मोकामा
कृषिसंपादकीय

मरे किसान हँसे शैतान

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मोकामा टाल के किसान इन दिनों नीलगाय के आतंक  से परेशान है. नीलगायों का एक एक झुण्ड किसानो के हरे भरे खेत पल भर में पल भर में तबाह कर देते है .अपने हरे भरे फसलों को बचने के चक्कर में किसान इस हांड कपाती ठंड में अपने खेतों के बीच जाकर जागने को मजबूर है.कई किसान फसलो को बचाने के चक्कर में अपनी जान से न चले जाये डर लगता है .तमाम रात जागने के बाद भी फसल बचेगी कहना मुश्किल है .शेखपुरा और जमुई की पहाड़ियों से नीलगाय का रुख मोकामा टाल की और हो गया है.पिछले 15 दिनों में सेकड़ों एकर फसल बर्बाद हो चुकी है .धनिया और मटर नीलगायों का फेवरेट हो गया है.

खाने के बाद कंही सुस्ताने भी बैठ जाती है नीलगाय तो बीघा दो बीघा फसल बर्बाद हो जाती है .पहले पटाखों की आवाज़ से डर जाती थी पर अब वो भी अभ्यस्त हो गई है उन्हें पटाखों और रौशनी से कोई भय नहीं रहता है .अकेला किसान दर्जनों नीलगायों को भगाने में भी असमर्थ रहता है .

मोकामा टाल का 15 से 30 प्रतिशत फसल हर साल नीलगायों की भेंट चढ़ जाता है.एसा मन जा रहा है की क्षेत्र में १०००० से ज्यादा नील गाय है.

सरकार बेकार साबित हो चुकी है.किसानों के नाम पर सिर्फ योजनायें है वो भी अधिकारिओं और नेताओं के जेब भरने के लिए .किसानो के दर्द पर हँसना फैशन बन गया है. अब बौधा के मालिक सीताराम .