क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में

क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में

क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में
अजीब सी हालत है मेरे शहर का ,पैसे होते हुए गरीब हर एक शक्स है.क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में ,क्यों चुप है सरकार .बाजार में सिक्के नहीं लेने के विरोध में ऑटोचालक रविवार से  हड़ताल पर चले गये. मोकामा के मोर गांव में एनएच- 31 किनारे उन्होंने व्यवसायियों की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन भी किया. बाद में स्थानीय पुलिस व प्रशासन को आवेदन देकर सिक्के नहीं लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. चालकों का कहना है कि कम दूरी तय करने वाले यात्री अक्सर पांच रुपये तक के सिक्के देते हैं, लेकिन पेट्रोल पंप पर एक, दो व पांच रुपये के सिक्के का प्रचलन बंद कर दिया गया है.
क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में
क्यों सिक्के खनकते नहीं मेरे गावं में
वहीं, दस रुपये के सिक्के भी दो–तीन से ज्यादा नहीं लिये जाते. इधर, बाजार के दुकानदार भी एक व दो रुपये के सिक्के नहीं लेते हैं. दूसरी ओर, पांच व दस रुपये के सिक्के लेने में भी अनाकानी करते हैं. ऑटो हड़ताल की सूचना पर स्थानीय अधिकारियों ने ऑटो चालक संघ से बात की. वहीं, कार्रवाई  का आश्वासन देकर ऑटो का परिचालन शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन ऑटोचालक सिक्के नहीं लेने वाले व्यवसायियों व दुकानदारों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की मांग पर अड़ गये.

लोग सवारी की तलाश में दिन भर भटकते रहे.

दूसरी ओर, स्थानीय संवेदक भी परिचालन शुरू कराने के लिए दिन भर हाथ -पांव मारते रहे, लेकिन ऑटोचालकों ने एक नहीं सुनी. ऑटो हड़ताल से इलाके के लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गयी. लोग सवारी की तलाश में दिन भर भटकते रहे.सिर्फ और सिर्फ परेशानी हो रही है क्योंकि बैंक कर्मचारी सिक्के लेने में न नुकुर करते है इसलिए व्यापारी भी इसे अपने ग्राहकों से लेने में आनाकानी करने लगे हैं.जनप्रतिनिधि को तो कोई मतलब ही नहीं है की मोकामा में क्या समस्या है .मोकामा एक बहुत छोटा सा क़स्बा है जन्हा नित प्रतिदिन छोटे छोटे सिक्के से ही बाज़ार सजता है मगर लोग अब डरने लगे हैं की  इसका चलन ही बंद न हो जाए.

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