी दिवस के अवसर पर विभाग द्वारा प्रस्तावित संकल्प जिसमें पर्यावरण, साफ सफाई ,जल का दुरुपयोग नहीं करना, आवश्यकतानुसार बिजली का इस्तेमाल, अपने स्कूल एवं घर की साफ-सफाई आदि का संकल्प लिया गया.बच्चो ने संकल्प लिया की 1.- पृथ्वी के संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए सदैव कार्य करता रहूंगा।२.- वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाऊंगा, बचाऊंगा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण में सहयोग करूंगा।३.- तालाब, नदी एवं पोखर को प्रदूषित नहीं करूंगा।

बच्चों स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया,वृक्षारोपण किया

‘बिहार पृथ्वी दिवस’ इस वर्ष तीन दिन मनाया जा रहा है . आठ, नौ और दस अगस्त में से किसी भी दिन स्कूल अपनी सुविधानुसार ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मना रहे हैं . इसमें राज्य के सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों को प्रार्थना के समय बच्चों को पृथ्वी को बचाने के लिए 11 संकल्प दिलाना होगा। साथ ही उन्हें बताना होगा कि पृथ्वी किस स्थिति में है, कैसे बचेगी.पहले सिर्फ नौ अगस्त को ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाया जाता था। इस वर्ष तीन दिन कर दिया गया है। बता दें कि राज्यभर के स्कूली बच्चे पृथ्वी को बचाने के लिए 2011 से संकल्प लेते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए ‘करो या मरो’ की तर्ज पर ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाने की घोषणा की थी

कन्या उच्च विदयालय सूर्यगढ़ा में 9/8/18 को शिक्षक बंधु एवम् छात्राओं के साथ विधालय परिवार ने अमर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया,उनके सर्वस्व न्योछावर की वीर गाथा से छात्राओं को रूबरू कराया गया । कार्यक्रम के दुसरे भाग में ही आज शिक्षक बंधु ने छात्राओं को पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य पे कृत-संकल्प दिलाया कि पर्यावरण को संरक्षण करना हमारा धर्म है । पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य पे हमें संदेश देना है कि जिस तरह हमारे वेदों में कहा गया धर्मे रक्षित रक्षित ‌‌,धर्म की रक्षा करते हैं तो वह हमारी रक्षा करता है, उसी प्रकार वृक्षे रक्षित रक्षित ।वृक्ष की रक्षा करेंगें तो वे भी हमारे जीवन की रक्षा करेंगें ।वृक्ष हमारे सबसे प्रिय मित्र‌ होते हैं इनकी रक्षा एवम् वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए हमेशा जागरूकता लानी चाहिए ।

मुख्यमंत्री करेंगे मोकामा के बेटे स्वतंत्रा सेनानी रामकृष्ण सिंह की पुस्तक का लोकार्पण

आने वाली 11 अगस्त,शाम 4 बजे , मुख्यमंत्री नितीश कुमार स्व रामकृष्ण सिंह जी की काव्य रचना “टंकार” का लोकार्पण करेंगे .कार्यक्रम की अध्यक्षता मो हारून रशीद जी(माननीय कारकरी सभापति,बिहार विधान परिसद),विशिस्ट अतिथि श्री विजय कुमार चौधरी (माननीय अध्यक्ष,बिहार विधान सभा ),श्री सुशिल कुमार मोदी (माननीय उप मुख्यमंत्री बिहार सरकार) भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे.इस पावन कार्यक्रम में आप सदर आमंत्रित हैं.आइये एक नजर डालते है मोकामा के उस बहादुर बेटे के जीवनी पर जिसने देश की स्वतंत्रा की लड़ाई में अहम किरदार निभाया.जब भी आजादी की चर्चा होगी,रास्टीय गान गाया जायेगा रामकृष्ण जी को जरुर याद किया जायेगा.

बिहार विधानसभा के ठीक सामने लगी सात शहीदों की मूर्ति हमें बार-बार उस दिन की याद दिलाती है, जब सचिवालय पर तिरंगा फहराने की कोशिश में सात छात्रों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. उन छात्रों की यादें हम बिहार वासियों के हृदय में हमेशा के लिए अंकित हो गयी हैं. मगर उस युवक की याद हमें बहुत कम आती है, जिसने आज से ठीक 75 साल पहली उसी रोज पटना सचिवालय पर तिरंगा फहरा कर अपने सात साथियों के बलिदान को सफल बना दिया था.माली बन कर सचिवालय के कंगूरे पर चढ़ने और झंडा फहराने वाला वह युवक शहीद नहीं हुआ, मगर ताउम्र एक आदर्श देशभक्ति भरा जीवन जीते रहा. गुमनाम रहा, मगर हर साल 11 अगस्त को अपने साथियों को नमन करने शहीद स्मारक पहुंचता रहा. और अंत में झंडा फहराने के भावोद्वेग में ही 26 जनवरी, 1984 को उसने शरीर त्याग दिया. उस युवक का नाम था रामकृष्ण सिंह.विधानमंडल के उस वक्त के सुरक्षाकर्मी ने बताया था नाम.यूं तो उस वक्त के किसी सरकारी दस्तावेज में यह विवरण दर्ज नहीं है कि रामकृष्ण सिंह ही वह युवक था, जिसने 11 अगस्त, 1942 को सचिवालय पर तिरंगा फहराया था. मगर सरकारी दस्तावेज यह जरूर बताते हैं कि उस रोज रामकृष्ण सिंह नामक युवक की पटना सचिवालय से गिरफ्तारी हुई थी. झंडा फहराने वाले युवक रामकृष्ण सिंह ही थे, इसकी पुष्टि 1942 में बिहार विधानमंडल के सुरक्षा प्रभारी राजनंदन ठाकुर ने बाद के दिनों में एक आलेख लिख कर की है.वे लिखते हैं, जब सचिवालय पर झंडा फहराने वाले को ढूंढ़ लिया गया, तो हमने उससे पूछताछ शुरू की. उसने अपना परिचय दिया- नाम रामकृष्ण सिंह, घर मोकामा, पटना कॉलेज में आॅनर्स का विद्यार्थी. उसने अंगरेजी में भारतीय अफसरों को धिक्कारना शुरू किया- आप लोगों को विदेशियों की सेवा करने में शर्म नहीं आती? फिर उसे गिरफ्तार कर फुलवारीशरीफ कैंप जेल ले जाया गया.जहां रास्ते में भीड़ ने उसे छुड़ा लिया. उसके घर की कुर्की-जब्ती की गयी और 29 नवंबर, 1942 को उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. नौ महीने तक वे विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद रहे. अाखिरकार उन्हें चार महीने का सश्रम कारावास मिला.

36 साल की सरकारी सेवा में 12 से अधिक शहरों में तबादला दिलचस्प है कि उस युवक ने कभी इस बात को भुनाने की कोशिश नहीं की कि सचिवालय पर झंडा फहराने वाला वही था.आजादी के बाद दिसंबर, 1947 में उसने बिहार सिविल सेवा ज्वाइन कर ली. सब डिप्टी कलेक्टर के रूप में नौकरी की शुरुआत की और 1983 में प्लानिंग डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए. इस बीच उन्होंने सादगीपूर्ण ईमानदार जीवन जिया. उनके पुत्र नवेंदु शर्मा बताते हैं कि 1942 में ही उन्होंने खादी पहननी शुरू कर दी थी और जीवनपर्यंत खादी पहनते रहे. 1972 तक तो उनके घर में उनकी मां चरखा काट कर धागा तैयार करती थीं. फिर उसी धागे से उनके पिता के लिए खादी ग्रामोद्योग से वस्त्र खरीदा जाता था. ईमानदारी का आलम यह था कि 36 साल की सेवा में 12 से अधिक शहरों में इनका तबादला हुआ और जब रिटायर हुए, तो घर चलाने के लिए एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करनी पड़ी.घर में काती गयी सूत के कपड़े पहनते रहे.1942 के भारत छोड़ो आंदोलन ने उनके मन में देशप्रेम की जो अलख जगायी, वह उन्हें ताउम्र निर्देशित करती रही. धर्म और जाति को नहीं मानने की वजह से तीन बार उन्हें जाति से निकाला गया. 1946-47 के दंगों में उन्होंने कई मुस्लिम परिवारों को मोकामा से सुरक्षित पटना पहुंचाया. जेल में रहने के दौरान टंकार के नाम से कविताओं की किताब लिखी, जिसमें उन्होंने सचिवालय गोलीकांड का विस्तार से चित्रण किया. मगर कभी उस किताब को छपवाया नहीं.

वह किताब आज भी उनके घर में रखी है. जब तक पटना में रहे, 11 अगस्त को हर साल अकेले शहीद स्मारक पहुंचते रहे और अपने मित्रों को चुपचाप नमन करके लौट जाते.झंडा फहराने के बाद आया था ब्रेन स्ट्रोक.उनकी मृत्यु ने यह साबित कर दिया कि उनका जीवन देश के लिए ही था. वह 26 जनवरी, 1984 का दिन था. जिस फर्म में वे काम करते थे. वहां उन्होंने झंडा फहराने की प्रथा शुरू की थी. उस रोज झंडा फहराते हुए वे इतने विह्वल हुए कि उन्हें वहीं ब्रेन स्ट्रोक आ गया. देर शाम उन्हें पीएमसीएच लाया गया, मगर वे बच न सके. उसी दिन उन्होंने इस संसार को विदा कह दिया. न कहीं मूर्ति, न कहीं स्मारक.आज भी बहुत कम लोग जानते हैं कि सचिवालय पर झंडा फहराने वाले युवक का नाम क्या था, उसने कैसा जीवन जिया.उनके तीन पुत्र थे, जिनमें से एक का निधन हो गया. दो पुत्र बहादुरपुर स्थित अपने आवास पर रहते हैं. उनकी पत्नी का भी निधन हो चुका है, जिसमें शिरकत करने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहुंचे थे.

मोकामा शक्ति के लिए नही सेवा के लिए भी बहुत मशहूर है

रामाश्रय सिंह जी की मृत्यु के बाद भी सेवा का सिलसिला नहीं रुका .पिछले 35 सालों से सावन के हर सोमवारी को मोकामा के लोग देवघर के रास्ते में कावारिया और व्रतियों के लिए सेवा शिविर लगते है.35 साल पहले इसकी शुरुवात हुई थी .बबन सिंह, स्वर्गीय रामाश्रय सिंह, सुनील सिंह, जयराम सिंह ,छोटका बबन सिंह ,निरंजन सिंह, गोप सिंह ये सभी शुरुआत लगभग 35 वर्ष पहले की थी .आज नवयुवकों ने उनके साथ कंधा से कंधा मिलाकार इस सेवा शिविर को और भी सफल बना दिया है.कारू सिंह,राजेश सिंह उस्ताद,टुनटुन सिंह, मुरारी सिंह(2),धीरज सिंह(2), गौतम महात्मा जी,अविनाश जी,अशोक सिंह,राजकुमार जी,भागिरत जी,नंदू, रूपेश जी आदि और अन्य साथी सेवा शिविर में चारो सोमवारी अपना योगदान दे रहे हैं.गर्म पानी के छीटें ,आयोडेक्स ,दर्द निवारक स्प्रे ,पेन किलर आदि दवाई देकर कावारिया और व्रतियों के रस्ते को सुगम बनाते है

फलाहार,शरबत ,जूस ,फल ,ग्लूकोस ,शीतल पेय आदि उन्हें समर्पित कर वर्तियों की सेवा करते है .मोकामा का सेवा शिविर जिंदल स्टील सिटी कम्पनी के बैनर के निचे सम्प्पन होता है .विडिओ देखिये

रुखसाना प्रवीण जी ने मोकामा के सुनहरे भविष्य की नीवं रखी

आज घड़ी की सुई ने दोपहर के 12:30 बजाये तो मोकामा ने एक नया और सुनहरा इतिहास रचा.मोकामा राम रतन सिंह महा विदयालय के सायकोलोजी की एच.ओ.डी रुखसाना प्रवीण जी ने मोकामा में आयोजित डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह के कार्यकर्म की 100 से ज्यादा तस्वीरों वाली विडिओ रिलीज की .अपने काले इतिहास को दफन कर मोकामा डॉ अब्दुल कलाम के सपनो पर बढ़ निकला है .विजन 2020 के संकल्प लेकर मोकामा के युवाओं और बच्चों ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है जिसकी सुगंध इस धरा पर युगों युगों तक महकेगी.डॉ अब्दुल कलाम पर समर्पित 100 से ज्यादा कार्यक्रम करके मोकामा ने एक रिकॉर्ड भी स्थापित किया .इस कार्यक्रम के लिए मोकामा के सभी लोगों ने अपने अपने माध्यम से सहयोग किया.कुमार कृष्ण ,रौशन जी ने मिडिया जबकि सेकड़ों सोशल मिडिया बधुओं ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया.

मोकामा के सभी शिक्षण संस्थानों और गैर शिक्षण संस्थानों ने कलाम के कार्यक्रम के माध्यम से कलाम के सपनो को सच करने का प्रण लिया.चंन्दन जी,प्रणव शेखर शाही जी,मनीष जी छोटे,आंनद मुरारी जी,पारस जी,ललन जी ,डॉ सुधांशु शेखर जी,संदीप मंडल जी,अशोक जी ,उदय दा,रविश जी,ज्ञान प्रकाश जी,प्रियदर्शन शर्मा,अनुराग जी,अजय दा ,प्रवीण कुमार घंटु जी,चन्दन जी आत्मा,हरि शंकर शाही जी,नीलेश कुमार माधो जी,गोरख प्रसाद सिंह जी,श्रीमती संगीता कुमारी जी,अर्चना जी,पल्लवी जी,प्रिया जी,रिक्की जी ने दिन रात एक कर इस कार्यक्रम को अंजाम तक पहुचाया .इस विडिओ को लांच करते हुए रुखसाना जी ने भावुक होते कहा मोकामा अब सचमुच बदल रहा है.अब यंहा के लोग अब्दुल कलाम की बाते करने लगे हैं.पढाई और नौकरी की बात सोचने लगे है.मोकामा की बेटियां भी आगे बढ़कर पढाई में अपना नाम कर रही है.वह दिन दूर नहीं जब मोकामा का नाम भी पढाई लिखाई और अच्छी चोजों के लिए जाना जायेगा.उन्होंने कार्यकर्म में शामिल सभी बच्चों,शिक्षकों और अभिभावकों को भी सफल कार्यक्रम के लिए शुभकामना दिया.उन्होंने मोकामा के लोगो से अपील किया है की येसे कार्यकर्म रुकने नहीं चाहिए .बल्कि अगली बार 500 से जायदा कार्यकर्म कर मोकामा आगे बढ़े .विडियो देखिये

आज रुखसाना प्रवीण जी करेंगी विडियो लांच

डॉ अब्दुल कलाम के 100 कार्यकर्म की विडिओ रिलीज होगी.राम रतन सिंह महा विदयालय के सायकोलोजी की एच.ओ.डी रुखसाना प्रवीण जी के कर कमलो से ये विडिओ 8.8.18 को दिन में 12:30 बजे लांच होगा.इस विडिओ में डॉ अब्दुल कलाम को समर्पित सप्ताह के कार्यक्रम की तस्वीर है.मोकामा ने डॉ अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर 100 से ज्यादा कार्यकर्म करके एक ने एक सुनहरा नया इतिहास लिखा है .हजारो लोगों ने इस अद्भुत कार्यकर्म को अंजाम तक पहुचाया .इस कार्यक्रम की सफलता में कुछ लोगों ने रात दिन एक किया .मिडिया और सोशल मिडिया के मित्रों ने कार्यकर्म का परचार प्रसार किया.सभी शिक्ष्ण संस्थान ने इस कार्यकर्म को अद्भुत रूप से पेश किया.