मोकामा
धारित्रीसमाचार

मोकामा वीरों की नहीं महावीरों की धरती है.

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ब्रह्मभोज  नहीं धरती को ब्रह्मलोक लोक बनाने के सपने को सच कर रहे है बाल्मीकि बाबु .वैसे तो दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सदियों से सनातन धर्म में ब्रह्मभोज की परंपरा रही है,गरीबो और लाचारो को दान की परम्परा रही .मोकामा के मरांची गांव में रिटायर्ड इंजीनियर बाल्मीकि सिंह (75 साल) की पहल से समाज को नयी दिशा मिल सकती है.  पत्नी की याद में वे मरांची पीएचसी में कमरे का निर्माण करा रहे हैं.मरने से पहले पत्नी को किया था वादा  अब निभा रहे हैं.

छह साल पहले पत्नी के निधन पर ब्रह्मभोज के बदले उन्होंने समाज के हित के लिए काम करने का वादा किया था. ग्रामीणों को जब बहुप्रतिक्षित अभिलाषा पूरी होती नजर आ रही है. पीएचसी में करीब सात लाख रुपये से तीन कमरों का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है. ग्रामीणों को इलाज कराने में हो रही समस्या को लेकर उन्होंने यह सार्थक कदम उठाया. गरीब तबके के लोगों के लिए वरदान साबित होगा. कमरों के निर्माण के बाद चिकित्सा के जुड़े कई आधुनिक उपकरण स्थापित होंगे.प्रर्याप्त जगह के अभाव में संसाधन के बावजूद अस्पताल में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रहे थे. वहीं निजी अस्पतालों में इलाज कराने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा था. कभी ब्रह्मभोज नहीं करने पर इंजीनियर की आलोचना करने वाले लोग आज उनकी सराहना करते नहीं थकते.मरांची में समाज कल्याण कोष बनाने की कवायद तेजमरांची गांव में रिटायर्ड इंजीनियर बाल्मीकि सिंह की पहल के बाद समाज कल्याण कोष बनाने की कवायद तेज है. इस कोष में जमा राशि से सामाजिक हित से जुड़े कार्य कराये जायेंगे. वहीं विषम परिस्थति में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक मदद भी मिलेगी. समाजिक कार्य से जुड़े लोग आगे बढ़ कर योगदान कर रहे हैं. ग्रामीण अशोक सिंह ने बताया कि बाल्मिकी सिंह की पत्नी आनंदा देवी (65)का निधन छह वर्ष पूर्व पुणे में हुआ था.वहीं, श्राद्धकर्म बनारस में संपन्न कराया गया था. वहीं, श्राद्धकर्म के बाद गांव वापस लौटने पर इंजीनियर ने पत्नी की याद में समाज कल्याण का काम करने का प्रस्ताव रखा था. उन्होंने दुर्गा मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए भी डेढ़ लाख रुपये दिये थे. बाद में उन्होंने बुद्धिजीवियों के कहने पर सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा दुरुस्त करने का प्रयास शुरू किया.रिटायर्ड इंजीनियर बाल्मीकि सिंह कहते हैं  कि गरीब लोगों की खुशहाली से ही दिवंगत की आत्मा को शांति मिलती है. गरीबों को इलाज की सुविधा मेरे लिए सबसे बड़ी खुशहाली साबित होगी, जिसको  लेकर मैंने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का निर्णय लिया. वहीं,  जरूरत पड़ने पर मैं अपनी कमाई का हिस्सा समाज कल्याण के लिए खर्च करता  रहूंगा.

Source (https://www.prabhatkhabar.com/news/patna/story/1115558.html)