गंगा आदोलन में शामिल हुए आनंद मुरारी

नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी

 

गंगा आदोलन में आनन्द मुरारी ने राखी गंगा बचाने की बात .

गंगा आदोलन में आनन्द मुरारी ने राखी गंगा बचाने की बात.जीवनदायनी गंगा आज शासन-प्रशासन और लोगों की उपेक्षा से मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई है। आनन्द मुरारी,प्रणव शेखर शाही शामिल हुए गंगा अभियान के सम्मेलन में.ऐसे में गंगा प्रेमियों ने इसे फिर से निर्मल और नदी में न्यूनतम पानी की उपलब्धता की मांग को लेकर देशभर में गंगा आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानद हरिद्वार में पिछले 87 दिनों से गंगा को लेकर अनशन पर बैठे हैं। ऐसे में यहां गांधी शांति प्रतिष्ठान में रविवार से आयोजित तीन दिवसीय गंगा सम्मेलन में जुटे गंगा प्रेमियों ने उनकी तपस्या को शांतिपूर्ण जन आंदोलन में बदलने का फैसला लिया है।

सम्मेलन में गंगा के साथ तमाम नदियों की दशा पर भी चिंता जताई गई। इसमें 11 राज्यों से 100 से अधिक गंगा प्रेमी हिस्सा ले रहे हैं। समापन वाले दिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी
नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है

[caption id="attachment_18353" align="alignleft" width="300"]नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है आनन्द मुरारी

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पहले दिन दो सत्रों में एक स्वर में गंगा प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व पर्यावरण प्रेमियों ने सानद स्वामी की सेहत पर चिंता जताते हुए उनके 10 अक्टूबर से जल भी त्याग देने की चेतावनी को केंद्र सरकार से गंभीरता से लेने को कहा।

जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि आज विकास के नाम पर नदियों का गला घोटने का काम जारी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार मनुष्य को जीवन जीने का अधिकार मिला हुआ है। उसी तरह से नदियों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि नदियों के अधिकार को लेकर हाईकोर्ट ने एक आदेश भी दिया था, जिसपर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से रोक लगवा दी है।

गंगा आंदोलन

के केंद्र उत्तराखंड के कनखल में स्थित मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने जीडी अग्रवाल से केंद्र की बातचीत के संबंध में बताया कि वह गंगा पर निर्माणाधीन व प्रस्तावित परियोजनाओं को खत्म करने, गंगा से खनन बंद करने और इसमें गिरते सीवर और घाटों के निर्माण में गंगा के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल न करने जैसी कई मांगें हैं। उन्होंने गंगा को लेकर बनी समिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री अपना-अपना स्वार्थ देख रहे हैं। एकता परिषद के संस्थापक पीवी राजगोपाल ने कहा पूरी दुनिया में विकास के नाम पर पानी का दोहन और शोषण किया जा रहा है, दुनिया पानी के बिना उजड़ रही है नदियों का अस्तित्व संकट में है। गाधी शाति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रंशात ने कहा कि गंगा सबको संभालती है, लेकिन गंगा की तरफ किसी की भी नजर नहीं है। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता व वैज्ञानिक धुन्नू राय ने कहा कि पैसा कमाने की ही होड़ है, जिसमें बिजली उत्पादन, पर्यटन और सिंचाई के नाम पर गंगा का दोहन हो रहा है। कानपुर के सीबी शर्मा ने बताया कि कानपुर से टेनरियों को उन्नाव स्थानांतरित किया गया है, लेकिन वहां से भी टेनरियों का गंदा जल गंगा में मिल रहा है।

मोकामा बिहार के आनन्द मुरारी ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के नाम पर कटाव से नदियों में उतरा सिल्ट नीचे बिहार तक गंगा में जमा हो रहा है।

जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने कहा कि गंगा एक नदी नहीं एक संस्कृति है इसके संरक्षण के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।(सौजन्य:-दैनिक जागरण)

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